फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   The city that sells its mountains to the world

वो खूबसूरत शहर जिसने दुनिया को अपने पहाड़ बेच डाले

Fri, 13 Oct 2017 03:17 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Fri, 13 Oct 2017 03:17 PM IST
विज्ञापन
The city that sells its mountains to the world
Switzerland

स्विट्जरलैंड की खूबसूरती से कौन वाकिफ नहीं? ठंडे मौसम और बर्फबारी के शौकीन लोगों का तो सपना होता है कि उन्हें यहां कुछ पल बिताने का मौका मिल जाए। बॉलीवुड ने यहां की खूबसूरती को खूब इस्तेमाल किया है। स्विट्जरलैंड, बॉलीवुड के मशहूर फिल्म डायरेक्टर यश चोपड़ा की पहली पसंद था।

विज्ञापन


पढ़ें:  स्विट्जरलैंड में बलूचिस्तान की आजादी के लगे पोस्टर, भड़का पाकिस्तान
विज्ञापन


उनकी कोशिश होती थी कि अपनी फिल्म का कम से कम एक गाना तो वो यहां जरूर शूट करें। शायद उनकी फिल्मों से ही आम भारतीयों ने स्विट्जरलैंड को ज्यादा करीब से जाना।स्विट्जरलैंड में भी एक ऐसी जगह है जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते। उसका नाम है. सेंट मॉरिट्स। ये अल्पाइन पर्वतों पर स्थित स्विट्ज़रलैंड का रिजॉर्ट टाउन है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां साल भर बर्फ की मोटी चादर बिछी रहती है। लोग यहां ना सिर्फ स्कीईंग के लिए आते हैं, बल्कि इसकी पहचान विंटर टूरिज्म रिजॉर्ट के तौर पर भी है। 

क्यों मशहूर हुआ सेंट मॉरिट्स?
सेंट मॉरिट्स इतना मशहूर कैसे हुआ, इसके पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है। किस्सा 1864 का है। एक दिन एन्गाडिनर कुल्म होटल के मालिक योहानिस बैड्रट, लंदन से स्विटज़रलैंड घूमने आए अमीर कारोबारियों के साथ बैठे थे। बातों का दौर चल रहा था। इन्हीं में से कुछ ने कहा कि लंदन की जानलेवा सर्दी लौटने वाली है। 

इस पर होटल के मालिक योहानिस ने कहा कि जनाब आप यहां पहाड़ों में आकर सर्दियां गुज़ारें। सेंट मॉरिट्स में बर्फबारी का मजा लीजिए। यहां सर्दी का मौसम बहुत शानदार होता है। भरी सर्दी में भी आप यहां बिना जैकेट के रह सकते हैं। लंदन से आए कारोबारियों का समूह ये बात मानने को राजी नहीं था।

पढ़ें: फिलीपींस में मालवाहक जहाज डूबने से 11 भारतीय लापता, रेस्क्यू जारी 

बस इसी बात पर शर्त लग गई कि अगर होटल के मालिक का दावा गलत साबित हुआ तो उसे पूरी सर्दी यहां रहने और सफर का सारा खर्च उठाना होगा। व्यापारियों और सैलानियों का ये ग्रुप उसी साल दिसंबर के महीने में यहां फिर से आया। शर्त के मुताबिक इन सभी को हफ्ते भर के सफर पर निकलना था। सभी सिर से लेकर पैर तक फर के कपड़ों में लिपटे थे। तय पाया गया था कि पहाड़ों पर 2,284 मीटर की दूरी तय करके ये सभी जूलियर पास पहुंचेंगे।

बर्फ के बावजूद पसीना आने लगा

The city that sells its mountains to the world
Switzerland

सेंट मॉरिट्स तक पहुंचते ही आसमान एक दम साफ हो गया।सभी को पसीने आने लगे और जैकेट उतारने पड़े। होटल का मालिक योहानिस शर्त जीत चुका था। इसी के साथ सेंट मॉरिट्स के बेहतरीन मौसम के किस्से भी लोगों की जुबान पर आने लगे। दूर तक बिछी बर्फ़ की सफेद चादर और खिलते हुए सूरज का मजा लेने के लिए दूर-दूर से सैलानी यहां आने लगे।

यहां सैलानियों की तादाद इतनी बढ़ी कि बड़े-बड़े होटल खुलने लगे। 1896 में योहानिस बैड्रट के बेटे कैस्पर ने अपने पिता के नाम पर एक फाइव स्टार होटल खोला जिसका नाम रखा, 'बैड्रट पैलेस'। इस होटल के मैनेजर का कहना है कि कुछ लोग शर्त वाली बात को महज एक कहानी मानते हैं। लेकिन ऐसा हकीकत में हुआ था।

इस शर्त से पहले लोग यहां सिर्फ गर्मी के मौसम में ही आते थे। सेंट मॉरिट्स की एक टूरिस्ट प्लेस के तौर पर मार्किटिंग का श्रेय पूरी तरह से योहानि बैड्रट को जाता है। जिस साल योहानिस ने शर्त लगाई थी, उसी साल स्विट्ज़रलैंड में पहला टूरिस्ट ऑफिस खुला। इस जगह से जुड़ी एक और कहानी है। 


कमला नेहरू भी इलाज के लिए आईं
कहा जाता है कि 1861 में यहां एक पादरी ईसा मसीह का संदेश फैलाने के इरादे से आया था। जब वो वापस इंग्लैंड गया तो उसने स्विट्ज़रलैंड की तारीफ में एक ब्रिटिश अखबार को खत लिखा।खत में उसने लिखा की सर्दियां बिताने के लिए ये एक बेहतरीन जगह है। हालांकि उस दौर में भी कुछ स्विस इलाके अच्छे व्यापारिक केंद्र के तौर पर काम कर रहे थे।

दावोस, अरोसा और लुसान ऐसे इलाक़े थे जहां बड़े-बड़े सनोटोरियम खोले गए थे। इन्हीं में से एक में बीसवीं सदी की शुरुआत में पंडित नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी इलाज के लिए आई थीं। यहां सांस की बीमारियों और टीबी का इलाज बड़े पैमाने पर किया जाता था लेकिन पादरी का खत अखबार में छप जाने से इस इलाके की शोहरत और फैल गई। 1880 तक ब्रितानी सैलानियों की तादाद इतनी ज्यादा बढ़ गई कि अंग्रेजी बोलने वालों के लिए यहां से एक स्थानीय अखबार छपने लगा। अखबार का नाम था 'एनगाडिनर एक्सप्रेस एंड अल्पाइन'। 

आधुनिकता का लिबास 21वीं सदी से पहली ही ओढ़ा
इसके अलावा और भी ऐसी बहुत सी बातें और चीजें थीं जो यहां पहली बार हुई थीं। बैड्रट की कोशिशों से पहले तक यहां सिर्फ 75 सैलानियों के रहने का इंतजाम था। लेकिन धीरे-धीरे यहां सुविधाएं बढ़ाई गईं। अगले 40 सालों में यहां दो हज़ार से ज्यादा सैलानियों के रहने का इंतजाम हो गया। बैड्रट ने इस इलाक़े के आधुनिकीकरण के लिए भी बहुत कोशिशें कीं ।

1879 में स्विट्जरलैंड में पहली इलेक्ट्रिक लाइट और स्ट्रीट लाइट एनगाडिनर कुल्म में ही लगाई गई थी। इसी साल स्विट्जरलैंड में पहली बार फ्लश वाले टॉयलेट और पहला पनबिजली प्लांट लगाया गया था। 1882 तक आते-आते यहां आईस स्केटिंग के मुक़ाबले होने लगे। यूरोप में होने वाली ये पहली ऐसी प्रतियोगिता थी। 

सेंट मॉरिट्स की कहानी किसी इलाके के आमूल-चूल बदलाव की बड़ी मिसाल है। 2018 के सीजन में यहां नौवां फाइव स्टार होटल खुलने वाला है। अब यहां की अर्थव्यवस्था में विदेशी कंपनियों ने भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है। लेकिन जो बात यहां के पारंपरिक होटलों में है वो कहीं और नहीं।

मिस्र के पिरामिड की तरह बर्फ से ढके यहां के पहाड़ और मैदानों में बिछी सफ़ेद चांदनी का लुफ्त लेने का जो मजा यहां है वो कहीं और नहीं। इसका सेहरा पूरी तरह से योहानिस बैड्रट के सिर सजता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed