फिलीपींस चुनाव: मार्कोस की जीत से अमेरिका के लिए खड़ी हुई नई चुनौती, आंखों में कांटे की तरह चुभेगी चीन से दोस्ती
मार्कोस जूनियर देश के पूर्व तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस सीनियर के बेटे हैं। मार्कोस सीनियर को उनके दौर में लोकतंत्र और लोगों की आजादी के हुए क्रूर दमन के लिए याद किया जाता है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि जीत के बाद मार्कोस जूनियर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें उनके पिता के दौर की अप्रिय यादों से न जोड़ा जाए...
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फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर के भारी बहुमत से राष्ट्रपति चुने जाने का मतलब यह समझा गया है कि अगले चार वर्ष तक फिलीपींस चीन को गले लगाने की नीति पर चलता रहेगा। ये नीति निवर्तमान राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने अपनाई थी। विश्लेषकों ने कहा है कि फिलीपींस के ताजा चुनाव नतीजे से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी रणनीति के सामने नई चुनौती पैदा हो सकती है।
फिलीपींस में ‘बोंगबोंग’ नाम से मशहूर नव निर्वाचित राष्ट्रपति के समर्थकों में जश्न का माहौल है। सोमवार से मंगलवार तक राजधानी मनीला की सड़कों पर उनके हजारों समर्थक खुशी मनाते देखे गए। अपनी जीत के बाद मार्कोस जूनियर की तरफ से जारी एक बयान में उनके प्रवक्ता विक रोड्रिगुएज ने कहा- ‘दुनिया से वे कहना चाहते हैं कि उनका आकलन उनके पूर्वजों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके काम के आधार पर किया जाए। जिन लोगों ने बोंगबोंग को वोट दिया और जिन्होंने नहीं दिया, उनसे सबसे उनका वादा है कि वे फिलीपींस के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करेंगे। राजनीतिक विभाजन के बीच वे साझा जमीन की तलाश करेंगे और राष्ट्र को एकजुट करने का प्रयास करेंगे।’
मार्कोस जूनियर ने सार्वजनिक बहसों में नहीं लिया हिस्सा
मार्कोस जूनियर देश के पूर्व तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस सीनियर के बेटे हैं। मार्कोस सीनियर को उनके दौर में लोकतंत्र और लोगों की आजादी के हुए क्रूर दमन के लिए याद किया जाता है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि जीत के बाद मार्कोस जूनियर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें उनके पिता के दौर की अप्रिय यादों से न जोड़ा जाए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चुनाव अभियान के दौरान मार्कोस जूनियर ने ज्यादातर सार्वजनिक बहसों में भाग लेने से इनकार कर दिया। उनकी शासन नीति क्या होगी, इसको लेकर देश में भ्रम का माहौल है।
लेकिन चीन के मामले में उन्होंने निवर्तमान राष्ट्रपति दुतेर्ते की नीति का समर्थन किया है। दुतेर्ते ने कहा था कि चीन से अच्छे संबंध रखने के अलावा फिलीपींस के पास कोई और विकल्प नहीं है। मार्कोस जूनियर ने चुनाव अभियान के दौरान ही मनीला स्थित चीनी राजदूत हुआंग शिलियान से मुलाकात की थी। इसे उनकी विदेश नीति संबंधी प्राथमिकताओं का एक संकेत समझा गया।
चीन से रहा है विवाद
फिलीपींस के चीन के साथ दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमा को लेकर विवाद है। 2016 में अंतरराष्ट्रीय पंचाट ने इस मामले में फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन दुतेर्ते ने उस फैसले पर अमल के लिए जोर नहीं डाला। इस बीच वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुतेर्ते के शासनकाल (2016-2021) में फिलीपींस में चीन के निवेश में उसके पहले के छह साल की तुलना में 12 गुना की बढ़ोतरी हुई।
विश्लेषकों के मुताबिक एक समय अमेरिका की एशिया-प्रशांत रणनीति में फिलीपींस की अग्रणी भूमिका होती थी। इस क्षेत्र में जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा सिर्फ वही एक देश है, जिसके साथ अमेरिका की सैनिक संधि है। इसीलिए दुतेर्ते के दौर में फिलीपींस की विदेश नीति से अमेरिका को निराशा हुई। हालांकि मार्कोस जूनियर अपने शासनकाल में क्या नीति अपनाएंगे, उसका ठोस खाका उन्होंने सामने नहीं रखा है, लेकिन जो शुरुआती संकेत हैं, उसके आधार पर विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका के लिए उनकी जीत अच्छी खबर नहीं है। खासकर उस समय जब चीन की बढ़ती ताकत को रोकना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।