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आज के समय में किस देश में जन्म लेना सबसे बेहतर?

Thu, 17 Dec 2015 04:13 PM IST
Updated Thu, 17 Dec 2015 04:13 PM IST
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Today, Where to be born is better for child?
आपने अपने आसपास कई लोगों को ये कहते सुना होगा- 'काश, भारत में जन्म न लेकर, किसी विकसित देश में पैदा हुए होता!' मान लीजिए आपको दुनिया के किसी भी देश में फिर से जन्म लेने का मौका मिल रहा हो, तो आप किस देश में जन्म लेना चाहेंगे? मौजूदा समय में दुनिया का कौन सा देश और कौन सी कंपनी ऐसी है, जहां हर किसी के लिए बेहतरीन अवसर मौजूद हैं। इस सप्ताह लिंक्डइन इनफ्लूयेंशर्स पर इसी मुद्दे पर चर्चा देखने को मिली है। इसमें दो अहम राय बीबीसी कैपिटल ने पेश की हैं।
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इयान ब्रेमर, प्रेसीडेंट, यूरेशिया समूह

ब्रेमर ने अपनी पोस्ट 'आज आप कहां जन्म लेना चाहेंगे' में लिखा है- “पिछले सप्ताह टोक्यो में मुझसे पूछा गया कि आप जो जानते हैं और आप जिस पर यकीन करते हैं, उसे देखते हुए अगर आपको आज जन्म लेना पड़े तो आप किस देश को चुनेंगे?” ब्रेमर ने लिखा है, “अमेरिका को नहीं चुनना मुश्किल है, केवल इसलिए नहीं कि वहां मेरा घर है।”  ब्रेमर का बचपन सुविधाभोगी परिवार में नहीं बीता है। वे बोस्टन के दक्षिणी हिस्से में पले बढ़े और उनके पिता की तब मौत हो गई थी, जब वे महज चार साल के थे। उनके परिवार के पास कोई खास पैसे नहीं थे।
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ब्रेमर ने आगे लिखा है, “लेकिन मेरी मां ने ये सुनिश्चित किया कि मुझे अच्छी शिक्षा मिले। उसी आधार पर मैंने अपना भविष्य बनाया।” ब्रेमर के मुताबिक, “कोई कितना भी देशभक्त हो, वो मानता है कि अमेरिका की अपनी मुश्किलें बनी हुई हैं और अब भी सबको एकसमान अवसर नहीं मिल रहे हैं। लेकिन अगर आप महिला हैं, अगर आप अल्पसंख्यक समुदाय में जन्मे हैं, अगर आप समलैंगिक के तौर पर पैदा हुए हैं, तो आप को अमेरिका में कम मुश्किलों का सामना करना होगा।”
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किसने क्या कहा?

Today, Where to be born is better for child?

ब्रेमर का दूसरा विकल्प काफी चौंकाने वाला है। यह विकल्प है ईरान। वे लिखते हैं, “हो सकता है आप उस देश का हिस्सा बनना चाहेंगे जो अपना भविष्य खुद ही बना रहा हो। हाल ही में ईरान पर लगी पाबंदियों के हटने से ईरान के युवाओं में काफी उम्मीद दिख रही है। उनके जीवन में पहली बार उनकी रचनात्मकता और महत्वाकांक्षा के असल रूप में मायने हैं।” ब्रेमर कहते हैं, “ईरान विविधताओं भरा देश है और उसकी अर्थव्यवस्था भी विविध है। इसमें आगे बढ़ने की काफी संभावना है। इस देश का हिस्सा बनना आकर्षक हो सकता है।”

वैसे ब्रेमर एक अंतिम विकल्प भी चुनते हैं- हिमालय की गोद में बसा भूटान। ब्रेमर के मुताबिक यह देश बुद्धिमता और खुशहाली से भरा हुआ है। वे कहते हैं, “कुछ साल पहले जब मैंने भूटान की यात्रा की थी, तो मैंने देखा कि वहां के लोगों के पास सोचने, समझने और दूसरों से बात करने के लिए समय और स्पेस दोनों हैं।”

जोश बेरसिन, संस्थापक प्रमुख, बेरसिन-डिलॉएट

अगर आप कामकाजी जगह या फिर कहें बेहतरीन कंपनी की तलाश में हैं तो आने वाला साल इस लिहाज से बेहतर है। 2016 में कारोबारी दुनिया में विविधता बढ़ेगी। जोश बेरसिन ने इसी संबंध में ‘2016 में विविधता और समावेश क्यों प्राथमिकता सूची में टॉप पर होंगे’ शीर्षक से पोस्ट लिखी है। उन्होंने लिखा है, “आज की कामकाजी दुनिया में कामयाबी हासिल करने के लिए आप में सभी उम्र, संस्कृति, पृष्ठभूमि और हर तरह के लोगों को आकर्षित करने की क्षमता होनी चाहिए।”

कहां काम करना करते हैं पसंद?

Today, Where to be born is better for child?

बेरसिन ने ये भी लिखा है, “कई शोधों से जाहिर हुआ है कि ज्यादा विविधता वाली कंपनियां दूसरी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं।”  जो व्यावसायिक फर्म अपने यहां समावेशी विविधता का ख़्याल रखती हैं, उनके बारे में बेरसिन ने लिखा है, “ऐसी कंपनियों में प्रति कर्मचारी पैसों की आमद 2।3 गुना ज्यादा होती है और अपने बाजार में इस कंपनी के लीडर बनने की संभावना 1।7 गुना ज्यादा होती है।”

निश्चित तौर पर, कुछ रणनीतियों का असर अन्य से ज्यादा होता है। बेरसिन लिखते हैं, “किसी भी कंपनी के कारोबार पर सबसे ज्यादा असर जिन दो महत्वपूर्ण बातों का होता है वह समावेशी क्षमता और विविधता ही हैं। समावेशी लक्ष्य होना चाहिए और विविधता कामयाबी को मापने का पैमाना।” बेरसिन ने लिखा है, “हालांकि इसके लिए जरूरी है कि नियुक्तियों में, कामकाज के प्रबंधन में, जिम्मेदारी सौंपने में, नेतृत्व विकसित करने की सभी प्रक्रियाओं में इसे शामिल किया जाए और सबको इसके प्रति जिम्मेदार बनाने की जरूरत है।”

बेरसिन आगे लिखते हैं, “लोग तब बेहतर काम करते हैं जब उन्हें लगता है कि उन्हें महत्व दिया जा रहा है, उनकी क्षमता का सहयोगी सम्मान कर रहे हैं। यही वजह है कि आज के ग्लोबल कारोबारी वातावरण में समावेशी संस्कृति वाली कंपनी दूसरों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।”

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