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लंदन हमला: मृत सैनिक की पहचान सामने आई

Thu, 23 May 2013 10:53 PM IST
Updated Thu, 23 May 2013 10:53 PM IST
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woolwich attack agencies knew about attackers

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने लंदन के वुलिच इलाके में हुए हमले में मारे गए सैनिक की पहचान ज़ाहिर कर दी है। इस सैनिक का नाम है ड्रमर ली रिगबी और वो द रॉयल बटालियन ऑफ़ फ्यूसिलियर्स के सेकेंड बटालियन में तैनात थे।

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उनकी उम्र 25 साल थी और उन्होंने अफ़गानिस्तान में भी अपनी सेवा दी थी। मारे गए सैनिक के परिवार ने उनकी पहचान को गुप्त रखने की अपील की थी।

इससे पहले सूत्रों ने बीबीसी से बातचीत में पुष्टि की कि सुरक्षा एजेंसियों को लंदन के वुलिच इलाके में एक सैनिक की हत्या में शामिल दोनो संदिग्ध हमलावरों के बारे में जानकारी थी।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक संदिग्ध हमलावर के बारे में माना जा रहा है कि वो 28 वर्षीय माइकल एडेबोलाजो हैं।

सूत्रों के अनुसार माइकल एडेबोलाजो का संबंध एक धार्मिक ईसाई परिवार से है और उन्होंने वर्ष 2001 में कॉलेज छोड़ने के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था।

इस बीच पुलिस ने ग्रीनविच और लिंकनशायर इलाकों में दो ठिकानों पर छापा मारा है।

बुधवार को वुलिच में दो संदिग्ध हमलावरों ने एक सैनिक की हत्या कर दी थी। घटना के बाद एक व्यक्ति को ये कहते हुए फ़िल्माया गया था कि उन्होंने सैनिक पर हमला इसलिए किया था क्योंकि ब्रितानी सैनिक हर दिन मुसलमानों पर हमला करते हैं।
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हमलावरों के पास चाकू, मांस काटने वाला छुरा और एक बंदूक थी।

'नहीं झुकेंगे'

इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि उनका देश आतंकियों के सामने कभी नहीं झुकेगा।

डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर डेविड कैमरन ने कहा कि इस्लाम में हमलों का कोई स्थान नहीं है और हमले में शामिल लोग ही इस वारदात के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं।

बीबीसी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संदिग्ध हमलावर 28 वर्षीय माइकल एडेबोलाजो की गिनती कॉलेज के प्रतिभावान छात्रों में होती थी।

टीवी पर दिख रही तस्वीरों में एक व्यक्ति के हाथ खून से सने हुए दिख रहे थे।

एक संदिग्ध हमलावर ने वहाँ मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी से कहा कि उन्होंने ये हत्या इराक और अफ़गानिस्तान में मुसलमानों की हत्या का बदला लेने के लिए किया है।

पुलिस के गोली चलाने पर दोनो संदिग्ध हमलावर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एक स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

इस बीच लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने कहा है कि सैनिक की हत्या के लिए इस्लाम धर्म को ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत है।

साथ ही उन्होंने कहा कि इस हत्या को ब्रितानी विदेश नीति से जो़ड़कर देखना गलत होगा।

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने आशंका जताई है कि ये एक आतंकी हमला हो। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की एक बैठक की भी अध्यक्षता की।

इस बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। आतंक विरोधी टीमें भी इस हमले की जाँच कर रही है।

घटनास्थल से एक नीली गाड़ी भी बरामद हुई थी जिसके बारे में माना जाता है कि हमले से पहले इस गाड़ी से मृत सैनिक की कार को टक्कर मारी गई थी। गाड़ी को घटनास्थल से हटा लिया गया है।

ऐसे ही दूसरे हमलों की संभावना को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

नारे
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावर सैनिक की हत्या के बाद संदिग्ध हमलावर अल्लाहु-अकबर के नारे लगा रहे थे।

इन दो व्यक्तियों ने घटनास्थल से भागने की कोई कोशिश नहीं की। वो आसपास खड़े लोगों को अपनी और मृत सैनिक की तस्वीरें लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

ब्रिटेन के आईटीवी न्यूज़ टीवी चैनल पर दिखाई गई फ़ुटेज में एक व्यक्ति को खून से लथपथ मांस काटने वाले छुरे के साथ दिखाया गया है। फ़ुटेज में ये व्यक्ति राजनीतिक वक्तव्य भी दे रहा था।

वो कह रहा था, “आपको लगता है कि राजनीतिज्ञ मरने वाले हैं? नहीं। मौत आप जैसे आम लोगों और आपके बच्चों की होगी। इसलिए राजनीतिज्ञों से छुटकारा पाइए। उनसे कहिए कि वो अपने सैनिकों को वापस बुलाएं ताकि आप शांति से रह सकें।”

एक दूसरे प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों को अपनी कार से निकलने का मौका ही नहीं मिला।

ग्राहम वाइल्डर्स ने बीबीसी को बताया, “पुलिस को इस व्यक्ति पर सिर्फ़ गोली चलानी थी क्योंकि वो उनकी ओर बढ़ा चला जा रहा था। फिर दूसरे व्यक्ति ने अपनी हैंडगन उठाई, इसलिए पुलिस ने उस पर गोली चला दी।”

महिला से बातचीत
घटनास्थल की एक दूसरी तस्वीर में चाकू पकड़े हुआ एक संदिग्ध एक महिला से बातचीत करते हुए दिख रहा था।

ब्रितानी अख़बार ‘द डेली टेलीग्राफ़’ ने इस महिला से बात की। अख़बार के मुताबिक कब स्काउट प्रमुख इन्ग्रिड लोयाउ-केनेट ने संदिग्ध हमलावर से पूछा, “आपके हाथ में जो है, क्या आप मुझे वो देना चाहेंगे?”

इन्ग्रिड ने बताया, “उनके हाथ खून से सने हुए थे। मुझे लगा कि मैं उनसे बात करूँ ताकि वो दूसरों पर भी हमला करना शुरू न कर दे।”

महिला के मुताबिक संदिग्ध हमलावर ने उन्हें बताया कि मृतक एक ब्रितानी सैनिक है।

इन्ग्रिड के अनुसार संदिग्ध हमलावर ने उनसे कहा, “मैंने उसे मार दिया क्योंकि वो मुसलमानों को मारता है। मैं तंग आ गया हूँ कि लोग इराक, अफ़गानिस्तान में मुसलमानों को मार रहे हैं।”

बर्बरतापूर्ण
ब्रिटेन में मुसलमानों की संस्था मुस्लिम काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन ने इस हत्या को “बर्बरतापूर्ण कार्रवाई बताया जिसका इस्लाम में कोई आधार नहीं है और इस घटना की खुलकर निंदा की।

पूर्व गृह मंत्री लॉर्ड रीड ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “लोगों को विभाजित करने वाली रेखा मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच नहीं है। ये आंतकवादियों और बाकी सभी के बीच में है।”


इस बीच लंदन और दूसरी जगहों पर तैनात सशस्त्र सैनिकों से कहा गया है कि वो और सतर्क रहें।

बीबीसी रक्षा संवाददाता कैरोलाइन वायट के अनुसार जबसे इराक़ और अफ़गानिस्तान में ब्रितानी सैनिकों ने हस्तक्षेप किया है, उनके परिवारवाले ये जानते हैं कि ब्रिटेन में उन पर हमले हो सकते हैं।

पिछले कुछ सालों में इस्लामी चरमपंथियों ने ब्रिटेन में सैनिकों की हत्या की दो कोशिशें की हैं जिन्हें नाकाम बनाया जा चुका है।

अन्य गतिविधियां
--पुलिस का कहना है कि उसके अफ़सर फ़ोन करने के मात्र नौ मिनट के भीतर और सशस्त्र सैनिक 14 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए थे।

--बुधवार शाम को गिलिंघम और एसेक्स इलाकों में मस्जिदों पर दो अलग-अलग हमले हुए। दो व्यक्तियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

--इंग्लिश डिफ़ेंस लीग के करीब ढाई सौ समर्थक वुलिच में इकट्ठा हुए और उनकी पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई।

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