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यूक्रेन में कपड़े उतारकर अधिकारों की लड़ाई

Thu, 25 Oct 2012 12:06 AM IST
सैम विल्सन/बीबीसी न्यूज/कीएफ़
सैम विल्सन/बीबीसी न्यूज/कीएफ़ Updated Thu, 25 Oct 2012 12:06 AM IST
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women stripped off for rights struggle in Ukraine

यूक्रेन में 'फीमेन' मुख्यालय के दरवाजे पर विशाल स्तनों की जोड़ी बनी है और ये नीले और पीले यूक्रेनी रंगों में रंगी हैं। राजधानी 'कीएफ़' के मुख्य चौराहे के पास स्थित भवन के तहखाने के भीतर फ्लैट में महिलाओं का एक समूह है जिनमें किसी की भी उम्र 25 साल से ज्यादा नही है। इन महिलावादी कार्यकर्ताओं को पुलिस उत्पीड़न की शिकायत है और इन्होंनें बहुत से दुश्मन भी बना लिए हैं।

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'फीमेन' समूह की ऐलेक्ज़ेंड्रा शेवचेन्को इस समूह की विचारधारा बताती है। वो कहती हैं, "हम पितृसत्तात्मक पुरुष प्रधान समाज के खिलाफ लड़ रहे हैं, हमारे एजेंडे में तीन चीज़े हैं, महिलाओं का यौन शोषण, तानाशाही और धर्म।"
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महिलावादी आंदोलन
'फीमेन' समूह की कार्यकर्ता अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करती हैं। ऐलेक्ज़ेंड्रा शेवचेन्को ने 2008 में इस महिलावादी आंदोलन की शुरुआत करने में मदद की थी। ये आंदोलन सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन में महिलाओं की दशा को लेकर था। यूक्रेन में महिलाओं को विदेशों में तस्करी कर भेज दिया जाता था और देहव्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था या फिर इंटरनेट के जरिए उनकी शादी करवा दी जाती थी।
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पश्चिमी यूक्रेन के एक विश्वविद्यालय में महिलावादी समूहों की चर्चा जल्द ही कीएफ़ में विरोध प्रदर्शन के रुप में सामने आ गई। ऐसा भी नही है कि 'फीमेन' ने पहली बार में ही अर्ध नग्न होकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कपड़े उतार कर संदेश को व्यापक स्तर पर अधिक से अधिक लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

ऐलेक्ज़ेंड्रा शेवचेन्को का कहना है, "सदियों से पुरुष महिलाओं के शरीर और कामुकता का इस्तेमाल करते करते आ रहे है।" वो कहती हैं, "हमारा मानना है कि हमें अपने शरीर और कामुकता पर खुद ही नियंत्रण रखना है। ये तय करना हमारा काम है कि हम अपने शरीर का इस्तेमाल कैसे करें, हम अपने स्तनों को दिखाएं या छिपाएं।"


पश्चिम में स्वागत

लेकिन तमाम यूक्रेन वासी इन नारी वादियों की हरकतों से खुश नहीं हैं। लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते हैं, उन्हें अपना ही ढिंढोरा पीटने वाले के रूप में देखते हैं, यहाँ तक कि कुछ लोग शक करते हैं कि ये सरकार के लिए एक फंदा तैयार करने की कोशिश हैं ताकि सरकार पर दबाव पड़े और वो अपना समय वापस हमला करने में बर्बाद करे।

नारीवादी आंदोलन को पश्चिमी देशों में अधिक जगह मिली है। 'फीमेन' को इस बात की खुशी है कि नारों से लिखी उनके अर्धनग्न शरीर की तस्वीरें छपती हैं। ऐलेक्ज़ेंड्रा शेवचेन्को का कहना हैं, "पश्चिमी देशों से उन्हें काफी सहानुभूति मिली है, साथ ही कई समूहों ने उन्हें आमंत्रित किया है और वित्तीय मदद भी की है।"


वो कहती हैं कि इस नारीवादी समूह के यूक्रेन में 40 कार्यकर्ता हैं और विदेश में 100 कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। कुछ पश्चिमी देशों की नारीवादी कार्यकर्ताओं ने इसका स्वागत किया है क्योंकि इसकी वजह से वो मुद्दे जो दशकों पुराने हैं कभी खबर नही बन पाए, वो सबकी नजरों में आ गए है।

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