फैशन की भेंट चढ़ रहे हैं अजगर

बीबीसी हिंदी Updated Sun, 02 Dec 2012 06:09 PM IST
snake skin fashion putting pythons at risk report
एक नई रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में अजगर की खाल के व्यापार के कारण उसकी कुछ प्रजातियों पर संकट मंडरा रहा है।

अजगर की खाल का कारोबार आमतौर पर गैर कानूनी है। लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यूरोप में हैंडबैग और फैशन से जुड़ी अन्य चीजों में अजगर की खाल का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसलिए वहां इसका आयात बढ़ रहा है।

लेकिन इसके निर्यात के नियम बहुत ही लचर हैं। इसलिए ये पता लगाना मुश्किल है कि ये खाल कहां से आ रही हैं। रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि कुछ जगहों पर सांपों को मारने के तरीके बहुत ही क्रूर हैं।

सांपों पर खतरा
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सांप की खाल का कारोबार बहुत ही आकर्षक बनता जा रहा है। अनुमान है कि दक्षिण एशिया से हर साल सांपों की लगभग पांच लाख खाल निर्यात होती हैं और इनका सालाना कारोबार एक अरब डॉलर का है। वन्यजीव संरक्षण के लिए बने 'साइट्स' जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते कुछ हद तक इन प्रजातियों के कारोबार की इजाजत देते हैं।

लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि जब बात अजगरों की आती है तो नियमों का धड़ल्ले से दुरुपयोग होता है। निगरानी में रखे जाने वाले सांपों को बेचने की अनुमति है लेकिन रिपोर्ट कहती है कि इनमें से बहुत से सांपों को पहले जंगल से पकड़ कर लाया जाता है।

सांपों की खाल का कारोबार इतना आकर्षक है कि अगर इंडोनेशिया में एक ग्रामीण सांप की एक खाल को 30 डॉलर यानी डेढ़ हजार रुपए में बेचता है तो फ्रांस या इटली में उससे बने फैशनेबल हैंडबैग की कीमत 15 हजार डॉलर यानी आठ लाख 30 हजार रुपए तक होती है।

तीन से चार मीटर लंबी सांप की खाल की सबसे ज्यादा मांग है। रिपोर्ट कहती है कि इसके लिए बड़ी संख्या में सांप मारे जा रहे हैं। बहुत बार तो सांपों को उनमें प्रजनन क्षमता विकसित होने से पहले ही मार दिया जाता है।

सांपों को चाहिए सहानुभूति
ये शोध रिपोर्ट 'अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र' ने तैयार कराई है। इससे जुड़े एलेक्जेंडर कैस्टराइन का कहना है कि ये समस्या बढ़ती ही जा रही है। वो कहते हैं कि रिपोर्ट दिखाती है कि अजगर की खाल का गैरकानूनी कारोबार हो रहा है और इससे इन जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

रिपोर्ट के लेखक मानते हैं कि उन्हें बचाने की कोशिशें आसान नहीं हैं क्योंकि सांपों को लोगों की सहानुभूति कम ही मिल पाती है। रिपोर्ट के सह-लेखक ओलिवर कैलेबेट बताते हैं कि मुलायम और सुंदर दिखने वाले अन्य जीवों के मुकाबले सांपों के प्रति लोगों का लगाव बहुत ही कम होता है।

ऐसे में यहां एशिया में लोगों को सांपों के लिए पैदा खतरे के बारे में समझा पाना और इस पर उनका समर्थन हासिल करना मुश्किल काम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनके व्यापार पर प्रतिबंध लगाना कारगर साबित नहीं होगा। इसके लिए अन्य स्तरों पर कई कदम उठाने की जरूरत है।

सबसे पहले मौजूदा कानूनों को मजबूत करना होगा और साथ ही इस बारे में जानकारी हासिल करने का बेहतर तंत्र कायम करना होगा कि सांपों की खाल कहां से आ रही हैं और कहां जा रही हैं। बीबीसी ने सांप की खाल से फैशनेबल चीजें बनाने वाली कई कंपनियों से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।

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