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आईएस से ब्रिटेन को भी खतरा: डेविड कैमरुन

Sun, 17 Aug 2014 12:04 PM IST
Updated Sun, 17 Aug 2014 12:04 PM IST
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threat to britain from IS

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने कहा है कि अगर इराक और सीरिया के कुछ हिस्सों पर काबिज इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो यो ब्रिटेन की सड़कों पर भी लोगों को निशाना बना सकते हैं। 'संडे टेलीग्राफ' अखबार में एक लेख लिखकर कैमरन ने ये चेतावनी दी है।

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उन्होंने कहा कि आईएस के खिलाफ सिर्फ मानवीय आधार पर की गई कार्रवाई काफी नहीं होगी, बल्कि आईएस के खिलाफ सख्त सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

कैमरन का ये लेख चर्च के नेताओं के उस बयान के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामिक चरमपंथ पर काबू पाने के लिए ब्रिटेन के पास कोई अनुकूल नीति नहीं है।
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अपने लेख में कैमरन ने लिखा है, ''सही अर्थों में हम तभी सुरक्षित होंगे जब हम एक ज्यादा स्थायी दुनिया बनाने के लिए हम अपने तमाम संसाधन आर्थिक मदद, कूटनीति, और सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करेंगे।''
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उन्होंने आगे लिखा है, ''अगर हम इस अत्यधिक खतरनाक आतंकवादी आंदोलन के बढ़ते कदम को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं करते हैं तो ये और मजबूत होगा, यहां तक की ये ब्रिटेन की सड़कों पर हम लोगों को निशाना बना सकता है।'

कैमरन ने कहा कि अगर आईएस एक पृथक खिलाफत राज्य कायम करने में सफल होता है तो ब्रिटेन को भूमध्य सागर के किनारे और नेटो सदस्य देश से सटे हुए एक चरमपंथी राज्य का सीधा सामना करना होगा।

आईएस का कोई भी दिखा तो होगा गिरफ्तार

threat to britain from IS

उन्होंने कहा कि आईएस का झंडा लिए अगर कोई भी व्यक्ति देखा गया तो उसे फौरन गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वो इसे आतंक के खिलाफ युद्ध के तौर पर नहीं देखते बल्कि उनके अनुसार ये एक ऐसी लडाई है जिसमें एक तरफ इस्लाम है और दूसरी तरफ वो चरमपंथी हैं जो इस्लाम का दुरूपयोग करना चाहते हैं।

इससे पहले कैमरन कह चुके हैं कि आईएस ब्रिटेन के खिलाफ चरमपंथी हमले की योजना बना रहा है। एक अनुमान के अनुसार आईएस के लडाकों में लगभग चार सौ ब्रितानी नागरिक शामिल हैं।

आईएस की हिंसक गतिविधियों के कारण अब तक लगभग 12 लाख इराकी नागरिक अपने घरों को छोडने पर मजबूर हैं। इनके अलावा अल्पसंख्यक यजीदी समुदाय, इसाई और इराकी शिया समुदाय के लोग अपने घरों को छोडकर इराक के उत्तरी इलाकों में शरण लिए हुए हैं।

आईएस इन लोगों को सच्चा मुसलमान नहीं मानता है।

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