ये महिलाएं यौन दुर्व्यवहार सहने के लिए बाध्य हैं

बीबीसी, हिंदी Updated Mon, 09 Apr 2018 03:19 PM IST
शोषण
शोषण - फोटो : Desk
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यौन उत्पीड़न से बचने के लिए वो अक्सर घर से भाग जाती थीं, लेकिन ब्रिटेन में शरण चाहने वाले कई लोगों के साथ यह बदस्तूर जारी है। आम तौर पर निर्वासित किए जाने के भय से वो पुलिस को इसके बारे में नहीं बताते हैं, लेकिन हार्वी वाइनस्टीन पर कई अभिनेत्रियों ने यौन शोषण के आरोप लगाए जाने के बाद अब इन महलाओं ने भी अपने अनुभवों के बारे में बात करना शुरू कर दिया है। 37 वर्षीय ग्रेस के साथ सहमति से कभी सेक्स नहीं किया गया। वो कहती हैं, "मैं अकेली नहीं हूं। मेरे जैसी कई और महिलाएं हैं।" वो हाथ उठा कर सामने की दीवार की तरफ इशारा करती हैं जिसके दूसरी ओर उनकी दोस्त बैठी हैं। "हम ब्रिटेन में सबसे बेसहारा और कमजोर महिलाओं में से हैं।" वो ये समझती हैं कि बेसहारा होना और शोषण किया जाना साथ-साथ होता है। पूरे जीवन उनके साथ यही हुआ है।
1998 नें 17 साल की उम्र में ग्रेस लंदन पहुंची थीं। वो पश्चिम अफ्रीका मैं पैदा हुई थीं, लेकिन उनके रिश्तेदार खतरे में ना पड़ें इसलिए वो अपने देश का नाम नहीं बताना चाहतीं। उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं बहुत गरीब परिवार से हूं।" उनका परिवार इतना गरीब था कि दहेज के बदले 15 साल की उम्र में उनकी और उनकी 17 वर्षीय बड़ी बहन की शादी उनके पिता से भी बड़ी उम्र के एक व्यक्ति से करा दी गई थी। वो उस बूढ़े की पांच अन्य पत्नियों के साथ राजधानी के आलीशान मकान में रहने चली गईं। पहली बार इन दोनों बहनों को अपने भोजन की चिंता नहीं करने की जरूरत थी, लेकिन बस यही एक चीज थी जिसकी उन्हें चिंता नहीं करनी थी।

वो कहती हैं, "वहां जिंदगी अच्छी नहीं थी। मुझे बहुत दुख हुआ।" ग्रेस और उनकी बहन का उनके पति ने लगातार शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण किया। उन्हें अपने पति के राजनीतिक करियर की सफलता के लिए अंधविश्वास से भरे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना पड़ता, यहां तक कि जानवरों का खून तक पीना पड़ता। ग्रेस कांपते हुए बताती हैं, "हमारे पति बेहद शक्तिशाली व्यक्ति थे।" 

सभी घरों में उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ

दो साल बाद ही उनकी शादी टूटने की कगार पर पहुंच गई। उनसे सहानुभूति रखने वाले एक चाचा ने उन्हें देश छोड़ने में मदद का भरोसा दिलाया और उनके लिए लंदन का टिकट, वीजा और वहां रहने की व्यवस्था की। लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर जो व्यक्ति उन्हें लेने आया (जिसके पास उन्हें रहना था) उसे कैंसर था और कुछ ही हफ्तों में उसकी मौत भी हो गई। अपनी मौत से पहले उन्होंने इन दोनों बहनों का परिचय स्थानीय चर्च के माध्यम से पश्चिम अफ्रीकी आप्रवासियों से करवाया। कैंसर से पीड़ित उस व्यक्ति की मौत के बाद ये दोनों बहनें चर्च के माध्यम से मिले दो अलग-अलग परिवारों के साथ चली गईं। इन्हें बच्चों की देखभाल और खाना बनाने का काम दिया गया और उन्हें घर में रहने की जगह मिली। ग्रेस कहती हैं, "हम भोजन, कपड़े के लिए उन पर निर्भर थे।"

ग्रेस के पास अपना कमरा नहीं था। वो लिविंग रूम में सोफे पर सोती थीं, वो भी तब जब पूरा परिवार सोने चला जाता था। जल्द ही उन्हें पता चल गया कि वो कितनी असुरक्षित थीं। वो कहती हैं, "रात के वक्त जब सब लोग सो जाते तो घर का मालिक मेरे पास आता और अपने यौन सुख के लिए मेरा इस्तेमाल करता। वो जानता था कि मैं बेसहारा हूं और मैं कहीं नहीं जा सकती। मुझे कानून की भी जानकारी नहीं थी, मैं पुलिस के पास नहीं जा सकती थी क्योंकि मुझे डर था कि मुझे हिरासत में रख कर निर्वासित कर दिया जाएगा। वो कहता था कि तुमसे पूछा जाएगा कि कौन हो तो क्या कहोगी।"

"मैं इस बारे में उसकी पत्नी से भी बात नहीं कर सकती थी क्योंकि मुझे चिंता थी की अगर वो मेरा यकीन नहीं करेगी तो मुझे घर से बाहर कर दिया जाएगा। उस स्थिति में मैं क्या कर सकती थी। मैं सोचती रहती। क्या करूं?" ग्रेस को मालूम हुआ कि उनकी बहन भी वैसी ही स्थिति में थीं। वो दोनों फंस गई थीं। लेकिन आगे और भी बड़ी समस्याएं आने वाली थीं। जब परिवार के बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हो गए तो उन्हें बताया गया कि अब परिवार को उनकी जरूरत नहीं है। इसके बाद दूसरा घर मिलने तक उन्हें खाने के लिए दोस्तों पर निर्भर होना पड़ा और पार्क की बेंचों और बसों में रात गुजारनी पड़ी।

ब्रिटेन में 20 सालों के दौरान वो एक दर्जन से अधिक घरों में रहीं और लगभग सभी घरों में उनका यौन शोषण किया गया। "मैं फर्श और सोफे पर सोई। अगर वहां रात में कोई अतिथि ठहरता तो निश्चित छेड़ता। अक्सर लोग मेरे कमरे में आते वो मुझे छूते और इससे भी ज्यादा कुछ करते।" "रात को मैं कमरे के दरवाजे को दराज आदि से जाम करने की कोशिश करती। कभी यह काम करता, कभी नहीं। अगले दिन सुबह वो अपनी पत्नी और बच्चों के सामने ऐसे पेश आते जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं।" "ये एक या दो परिवारों के साथ रहने के दौरान ही नहीं, कई बार ऐसा हुआ।"
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