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अस्तित्व के लिए जूझते दुनिया के 'बदसूरत' जीव

Mon, 26 Nov 2012 12:49 PM IST
Updated Mon, 26 Nov 2012 12:49 PM IST
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world 'ugly' creatures struggle for survival

दुनिया में जो जीव विलुप्त होने के कगार पर हैं, उनमें पांडा है, पहाडी़ गुरिल्ला है, चीता है। इन सब जानवरों में एक समानता है, ये सभी जीव दिखने में खूबसूरत हैं और हर जगह उनकी तस्वीरें दिखती हैं।

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लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के सबसे दुर्लभ और विलुप्त होने की कगार पर वो जीव हैं जो आम लोगों के लिए आकर्षक नहीं है। वो बेहद अनमोल हैं और यही बात उन्हें बेहद अनूठा बनाती है।
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जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन ऐसे ही दुर्लभ और सुंदर ना दिखने वाले जीवों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना का नाम है, इवोल्यूशनेरली डिस्टिंक्ट एंड ग्लोबली एंडेजर्ड (एज)।
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इस योजना के निदेशक कार्ली वॉटरमेन कहते हैं, “मुझे उन सभी जीवों से प्रेम है जो एज की सूची में शामिल हैं। लेकिन मुझे लगता है कि इन जानवरों में से कुछ को अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत है ताकि उन्हें आम लोगों के दिलों में जगह मिल सके। ”

आइए नज़र डालते हैं उन जीवों पर जो दिखने में कम खूबसूरत हैं, ताकि वो संरक्षण के अगले ब्रांड एबेंसडर बन सकें।

लंबी चोंच वाला एकिडना
एक बेहद लंबी नाक और नखरे वाला ये जीव दुनिया में सबसे लंबे समय से मौजूद स्तनधारी प्रजाति से संबध रखता है। ये प्रजाति लगभग 12 करोड़ साल से अस्तित्व में है।

लंबी चोंच वाले एकिडना पापुआ न्यू गिनी में पाए जाते हैं जहां ये अपनी लंबी चोंच से गीली ज़मीन को कुरेदकर कीड़े खाते हैं।

ये प्रजाति 20,000 साल पहले ऑस्ट्रेलिया से विलुप्त हो गई, जब वहां का वातावरण सूख गया और उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिला।

शोधकर्ता ये जानकर इस की तरफ बहुत आकर्षित हुए कि इस जीव का दिमाग बहुत बड़ा है।

एकिडना के दिमाग का आधा हिस्सा ग्रे मैटर है जिसकी वजह से ये तर्क रख सकते हैं, सीख सकते हैं और याद कर सकते हैं।  एक आम आदमी के दिमाग में लगभग एक तिहाई ग्रे मैटर होता है।

लेकिन एकिडना का यही तेज़ दिमाग और चालाकी, शोधकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती साबित होती हैं और एकिडना को शोध के लिए बेहद मुश्किल विषय बना देती है।

गंगा नदी की डॉल्फिन
एक और लंबी चोंच वाली स्तनधारी है गंगा नदी में पाई जाने वाली ये डॉल्फिन। ये डॉल्फिन ताज़े पानी में पाई जाती है और इसके बड़े दांत स्पष्ट दिखाई भी देते हैं।

नदियों में पाई जाने वाली बाकी डॉल्फिन की तरह ही इन डॉल्फिनों की नज़र कमज़ोर होती है। मटमैले पानी की वजह से इन्हें देखने की ज़रूरत कम महसूस होती है और इसलिए इनकी आंखें कमज़ोर और बहुत छोटी होती हैं।

ये डॉल्फिन भारत, बांग्लादेश और नेपाल के ताज़े पानी की नदियों में पाई जाती है।

सुंडा पंगोलिन
पंगोलीन एकमात्र ऐसा स्तनधारी जंतु है जो पूरी तरह से एक आवरण से ढका होता है। वो एक सींगनुमा कड़े आवरण से ढंके होते है। ये आवरण केरेटिन नामक पदार्थ से बना होता है यानी वही पदार्थ जिससे इंसान के नाखून और गैंडे के सींग बनते हैं।

ऐसी गलत धारणा है कि पंगोलीन के आवरण में चिकित्सा संबंधी गुण होते हैं जिसकी बहुत ज्यादा मांग है। इसी वजह से ये विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

पंगोलीन के कवच का इस्तेमाल चीनी दवाइयों में होता है जिसमें दूध पिलाने वाली मां की दवाइयों से लेकर कैंसर के इलाज तक की दवाएं शामिल हैं।

लेकिन इस बात का कोई सूबूत नहीं है कि इन दवाओं से इंसान की बीमारियों के उपचार में कोई मदद मिलती है।

इस पर शोध करने वाले डेन चेलेंडर कहते हैं कि ये जीव बहुत ही मज़ाकिया हैं। इनके बारे में लोगों को पता नहीं है लेकिन अगर आप इस जीव का वीडियो देखें तो हो सकता है कि आपको इससे प्यार हो जाए।

चाइनीज़ जायंट सैलेमेंडर
चाइनीज़ जायंट सैलेमेंडर, सैलेमेंडर प्रजाति का सबसे बड़ा जीव है जिसकी लंबाई 1। 8 मीटर तक हो सकती है।

इस उभयचर जीव की खाल गहरी भूरी, काली या हरी होती है और इस जीव की खाल पर झुर्रियाँ होती हैं

सामान्य सुंदरता के नजरिए से ये जीव सुंदर नहीं है।

ये जीव ठंडे और साफ पानी में रहता है और ये पिछले 17 करोड़ साल से अपने आप को समय के अनुकूल ढालता आ रहा है।

चीन की सरकार ने इस जीव के संरक्षण की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए 2010 में शंघाई की एक प्रदर्शनी में इन्हें रखा लेकिन दुर्भाग्यवश वो सभी पंद्रह चाइनीज़ जायंट सैलेमेंडर गर्म पानी और शोर-शराबे के माहौल की वजह से मारी गईं।

मयोर्का मिडवाइफ मेंढक
इस मेंढक पर शोध करने वाले ट्रैंट गार्नर कहते हैं, “ये डार्ट मेंढक जैसा चमकीला नहीं है और ना ही कर्मिट मेंढक जैसा हरा लेकिन इसकी अपनी पहचान है। ”

मयोर्का मिडवाइफ मेंढक की पहचान 1970 में हुई जब इस मेंढक के अवशेष मिले और इसके कुछ साल बाद इस मेंढक को जीवित रूप में देखा गया।  इसी के बाद इस मेंढक को बचाने और इसके प्रजनन को बढ़ावा देने की योजना की शुरुआत हुई।


इस योजना को धक्का तब लगा जब इसकी प्रजनन योजना के दौरान पता चला कि मयोर्का द्वीप और प्रजाति दोनों ही चिटरिड़ फफूंदी से पीड़ित हैं।

पूरे विश्व में उभयचरों की संरक्षण परियोजनाएं फिलहाल इसी चिटरिड़ फफूंदी से जूझ रही हैं।

इस मेंढक की खासियत है कि नर मेंढक एक बहुत अच्छे पिता साबित होते हैं।  वो अंडों को अपने साथ रखते हैं और जब तक अंड़ों से बच्चे नहीं निकलते उनकी देखभाल करते हैं।

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