फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   for control the situation in Afghanistan, united states could contact russia including many Central Asian countries

क्या अफगानिस्तान को संभालने के लिए पुतिन की पनाह में जाएगा अमेरिका, मिल रहे हैं ये संकेत

Thu, 08 Jul 2021 07:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 08 Jul 2021 07:00 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि जब अमेरिका ने 2001 में अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब मध्य एशियाई देशों ने उसका पूरा साथ दिया था। तब अमेरिकी सेना ने उज्बेकिस्तान और किर्गीजिस्तान के सैनिक अड्डों का इस्तेमाल भी किया था...

विज्ञापन
for control the situation in Afghanistan, united states could contact russia including many Central Asian countries
तालिबान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अफगानिस्तान से अपने 90 फीसदी सैनिकों को वापस बुला लेने के बाद अब अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन की चिंता ऐसे इंतजाम करने की है, जिससे अफगानिस्तान में स्थिति बिल्कुल बेकाबू ना हो जाए। इस मकसद से अमेरिकी अधिकारियों ने कई मध्य एशियाई देशों से संपर्क किया है। यहां मिली खबरों के मुताबिक इन देशों से अमेरिका ने अनुरोध किया है कि वे अफगानिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी करें और जो अफगान उनके यहां आना चाहें, उन्हें वे आसानी से वीजा दें।

विज्ञापन


लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिन मध्य एशियाई देशों से अमेरिका ने संपर्क किया है, वे रूस के प्रभाव में हैं। इसलिए अगर अमेरिका सचमुच अपनी इस मंशा को आगे बढ़ाना चाहता है, तो मुमकिन है कि उसे अपने विरोधी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मदद मांगनी पड़े। खबरों के मुताबिक मध्य एशियाई देशों का समर्थन पाने की कोशिश में अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन ने ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों से बात की है। बीते हफ्ते अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने भी ताजिक विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। इसके कुछ समय पहले अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत जालमे खालिजाद उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान की यात्रा पर गए थे।
विज्ञापन


पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि जब अमेरिका ने 2001 में अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब मध्य एशियाई देशों ने उसका पूरा साथ दिया था। तब अमेरिकी सेना ने उज्बेकिस्तान और किर्गीजिस्तान के सैनिक अड्डों का इस्तेमाल भी किया था। लेकिन अब रूस और अमेरिका के बीच बेहतर संबंध थे। अब इन दोनों देशों के संबंधों में जैसा तनाव है, उसके बीच अमेरिका के लिए मध्य एशियाई देशों का समर्थन जुटाना कहीं अधिक कठिन साबित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऐसे में बाइडन प्रशासन को खुल कर रूसी राष्ट्रपति से मदद मांगनी पड़ सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक मध्य एशियाई देश अपने निर्यात और सैनिक ट्रेनिंग के लिए रूस पर निर्भर हैं। आर्थिक मामलों में उनकी चीन पर भी निर्भरता है। ऐसे में बिना रूस की गोपनीय सहमति के ये देश अमेरिका की सहायता करेंगे, इसकी संभावना कम है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के जमाने में अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के कमांडर रहे जनरल डेविड पेट्रेयस ने एक न्यूज वेबसाइट से कहा- ‘रूस मध्य एशिया को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखता है। वह किसी दूसरी ताकत- खासकर अमेरिका- का वहां स्वागत करने के मूड में नहीं रहता।’

अमेरिकी विदेश मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने हाल में दावा किया था कि मध्य एशिया में अपनी मौजूदगी के बिना भी अमेरिका अफगानिस्तान की सेना की मदद करने में सक्षम है। उनका इशारा खाडी में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की तरफ था, जहां से मदद दी जा सकती है। लेकिन विश्लेषकों की राय है कि ऐसी मदद कुछ समय के लिए हो सकती है। आसपास के देशों के बिना सहयोग के अमेरिका लंबे समय तक अफगान फौज का सहारा नहीं बना रह सकता।


थिंक टैंक कारनेगी मॉस्को सेंटर में रिसर्च कंसल्टैंट तेमूर उमारोव ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि आज की स्थिति में ऐसी संभावना ज्यादा है कि रूस और चीन किसी मध्य एशियाई देश में अपनी फौज रखने की अमेरिका की मंशा को नाकाम कर देंगे। 20 साल पहले आतंकवाद संबंधी कई अमेरिकी चिंताओं से ये दोनों देश सहमत थे। लेकिन आज वो चिंताएं घट गई हैं, जबकि इन दोनों देशों से अमेरिका का टकराव बढ़ गया है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed