भारतीयों को मानसिक रूप से कमजोर मानते थे महान वैज्ञानिक आइंस्टीन
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यह पहलीबार नहीं है कि जब किसी महान व्यक्ति ने भारत को कमजोर कहा हो। कुछ ऐसा ही खुलासा महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में भी हुआ है। आइंस्टीन की डायरी के कुछ पन्ने सार्वजनिक हुए हैं जिसमें लिखा है कि भारतीय शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते हैं।
आइंस्टीन ने अपनी डायरी में लिखा है कि भारत की जलवायु ही कुछ ऐसी है कि यहां के लोग शारीरिक और मानसिक रूप से कमतर दिखते हैं। यही नहीं भारतीयों का आकलन करते हुए उन्होंने लिखा है कि भारतीय दूर की सोच नहीं रखते हैं, मतलब 15 मिनट से ज्यादा आगे-पीछे का सोच ही नहीं पाते। अनुवांशिक कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार होते हैं।' मजेदार बात यह है कि जब आइंस्टीन ने यह बातें लिखीं तब तक वह भारत नहीं आए थे। उनकी मुलाकात श्रीलंका में कुछ भारतीयों से हुई थी और उसी आधार पर उन्होंने अपनी यह राय बना ली थी।
हालांकि, आइंस्टीन दुनिया घूमने के शौकीन जरूर थे। और इस दौरान वह ट्रैवल डायरी भी लिखते थे। वह जहां भी घूमकर आते, वहां का जिक्र डायरी में रहता था। डायरी के कुछ पन्नों में 1922-23 का जिक्र है जब आइंस्टीन एशिया के कई देश घूमने निकले थे। उन्होंने चीन और श्रीलंका की यात्रा की और इन दोनों देशों के बारे में अपनी राय डायरी में लिखी। पिछले दिनों कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आइंस्टीन पेपर प्रोजेक्ट के सहायक निदेशक जीव रोजेनक्रैंज ने इसी डायरी के कुछ अंश को अपनी किताब के माध्यम से सार्वजनिक किया है।
उन्होंने अपनी डायरी में चीनी लोगों के बारे में भी बहुत रोचक जानकारियां दी हैं। उन्होंने चीन के लोगों के लिए लिखा- 'यहां के लोग बहुत मेहनती होते हैं लेकिन मुझे ये मशीनी मानव से लगते हैं। यही नहीं उन्होंने लिखा है कि चीन के लोग बहुत गंदे तरीके से रहते हैं। और कमअक्ल भी होते हैं।'
जबकि श्रीलंका के लोगों के बारे में भी आइंस्टीन ने रोचक जानकारियां दी हैं। उन्होंने लिखा- 'यहां के लोग बहुत गंदे तरीके से रहते हैं। इनका सिद्धांत होता है- कम काम करो, जरूरत भी कम रखो। यही उनके जीवन का साधारण आर्थिक चक्र है।'
नस्लभेद के खिलाफ आवाज भी उठाई
आइंस्टीन सिर्फ एक महान वैज्ञानिक नहीं थे बल्कि वह नस्लभेद के भी खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे थे। इसलिए उनकी छवि वैज्ञानिक के अलावा नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति की भी रही है।
वो सार्वजनिक मंचों पर नस्लभेद की आलोचना करते थे और नस्लीय टिप्पणी को सफेद लोगों की बीमारी बताते थे। लेकिन बताया जा रहा है कि उनकी डायरी में एशिया के लोगों के लिए नस्लभेदी टिप्पणियां भी मिली हैं।