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EFSAS: दक्षिण एशिया में चीन की विकास परियोजनाओं से पर्यावरण को पहुंचेगा नुकसान, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
Wed, 22 Mar 2023 05:23 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
एएनआई, जिनेवा
एएनआई, जिनेवा
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 22 Mar 2023 05:23 AM IST
सार
चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के तहत गिलगित बाल्टिस्तान में राजमार्गों, इमारतों और बांधों का निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों ने इनके निर्माण पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञ मायरा मैकडोनाल्ड ने कहा, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का निर्माण कर रहा है। यह पाकिस्तान से होकर हिमालय से भी गुजरता है।
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52nd Session of the United Nations Human Rights Council in Geneva
- फोटो : ANI
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विस्तार
दक्षिण एशिया क्षेत्र में चल रही चीन की विकास परियोजनाएं जलवायु और पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं। जिसपर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। गरीबी उन्मूलन, विकास संगठन और दक्षिण एशियाई अध्ययन के लिए यूरोपीय फाउंडेशन (ईएफएसएएस) की तरफ से मंगलवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 52वें सत्र का आयोजन किया गया।
चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के तहत गिलगित बाल्टिस्तान में राजमार्गों, इमारतों और बांधों का निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों ने इनके निर्माण पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञ मायरा मैकडोनाल्ड ने कहा, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का निर्माण कर रहा है। यह पाकिस्तान से होकर हिमालय से भी गुजरता है। यह एक विवादित क्षेत्र भी है। मायरा का मानना है कि गिलगित बाल्टिस्तान को खत्म होने का बड़ा खतरा है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही जलवायु परिवर्तन से पीड़ित है और भूगर्भीय रूप से अस्थिर है।
तालिबान के साथ चीन के रिश्तों पर भी डाला प्रकाश
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय, एसआईपीआरएल और आरयूएसआई के लिए काम करने वाले ईएफएसएएस के एक रिसर्च फेलो टिम फॉक्सले ने कहा, तालिबान सरकार के साथ चीन घनिष्ठ संबंध है। उन्होंने क्षेत्र से तेल और खनिजों का पता लगाने के इरादे पर प्रकाश डालते हुए कहा, चीन ने जनवरी में उत्तरी अफगानिस्तान में पेट्रोल की खोज के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। साथ ही वह लोगार प्रांत में तांबे की खदान के लिए चीन तालिबान के संपर्क में है। अनिवार्यता से बड़ी परियोजनाएं वनों की कटाई, जनसंख्या के विस्थापन, जल और मृदा प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय चिंताओं को बढ़ाती हैं।
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चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के तहत गिलगित बाल्टिस्तान में राजमार्गों, इमारतों और बांधों का निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों ने इनके निर्माण पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञ मायरा मैकडोनाल्ड ने कहा, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का निर्माण कर रहा है। यह पाकिस्तान से होकर हिमालय से भी गुजरता है। यह एक विवादित क्षेत्र भी है। मायरा का मानना है कि गिलगित बाल्टिस्तान को खत्म होने का बड़ा खतरा है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही जलवायु परिवर्तन से पीड़ित है और भूगर्भीय रूप से अस्थिर है।
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तालिबान के साथ चीन के रिश्तों पर भी डाला प्रकाश
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय, एसआईपीआरएल और आरयूएसआई के लिए काम करने वाले ईएफएसएएस के एक रिसर्च फेलो टिम फॉक्सले ने कहा, तालिबान सरकार के साथ चीन घनिष्ठ संबंध है। उन्होंने क्षेत्र से तेल और खनिजों का पता लगाने के इरादे पर प्रकाश डालते हुए कहा, चीन ने जनवरी में उत्तरी अफगानिस्तान में पेट्रोल की खोज के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। साथ ही वह लोगार प्रांत में तांबे की खदान के लिए चीन तालिबान के संपर्क में है। अनिवार्यता से बड़ी परियोजनाएं वनों की कटाई, जनसंख्या के विस्थापन, जल और मृदा प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय चिंताओं को बढ़ाती हैं।
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