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फेसबुक ने उठाया बड़ा कदम, नेताओं के भाषणों की सत्यता नहीं परखेगा

Thu, 26 Sep 2019 02:29 AM IST
संदीप भट्ट वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सेन फ्रांसिस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सेन फ्रांसिस्को Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 26 Sep 2019 02:29 AM IST
सार

  • भाषण सीधे जनता तक पहुंचाने की पुरानी नीति के तहत दी छूट
  • पूर्व के वीडियो और तस्वीरों की जांच होगी

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Facebook promises not to stop politicians lies & hate

विस्तार

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने घोषणा की है कि वह नेताओं के भाषणों की सत्यता (फैक्ट चेकिंग) नहीं परखेगी। अगले साल अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले फेसबुक ने यह कदम उठाया है, जबकि वह झूठी सूचनाओं से जनमत में हेरफेर के प्रयासों को रोकने के लिए काम करती है। हालांकि इस काम के लिए फेसबुक थर्ड पार्टी एजेंसियों से सहयोग लेती है।

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फेसबुक के वैश्विक मामलों के वाइस प्रेसिडेंट निक क्लेग ने कहा, हमें नहीं लगता कि राजनीतिक बहस में रेफरी बनकर नेताओं के भाषणों को जनता तक पहुंचने से रोकना चाहिए। हमें सार्वजनिक बहस और जांच पड़ताल का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
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इसलिए फेसबुक भाषणों और राजनीतिक पार्टियों की प्रचार सामग्री को तथ्य जांच के लिए थर्ड पार्टी सहयोगियों के पास नहीं भेजेगी। क्लेग ने कहा कि ऐसे खुलासे हुए हैं कि 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की तर्ज पर नवंबर 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी फेसबुक समेत कई प्लेटफार्म पर झूठे कैंपेन चलाए जाएंगे।
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इसे रोकने के लिए फेसबुक ने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के साथ साझेदारी की है। क्लेग ने कहा कि वर्षों से हमारी नीति रही है कि हम भाषणाें को किसी कसौटी पर नहीं परखते।

इन्हें जस का तस जनता तक पहुंचाया जाता है। क्लेग को पिछले साल फेसबुक ने रूसी सोशल मीडिया कैंपेन की जांच के सिलसिले में नियुक्त किया था। क्लेग ने कहा, फेसबुक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ध्यान रखना चाहती है हालांकि गलत सूचनाओं पर उसकी कड़ी नजर रहेगी।

पूर्व के वीडियो और तस्वीरों की जांच होगी

क्लेग ने कहा, अगर कोई नेता अपना पिछला भाषण, वीडियो या लिंक शेयर करेगा तो उसकी जांच जरूर होगी। तथ्य जांच के बाद ही इसे आगे भेजा जाएगा और इसे विज्ञापन का हिस्सा नहीं मानेंगे। क्लेग ने कहा कि जकरबर्ग ने पारदर्शिता बढ़ाने खासतौर पर राजनीतिक विज्ञापनों के मामले में कडे़ कदम उठाए हैं।

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