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यूएनएससी: भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के लिए दो लाख कोरोना टीके दिए... खुली बहस में बोले जयशंकर

Wed, 18 Aug 2021 10:30 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 18 Aug 2021 10:30 PM IST
सार

यूएनएससी की खुली बहस में बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत विश्व शांति के लिए अपने संकल्पों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के लिए दो लाख कोरोना वायरस रोधी टीके दिए हैं।

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External Affairs Minister S Jaishankar chairs the UNSC Open Debate on Technology and Peacekeeping
यूएनएससी की खुली बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar

विस्तार

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बुधवार को 'प्रौद्योगिकी एवं शांति स्थापना' विषय पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की खुली बहस की अध्यक्षता की। इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में हुआ।

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जयशंकर ने इस दौरान कहा कि 21वीं सदी में शांति स्थापना को प्रौद्योगिकी और नवाचार के एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र में होना चाहिए जो जटिल वातावरण में अपने जनादेश को लागू करने में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों को सुविधा प्रदान कर सके।
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विदेश मंत्री ने आगे कहा कि 'रक्षकों की सुरक्षा' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए भारत सरकार ने इस साल मार्च में दुनियाभर में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के कर्मचारियों के लिए दो लाख कोविड-19 रोधी टीके मुहैया कराए थे। उन्होंने कहा कि अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भारत के दृष्टिकोण से शांति स्थापना एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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जयशंकर ने कहा कि मुझे इस बात की घोषणा करने हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है कि यूनाइट (UNITE) जागरूकता प्लेटफॉर्म को चयनित शांति स्थापना अभियानों में जारी करने के काम में भारत संयुक्त राष्ट्र का सहयोग कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म इस उम्मीद पर आधारित है कि वास्तविक समय में शांति स्थापना अभियान की कल्पना, समन्वय और निगरानी की जा सकती है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने बहस के दौरान समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए एक चार सूत्री फ्रेमवर्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसमें काम करने वाली व लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियां, सूचना की मजबूत नीव, निरंतर तकनीकी सुधार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शांति सैनिकों का निरंतर प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस दौरान कहा कि विवाद अधिक गंभीर हुए हैं और युद्ध के उपकरण तेजी से परिष्कृत हो रहे हैं। डिजिटल परिवर्तन का ध्यान प्रभावी कीमत वाली और व्यापक रूप से उपलब्ध प्रौद्योगिकियों पर होना चाहिए। 


वहीं, चीन ने बहस के दौरान कहा कि हम परिषद की ओर से हाल ही में अपनाए गए शांति स्थापना पर अध्यक्ष के बयान का स्वागत करते हैं। शांति स्थापना के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में हमारा ध्यान विभिन्न देशों के अधिकारियों की सुरक्षा पर होना चाहिए। उनकी संप्रभुता का सम्मान करने के लिए निगरानी से पहले संबंधित देशों के साथ पूर्व चर्चा की जानी चाहिए।

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