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चरमपंथियों को निकम्मा कहने पर मुक़दमा!

Sat, 27 Oct 2012 03:47 PM IST
Updated Sat, 27 Oct 2012 03:47 PM IST
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turkish pianist fazil on trial for insulting islam
तुर्की के विश्व विख्यात पियानिस्ट फाजिल से के खिलाफ नफरत फैलाने और
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मुस्लिम मूल्यों का अपमान करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें इंस्ताबुल की अदालत में पेश होना पड़ा है।

से के खिलाफ कुछ ट्वीट संदेशों को लेकर ये मुकदमा चल रहा है जिसमें कट्टरपंथी मुसलमानों का मज़ाक उडा़या गया है।

इनमें उनका अप्रैल का एक ट्वीट भी शामिल है जिसमें से ने लिखा था, “मुझे नहीं पता कि आपने महसूस किया है या नहीं लेकिन अगर कोई निकम्मा है, तुच्छ है, चोर है या मूर्ख है तो वो हमेशा इस्लामी चरमपंथी होता है।”

वहीं से अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हैं। लेकिन अदालत ने उन्हें बरी किए जाने की अपील को खारिज करते हुए मामले की अगली सुनावाई 18 फरवरी तक टाल दी है।
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फिलहाल जेल नहीं अभियोजकों ने जून में से के खिलाफ ये आरोप लगाए थे। अगर उन्हें दोषी करार दिया जाता है तो 18 महीने तक जेल की सज़ा हो सकती है। वैसे संवाददाताओं का कहना है कि उन्हें निलंबित सजा मिलने की ही संभावना ज्यादा है।
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निलंबित सज़ा का मतलब होता है कि इस जुर्म के लिए उन्हें दोषी तो पाया गया लेकिन फिलहाल उन्हें जेल में नहीं रहना होगा। सज़ा की अवधि में अगर वो कोई क़ानून नहीं तोड़ते हैं और सभी नियमों का पालन करते हैं तो उनकी सज़ा माफ हो जाती है। इस मामले ने तुर्की में एक बार फिर बढ़ते धार्मिक प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को हवा दी है।

सांसकृतिक राजदूत रह चुके हैं से जब अदालत में सुनवाई हो रही थी तो बाहर से के दर्जनों समर्थक बैनरों के साथ खड़े थे। एक बैनर पर तुर्की की इस्लामी रुझान वाली एक पार्टी के लिए लिखा था, “कलाकारों को अकेला छोड़ दो।” से ने न्यूयॉर्क फिलाहार्मोनिक, बर्लिन सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा और कई अन्य ग्रुपों के साथ प्रस्तुतियां दी है। वो यूरोपीय संघ के सांस्कृतिक राजदूत भी रहे हैं।


तुर्की के यूरोपीय संघ मामलों के मंत्री इगेमेन बागिस का कहना है कि से के खिलाफ मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक अदालत को उनके ट्वीट संदेशों को उनके “बड़बड़ाने के आधिकार” के दायरे में मानना चाहिए। हालांकि बागिस ने “लोगों की श्रद्धा और मूल्यों” का अपमान करने के लिए से की आलोचना भी की।
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