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जातिगत भेदभाव होगा गैर कानूनी
Updated Wed, 24 Apr 2013 06:26 PM IST
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भारत की तरह ब्रिटेन में भी अब जाति के आधार पर भेदभाव को गैर कानूनी बनाया जा रहा है। इसके लिए वहां के कानून में भी बदलाव किया जाएगा।
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ब्रिटेन के व्यापार मंत्री, विंस केबल ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा है कि पुरानी नीतियों को बदला किया जाएगा।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स दो बार पहले ही ब्रिटेन में रह रहे दलितों की कानूनी सुरक्षा के लिए प्रस्ताव पास कर चुका है।
पहली बार ब्रिटेन के सांसदों (हाउस ऑफ कॉमन) ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था लेकिन अब दोबारा इस पर विचार किया जा रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में करीब चार लाख दलित रहते हैं। केबल ने कहा कि भविष्य में जाति को ‘नस्ल का ही एक पहलू’ समझा जाएगा।
ब्रिटेन की नेशनल सेक्यूलर सोसाइटी के कीथ पोर्टुअस ने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि सरकार ने छुआछूत के खिलाफ भी उन्हीं नियमों को स्वीकार कर लिया है जो दूसरे मामलो में किए जाते हैंद।
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यह हाउस ऑफ लॉर्ड्स और मानवाधिकार को संरक्षित करने के उनके प्रयासों की जीत है।
भारत की तरह की गैर कानूनी
जातिवाद के खिलाफ काम कर रहे लोगों का कहना है कि इसके लिए एक कानून बनाने की जरूरत थी। हजारों लोगों को इस वजह से दुर्व्यवहार और पक्षपात झेलना पड़ता है, क्योंकि उनकी जाति को निचला समझा जाता है।
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ऐसे लोगों का मानना है कि ब्रिटेन के वर्तमान कानून जातिगत भेदभाव से लोगों को कोई सुरक्षा नहीं देते हैं। इतना ही नहीं जाति समाज को गैर बराबरी के आधार पर विभाजित करती है।
ब्रिटेन में जातिवाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि इसे भारत की तरह गैर कानूनी करार देना चाहिए। इसी महीने हाउस ऑफ कामंस में एक बहस के दौरान ब्रिटेन की सरकार ने माना था कि ब्रिटेन में जातिवाद है।
समता मंत्री जो स्विन्सन ने कहा था, “जाति का मसला हिंदुओं और सिखों में था। इसी वजह से इसे दूर करने के लिए हम इन दोनों समुदाय के लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि कानून बनाने से हो सकता है कि ये भेदभाव और बढ़ जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यही सोचकर सरकार ने जातिवाद को शिक्षा कार्यक्रम के जरिए दूर करने की बात की थी। बहस के दौरान कई सांसदों ने प्रदर्शनकारियों का साथ दिया।
कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रिचर्ड फ्यूलर ने कहा, “सीधी सी बात है। ऑफिस में जातिवाद गलत है और जो लोग इसकी वजह से परेशान होते हैं उन्हें कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।”
व्यापार के मामलों में नजर रखने वाले विपक्षी पार्टी के नेता चुका उमुना ने कहा कि जातिवाद “पूरी तरह अस्वीकार्य” है।
ब्रिटेन की सरकार ने समानता और मानवाधिकार आयोग को कहा है कि वो ब्रिटेन में चल रहे जातिवाद के स्वरूप की जांच पड़ताल करे, और ये भी बताए कि किस तरह इसे दूर किया जा सकता है।