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क्या कर्मचारियों को मिलना चाहिए शोक अवकाश?

Sat, 30 Mar 2013 12:14 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sat, 30 Mar 2013 12:14 PM IST
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what employees should get bereavement leave

किसी सगे संबंधी की मौत से आदमी बुरी तरह टूट जाता है और इस स्थिति से उबरने के लिए उसे लंबा समय लग जाता है।

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लेकिन दुःख की इस घड़ी में उसे नौकरी और कामकाज से कोई राहत नहीं मिलती है और उसे कुछ दिनों के बाद ही काम पर लौटना पड़ता है।

अब सवाल उठता है कि क्या कर्मचारियों को दुःख की इस घड़ी में लंबी छुट्टी मिलनी चाहिए।

जॉन के पिता का जब 18 महीने पहले निधन हुआ था तो वो सदमे में थे। लेकिन कुछ दिन की छुट्टी के बाद उन्हें लगा कि उनके बॉस उन पर काम पर लौटने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

बाध्यता
शोक संतप्त कर्मचारियों को लंबी छुट्टी देने का फिलहाल कोई कानूनी प्रावधान या बाध्यता नहीं है। कर्मचारी किसी सगे संबंधी के निधन पर कुछ छुट्टियाँ ले लेते हैं।
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एक वेबसाइट के मुताबिक इस काम के लिए एक या दो दिन का समय पर्याप्त है। अक्सर ये समय मृतक के अंतिम संस्कार का इंतजाम करने और उसमें हिस्सा लेने में ही निकल जाता है।
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शोक संतप्त की छुट्टी की अवधि और इस दौरान उसके वेतन की स्थिति नौकरी की शर्तों और नियोक्ता के विवेक पर निर्भर करती है।

अक्सर ये छुट्टी तीन से पांच दिन की होती है। इसके बाद कर्मचारी को अपनी नियमित छुट्टियां काटनी पड़ती हैं या अस्वस्थता अवकाश से काम चलाना पड़ता है।

माता-पिता बनने पर कर्मचारियों को छह महीने से एक साल तक की छुट्टी मिलती है। ऐसे में कुछ लोगों का तर्क है कि अपनों बच्चों को खोने वाले कर्मचारियों को लंबी छुट्टी नहीं देना अनुचित है।

अभियान
लूसी हर्ड ने अगस्त 2010 में अपने लगभग दो साल के बेटे जैक को खो दिया था। हालांकि तब वो काम नहीं कर रही थीं लेकिन उनके पार्टनर को केवल पांच दिन की छुट्टी मिली थी।

लूसी ने कहा, “मुझे ये जानकर आश्चर्य हुआ। अगर आपको अपने बच्चे के पैदा होने के समय छुट्टी मिलती है तो आप उसे दफनाने के समय भी छुट्टी पाने के अधिकारी हैं। उस समय आपको ये चिंता नहीं होनी चाहिए कि आपको जल्दी काम पर जाना है। ये बेतुकी बात है कि इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है।”

जैक की मौत के बाद लूसी मौजूदा क़ानून में बदलाव के लिए अभियान चला रही हैं। उनका कहना है कि समुचित क़ानून के अभाव में कर्मचारी पूरी तरह अपने बॉस की दया पर निर्भर रहते हैं।


मातृत्व अवकाश को लेकर तो सभी एकमत हैं लेकिन शोक अवकाश को लेकर एका नहीं है। उद्योग जगत तो ऐसे किसी क़ानून को लेकर ज़्यादा उत्साहित नहीं है।

नॉर्थ स्टेफोर्डशायर चैंबर ऑफ कॉमर्स की उप मुख्य कार्यकारी जेन ग्रेटन ने कहा़, “मुझे नहीं लगता है कि मौजूदा प्रावधानों में एक और बोझ डाला जाना चाहिए। लंबे समय कर्मचारी के अनुपस्थित रहने से कामकाज प्रभावित होता है।”

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