पत्रिका के दफ्तर पर आतंकी हमला, 12 मरे
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फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक पत्रिका के दफ्तर में घुसकर हथियारबंद आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर 12 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हमलावर पत्रिका में आईएस के सरगना अबु बक्र अल बगदादी का कार्टून छापे जाने से नाराज थे। कार्टून के विरोध में आतंकियों ने पत्रिका के दफ्तर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की।
पत्रिका ने मोहम्मद साहब का कार्टून भी छापा था। पेरिस की पत्रिका चार्ली हेबडो अपने व्यंग्यों के लिए फ्रांस में मशहूर है। हालांकि व्यंग्य और कार्टून के कारण ये कई बार विवादों में भी आई है।
बुधवार को पत्रिका के दफ्तर में घुसकर दो नकाबपोश हथियारबंद आतंकियों ने वहां काम कर रहे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की। हमले में मारे गए लोगों में दो पुलिसकर्मियों के अलावा चार कार्टूनिस्ट और छह पत्रकार शामिल हैं। पत्रिका के संपादक स्टीफन चावरेयर की भी मौत हो गई है। बताया जाता है कि ज्यादातर कार्टून वे स्वयं ही बनाते थे, जिसके चलते उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
हमले के समय पत्रिका के ऑफिस में एडिटोरियल मीटिंग चल रही थी। जहां ये हमलावर सीधे पहुंच गए। इसके बाद इन्होंने नाम ले लेकर दस लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हमले में दस लोग घायल हुए हैं जिनमें पांच गंभीर बताए जा रहे हैं। हमलावरों के पास क्लाशनिकोव रायफल और राकेट लांचर थे। हालांकि उन्होंने रॉकेट लांचर का प्रयोग नहीं किया।
बगदादी पर व्यंग्य ट्विट के विरोध में हमला
हमलावर एक गाड़ी को हाइजैक करके पत्रिका के दफ्तर तक पहुंचे थे। हमले के बाद वह फरार होने में सफल रहे। बताया जा रहा है कि साल 2011 में पत्रिका में मोहम्मद साहब पर एक व्यंग्य कार्टून छापा गया था।
जिसके बाद से ही लगातार पत्रिका को धमकियां मिल रही थी। इसके बाद आज सुबह पत्रिका ने आईएस के प्रमुख अबु बक्र अल बगदादी के ऊपर भी एक व्यंगात्मक ट्वीट किया था। इसके बाद भी आज उन्हें धमकी दी गई थी। वहीं मौके पर मौजूद रही कोको नाम की काटूर्निस्ट ने पुलिस को बताया किया हमलावर साफ सुथरी फ्रेंच भाषा बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि वो अलकायदा से हैं। कोको हमले के दौरान डेस्क के नीचे छुप गई थी।
ताजा हमले को इसी के विरोध में हुआ माना जा रहा है। वहीं इस घटना के बाद समस्त पेरिस को सील करते हुए आसपास के इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
दूसरी ओर घटना की जानकारी मिलते ही देश से बाहर गए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद भी पेरिस पहुंच गए हैं। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर हालात का निरीक्षण किया। वहीं घटना के संबंध में उन्होंने एक उच्चस्तरीय मीटिंग भी बुलाई है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया आतंकवादी हमला
फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस हमले को आतंकवादी हमला करार दिया है। इससे निपटने के लिए उन्होंने आपात बैठक बुलाई है। इसके साथ ही पूरे फ्रांस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया की आजादी पर इस तरह की घटनाएं अंकुश नहीं लगा सकती। कहा कि इस दुर्दांत वारदात को अंजाम देने वाले दुनिया में जहां भी जिस हाल में होंगे उन्हें उनके किए की सजा दी जाएगी।
वहीं बताया जा रहा है कि यह व्यंग्य पत्रिका अपने अलग तरह के कार्टून को लेकर हमेशा से चर्चा में रही है। विभिन्न धर्म और धार्मिक गुरुओं के अलावा विभिन्न संवेनशील मुद्दों पर यह पत्रिका व्यंग्य कार्टून छापते रही है।
जिसके चलते लगातार इसका विरोध भी होता रहा है और धमकियां भी मिलती रही हैं। इसी वजह से पत्रिका के स्टाफ को पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी। पुलिस का एक वाहन लगातार कार्यालय के बाहर तैनात रहता था।
दूसरी ओर यह भी बताया जा रहा है कि आसपास के लोगों ने इन हमलावरों को बाहर पुलिस के वाहन पर फायरिंग करते देख फोन से पत्रिका के स्टाफ को इसकी जानकारी दी थी। लेकिन इस बीच हमलावर कार्यालय के अंदर प्रवेश कर गए। जिसके बाद उन्होंने अंदर बैठे पत्रकारों और अन्य स्टाफ को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया।
वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि हमारी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं। इसके साथ ही दुनियाभर से हमले के प्रति संवेदनाएं जताने का सिलसिला शुरू हो गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुवा ओलांद ने हमले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आतंकियों ने पिछले कुछ समय में फ्रांस पर कई सारे आतंकी हमले प्लान किए थे, जिनकी सूचना खुफिया एजेसियां लगातार दे रहीं थीं। इसी कड़ी में आतंकियों ने यह हमला किया है।
इस हमले के बाद फ्रांस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहा है क्योंकि जिस जगह यह हमला हुआ वो पेरिस का अति सुरक्षात्मक क्षेत्र माना जाता है। बताया जाता है कि फ्रांसीसी क्रांति की शुरूआत भी इसी जगह से हुई थी, इसलिए इसका अलग महत्व माना जाता है। ऐसे में इतने महत्वपूर्ण इलाके में हमला करना और इसके बाद इत्मीनान से फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
हमले के बाद आतंकियों ने हाइजैक की गई गाड़ी को नार्थ ईस्ट में छोड़ दिया और इसके बाद आराम से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने हमले के दौरान इस्लाम समर्थक नारे भी लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले से पैगंबर मोहम्मद पर
पर छापे गए कार्टून का बदला ले लिया।