फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   why are increasing women death

क्यों बढ़ रही हैं महिलाओं की मौत

Sat, 20 Jul 2013 08:26 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 20 Jul 2013 08:26 PM IST
विज्ञापन
why are increasing women death
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि ऐसी महिलाओं की तादाद बढ़ती जा रही है जो शराब में डूब कर अपनी जिंदगी गंवा रही हैं।
विज्ञापन


शराब पीकर बहक जाने या बीमार पड़ जाने का अरोप अक्सर पुरुषों पर लगता है लेकिन महिलाऐं भी इन मामलों में पीछे नहीं हैं। ब्रिटेन के तीन शहरों, ग्लॉसगो, लिवरपूल और मेनचेस्टर में हुए शोध में यह बात सामने आई है।

इस शोध में वर्ष 1980 से 2011 के बीच सभी उम्र की महिलाओं और पुरुषों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में ये बात सामने आई कि शराब पीने से होने वाली बीमारियों के चलते मरने वालों की कुल संख्या में कमी आई है। लेकिन इसके उलट महिलाओं में इन बीमारियों के कारण मृत्यु दर बढ़ गई है।
विज्ञापन


विशेषज्ञों ने कहा है कि अध्ययन के नतीजे 1970 के दशक में जन्मी उन महिलाओं के लिए चेतावनी हैं, जिन्हें शराब पीने की आदत है।

शराब के लिए नीति

उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादा शराब पीने की समस्या से निपटने के लिए इंग्लैंड और वेल्स की सरकार ने "शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति" बनाई है। इस सप्ताह ही इस नीति को लागू किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


"एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ" नाम की पत्रिका में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसमें तीन शहरों में शराब से संबंधित नैतिकताओं के स्वरूपों का अध्ययन किया गया। इन तीनों ही शहरों में अभाव, ख़राब स्वास्थ्य और औद्योगिकीकरण का स्तर समान है।

इस अध्ययन में 1910-1979 और 1980 -2011 के बीच जन्मे लोगों की शराब पीने से हुई मौतों की तुलना की गई है।

मोटे तौर पर यह बात सामने आई कि शराब पीने से औरतों की तुलना में आदमी ज़्यादा मरते हैं। सबसे ज़्यादा प्रभावित वह होते हैं जो अपनी उम्र के चालीसवें या पचासवें पड़ाव पर होते हैं।

नजरंदाज करना मुश्किल
विशेषज्ञों ने दोनों समय कालों की जनसँख्या से लिए गए नमूनों में 34 साल की महिलाओं की मृत्यु दर की तुलना का दमदार उदाहरण दिया है।

इस उम्र की 1950 के दशक में जन्मी महिलाओं में शराब पीने से प्रति एक लाख में से आठ महिलाओं की मृत्यु होती थी। 1960 के दशक में जन्मी महिलाओं में यह आंकड़ा बढ़ कर 14 हो गया।

1970 के दशक में जन्मी महिलाओं के लिए स्थिति और भी ख़तरनाक हो गई। इस वर्ग की प्रति एक लाख में से 20 महिलाओं की मृत्यु शराब पीने से हुई। हर दशक में तेज़ी से बढ़ता हुआ यह रुझान चेतावनी देता है।

पुरुषों के लिए 1910-1979 और 1980 -2011 के बीच की तुलना के नतीजे थोड़ा राहत देते हैं। शराब के सेवन से मरने वाले पुरुषों की सँख्या में कमी आई है।

1950 के दशक के पुरुषों में हर एक लाख में से 22 शराब पीने की वजह से मर जाते थे।

1960 के दशक के प्रति एक लाख में से 38 पुरुष इस वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठते थे। लेकिन 1970 के दशक में यह आँकड़ा घट गया। 1970 के दशक में जन्में पुरुषों में प्रति एक लाख में से केवल 30 शराब की बलि चढ़े।

अध्ययन करने वाले दल की प्रमुख डॉक्टर डेबोरा शिपटन ने "एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ पत्रिका में लिखा है कि महिलाओं की बढ़ती मृत्यु दर को नज़रंदाज़ करना मुश्किल है।


वह कहती हैं, "क्योंकि तीनों ही शहरों की युवा महिलाओं में यह रुझान देखने को मिला है इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि यह केवल एक शहर की बात है।"

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि " इस नए प्रचलन से आने वाले दशकों में यह मृत्यु दर बढ़ सकती है।"

अध्ययन करने वाले दल ने बताया कि आसानी से उपलब्ध सस्ती शराब और पीने के ज़्यादा घंटों की वजह से यह समस्या बढ़ी है।

सांस्कृतिक प्रभाव
डॉक्टर डेबोरा शिपटन ने बीबीसी को बताया कि "शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति" को इंग्लैंड और वेल्स में ख़ारिज किया जाना "शर्मनाक" है।

उन्होंने कहा कि इस नीति से समस्या का समाधान होता। हालांकि इससे शराब से संबंधित गहरे सांस्कृतिक प्रभाव पर फ़र्क़ नहीं पड़ता।

सरकार ने कहा कि इस बात के कोई पुख्ता सुबूत नहीं थे कि शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति बनाने से पीने के हानिकारक प्रभाव की समस्या कम हो जाएगी और इससे वो लोग प्रभावित नहीं होंगे जो कि ज़िम्मेदारी से पीते हैं।

स्कॉटलैंड की सरकार अभी भी शराब की क़ीमत 50 पेनी प्रति यूनिट रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्कॉच विह्स्की एसोसिएशन ने भी कुछ क़ानूनी प्रक्रियाऐं शुरू कर दी हैं। इनसे निपटे बिना शराब के लिए न्यूनतम मूल्य की नीति को लागू नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed