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लकड़ी की चाबियों से 10 दरवाज़े खोल निकल भागे

Tue, 23 Apr 2013 08:14 PM IST
Updated Tue, 23 Apr 2013 08:14 PM IST
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tim jenkin prison

दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी आन्दोलनकारी टिम जेनकिन की कहानी बुलंद हौसलों की कहानी है। टिम ने प्रिटोरिया की जेल से भागने के लिए लकड़ी की चाबियाँ बनाईं और यह उनकी जिद ही थी, जिसके दम पर वह दस दरवाजों को खोलने में कामयाब रहे और आज़ादी की सांस ले सके।

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बीबीसी के कार्यक्रम आउटलुक में टिम ने बताया कि वह अपने साथी स्टीफन ली के साथ प्रिटोरिया की जेल से भागने में कामयाब रहे, जहाँ उन्हें 1970 के दशक के दौरान राजनीतिक बंदी के रूप में रखा गया था।
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दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी युग में समानता का संदेश देने के लिए स्टीफन ली और टिम जेनकिन ने एक विशेष यंत्र की मदद से जनता के बीच सरकार विरोधी पर्चे बाँटे।
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नतीजतन, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सज़ा सुनाई गई। ली को 8 साल और टिम को 12 साल की सजा हुई। ऐसे में उन्होंने प्रिटोरिया जेल की सुरक्षा में सेंध लगाकर बाहर निकलने की साहसिक योजना बनाई।

ब्रेकआउट

दोनों आन्दोलनकारियों की कहानी को नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने “ब्रेकआउट” नाम से रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया है।

टिम ने केपटाउन से बताया “मैं प्रिटोरिया में था, जहाँ श्वेत बंदियों के लिए विशेष राजनीतिक जेलें थी। यह एक अत्यधिक सुरक्षा वाली जेल थी, जहाँ सिर्फ राजनीतिक सिर्फ राजनीतिक बंदी थे।”

टिम बताते हैं, “जब हम सुनवाई का इंतजार कर रहे थे और जमानत नहीं मिली थी, हमने उसी समय से भागने के उपाय शुरू कर दिये थे।” टिम ने जेल से भागने के लिए कुछ किताबों की मदद भी ली।

उन्होंने कहा, “हमें जेल से बाहर निकलने में 18 महीने लग गए। शुरुआत में हमारे पास कोई योजना नहीं थी, और बाद में जो योजना बनी, उसमें भी समय के साथ बदलाव होते गए।”

टिम बताते हैं कि अंतिम योजना के तहत उन्हें कुल दस दरवाजे खोलने थे।

मुश्किल

आमतौर पर लोग जेल से भागने के लिए दीवार फांदने जैसे उपाय अपनाते हैं, लेकिन उन्हें ताले खोलकर बाहर निकलने का विचार कैसे सूझा? इस पर टिम बताते हैं, “हम ऐसा नहीं कर सकते थे, क्योंकि यह जेल एक दूसरी जेल के परिसर में थी। अगर हम दीवार फांदते तो दूसरी जेल में होते।”

ऐसे में उन्होंने दस दरवाजों को खोलने और उसके लिए चाबियाँ तैयार करने का फैसला किया।

वो कहते हैं, “दिन में हमें जेल के कारखाने में काम करना पड़ता था, जहाँ लकड़ी का काम होता था। इसलिए लकड़ी ही एकमात्र जरिया था। इसलिए मैंने सोचा कि हम लकड़ी से चाबी तैयार कर सकते हैं।”

टिम ने बताया कि चूँकि ताले काफी बड़े थे, इसलिए उनकी चाबियाँ भी काफी बड़ी थीं। ऐसे में लकड़ी की चाबियों की मजबूती पर्याप्त थी।

लेकिन सही चाबी बनाना भी एक चुनौती थी। इस बारे में वह बताते हैं, “मुझे तालों के बारे में थोड़ी जानकारी थी।” टिम तालों को देखकर ही चाबी की गहराई और उसके घुमाव के बारे में पता कर सकते थे।

वो कहते हैं, “अगर आप जानते हैं कि चीजें कैसे काम करती हैं, तो यह बहुत मुश्किल नहीं है।”

सावधानी

उन्होंने बताया कि वह लकड़ी के कारखाने में चाबी के अलग-अलग हिस्से तैयार करते थे और उन्हें अपनी सेल में लाकर जोड़ लेते थे। ऐसे में किसी को शक नहीं होता था।


कमाल की बात यह है कि टिम ने सेल के अंदर रहते हुए खिड़की से हाथ बाहर निकालकर एक दरवाजों को खोला। इसके लिए उन्होंने झाडू की लंबी डंडी और अरालदण्ड (क्रैन्कशैफ्ट) की मदद ली। इस तरह वह एक के बाद एक दरवाजे खोलते चले गये।

लेकिन अंतिम दरवाजे को खोलने में उन्हें दिक्कत हुई। ऐसे में उन्होंने एक तेज धक्के से दरवाजे को तोड़ दिया। इसके बाद वे आम कपड़ों में भाग निकले।

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