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मॉस्को के 'मिनी मार्केट' की वो ग़ुलाम महिला
Updated Fri, 16 Nov 2012 03:46 PM IST
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मानव तस्करी की एक हैरतअंगेज घटना रूस की राजधानी मॉस्को में सामने आई है।
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एक महिला ने बताया कि उसे पिछले 10 सालों से कैद कर रखा गया है। यहां उसने तीन बच्चों को जन्म दिए। इस शहर में किस तरह की पीड़ा से गुजरती रही लेयला एशेरोवा- ये जानना और भी पीड़ा दायक है।
मानव तस्करी रोकने वाले कार्यकर्ताओं ने दो सप्ताह पहले मॉस्को से इस तरह के 11 लोगों को रिहा कराया है जिन्होंने ना जाने कितने वर्षों से सूर्य की एक किरण नहीं देखी और ना जाने कौन-कौन सी पीड़ा झेली है।
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उज्बेक़िस्तान और क़ज़ाक़िस्तान से नौकरी का झांसा देकर लाई गई महिलाओं ने जब अब अपने दुख बयां किए तो कलेजा फट गया। इन्हीं में से एक लेयला एशेरोवा हैं, जिनका दर्द अब आंखों से नहीं छलकता बस सपाट भाषा में पीड़ा को कहानी की तरह कहती चली जाती है।
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एशेरोवा, पिछले 10 वर्षों से मॉस्को के ‘मिनी मार्केट’ में कैद थीं। वो कहती हैं कि उन्हें 10 वर्ष पहले उज्बेकिस्तान से काम के लिए लाया गया था लेकिन मॉस्को आते ही उनका पासपोर्ट छीन लिया गया।
दुकान में काम करने के लिए रखा गया लेकिन बहुत जल्द उसे पता लग गया कि वो एक ‘दुकान’ में काम कर रही है जहां उसे ‘सबकुछ’ बेचना है। मना करने की कीमत वो मार थी जिसे आज भी उनके चेहरे और उनके पैरों पर देखा जा सकता है।
इस ‘दुकान’ ने उन्हें वेतन के नाम पर तीन बच्चे दिए हैं, एक जिसने कभी धूप नहीं देखी, दूसरी जो लड़की थी वो ना जाने कहां है और तीसरा खुद भी कैद का मतलब समझने लगा है।
एशेरोवा ‘बलात्कार’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करती लेकिन उन्हें पता है कि उनके बच्चे का पिता उसी दुकानदार का रिश्तेदार था।
हालांकि एशेरोवा को ये बात मॉस्को में दस्तक देते ही समझ आ गई थी, जब उनके सामने ही एक लड़की को बाल खींच कर मारा जा रहा था।
एशेरोवा कहती है, मेरे यहां आते ही पासपोर्ट छीन लिया गया, मैंने देखा एक लड़की के बाल खींच कर उसे गंदे तरीके से मारा जा रहा था। मुझे समझ आ गया था कि मैं गलत जगह पहुंच गई हूं।
पुलिस की मिलीभगत
लेकिन एशेरोवा से जब ये पूछा गया कि वो पुलिस के पास क्यों नहीं गई। वो कहती है स्थानीय पुलिसकर्मी को ये दुकानदार पैसे देते हैं और पुलिस भागने के बाद वापस इन्हें लाकर सौंप देते हैं।
भागने और पुलिस को बताने की सज़ा की कल्पना करना भी कठिन है। एशेरोवा कहती है, “मैं भावशून्य हो चुकी हूं, मेरे भीतर की घबराहट जा चुकी है। मैं सिर्फ इतना सोचती हूं कि मैं कुछ करके उस दुकानदार महिला को सज़ा दिला सकूं जिसकी वजह से मेरी ये हालत हुई।”
एशेरोवा ने कैद में तीन बच्चों को जन्म दिया है उसमें से एक बेटा छह साल का है उसे भी छुड़ा लिया गया है जिसका नाम बायखर है। बायखर को दो और छोटे बच्चों के साथ एक कमरे में कैद कर दिया गया था।
हालांकि एशेरोवा को ये पता नहीं था कि मॉस्को के जिस घर में उसे मुक्त करा कर रखा गया है उसके ठीक बगल में उनका बेटा भी है और अब वो कंप्यूटर पर ‘गेम’ खेल रहा है। एक मां के लिए इससे अच्छी ख़बर क्या हो सकती है!
एशेरोवा ने फ्रांस की जांच कमिटी को पूरी बात बताई है। रूस में ये जांच कमिटी 'एफबीआई' की तरह है।
'दुकान' में कैद जिंदगी
"मैं भावशून्य हो चुकी हूं, मेरे भीतर की घबराहट जा चुकी है। मैं सिर्फ इतना सोचती हूं कि मैं कुछ करके उस दुकानदार महिला को सज़ा दिला सकूं जिसकी वजह से मेरी ये हालत हुई।"
एशेरोवा