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जहां शून्य से कम तापमान में सोते हैं बच्चे

Sat, 02 Mar 2013 08:50 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sat, 02 Mar 2013 08:50 PM IST
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where kids sleep in cold temperature

हड्डियों को जमा देने वाली ठंड में आप अपने बच्चे को घर से बाहर लाएंगे? शायद नहीं। लेकिन उत्तरी यूरोप के देशों में शून्य से भी कम तापमान में नए जन्मे बच्चों को बाहर खुले में सुलाना आम है।

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सर्दियों में स्टॉकहोम में दिन का तापमान सामान्यतः -5 से 23 डिग्री तक होता है। लेकिन यहां आपको बाहर खुले में आराम से सोते हुए बच्चे आसानी से दिख सकते हैं।
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स्टॉकहोम में तीन बच्चों की मां लीसा मारडोन कहती हैं, “मुझे लगता है कि जितनी जल्दी हो सके बच्चों को ताज़ी हवा मिलनी चाहिए।" "ख़ासतौर पर सर्दियों में जब बीमारियां बहुत होती हैं।”
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क्या ये नया चलन है?
एक खाद्य पदार्थ वितरण कंपनी में काम करने वाली लीसा के बच्चे शुरू से ही बाहर सोते हैं। सबसे छोटा अल्फ़्रेड दो साल का है। वो रोज़ एक बार उसे सोने के लिए डेढ़ घंटे बाहर रखती हैं। जब वो छोटा था तब दो बार बाहर सोया करता था।

ये चलन पुराना है। लीसा को भी बचपन में बाहर सुलाया गया था। उनकी मां गुनिला कहती हैं, “हम पहले भी ऐसा ही करते थे। स्वस्थ रहने के लिए ताज़ी हवा ज़रूरी है”।

1950 में लीसा के पिता पीटर को भी उनकी मां बाहर सुलाती थीं। उन्हें अंदर तभी लाया जाता था जब तापमान-10 से 14 डिग्री तक गिर जाता था।

स्वीडन में आजकल ज़्यादातर डे-केयर सेंटर सोने के लिए बच्चों को बाहर ही लाते हैं। दिन में आपको लाइन से लगे प्रेम में बच्चे गहरी नींद में दिख जाएंगे।

स्टॉकहोम के बाहर एक प्री-स्कूल फ़ोर्स्कोलैन ओरैन में सभी बच्चे तीन साल की उम्र तक बाहर ही सोते हैं। इसकी मुख्याध्यापक कहती हैं, “जब भी तापमान 15 से पांच डिग्री तक गिरता है हम सभी बच्चे को कंबल से ढक देते हैं।”

इसका फ़ायदा क्या है?
गरमी हो या जमा देने वाली ठंड बच्चों को बाहर सुलाने के पीछे एक सिद्धांत है। वो ये है कि जो बच्चे ताज़ी हवा में रहते हैं उन्हें सर्दी-ज़ुकाम होने की आशंका कम होती है।

और एक कमरे में 30 बच्चों के साथ दिन बिताने का कोई फ़ायदा नहीं होता। कई अभिभावकों का ये भी मानना है कि बच्चे अंदर के बजाय बाहर गहरी नींद में सोते हैं।

फ़िनलैंड में तो एक शोधकर्ता मारियो टौरुला कहती हैं कि वो इसके समर्थन में अभिभावकों का एक सर्वेक्षण पेश कर सकती हैं।

वो कहती हैं कि अंदर बच्चे एक से डेढ़ घंटे तक ही सो पाए तो बाहर वो डेढ़ से तीन घंटे तक सोए रहे। मारिया के अनुसार दो हफ़्ते के बच्चे को बाहर ले जाना शुरू किया जा सकता है।

वो कहती हैं कि -5 तापमान बाहर सोने के लिए आदर्श है। हालांकि कुछ अभिभावक तो अपने बच्चों को -30 तक बाहर रखते हैं।

बीमारी का ख़तरा?
लेकिन क्या बाहर सोने वाले बच्चे खांसी, ज़ुकाम, बुख़ार के ज़्यादा शिकार होते हैं? बच्चों की डॉक्टर मार्ग्रेटा ब्लेनॉव स्वीडन की पर्यावरण सरंक्षण एजेंसी की रिपोर्ट भ्रमित करने वाली हैं।

वो कहती हैं, “कुछ अध्ययनों के अनुसार प्री स्कूल में सोने के अलावा भी बाहर वक़्त गुज़ारने वाले बच्चे उन बच्चों के मुक़ाबले कम छुट्टी लेते थे जो अपना ज़्यादा समय अंदर बिताते थे”। “लेकिन कुछ अध्ययनों के अनुसार इस तरह का कोई फ़र्क़ नहीं था।”

उर ओक स्कर नाम के प्री-स्कूलों के ग्रुप के अध्यक्ष मार्टिन जार्नस्टॉर्म भी बच्चों को बाहर सुलाने के प्रबल पक्षधर हैं। हालांकि वो ज़ोर देकर कहते हैं, “मौसम चाहे ठंडा हो, बच्चा गरम रहना चाहिए”।


स्वीडन की एक कहावत है, ”कोई मौसम ख़राब नहीं होता, बस कपड़े ख़राब होते हैं।”

दूसरे देशों में शून्य से नीचे तापमान में बच्चों को अंदर रखे जाने पर स्वीडन के लोग क्या सोचते होंगे, “थोडी़ सी ताज़ी हवा से किसी का नुक़्सान नहीं होता।”

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