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मार्गरेट थैचर से जुड़े सात रोचक तथ्य
बीबीसी
Updated Tue, 09 Apr 2013 10:07 PM IST
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ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर 20वीं सदीं की दुनिया की प्रभावशाली नेताओं में से एक थी।
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वे 11 साल तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहीं। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन को एक नई दिशा दी। आइए नजर डालते हैं, उनसे जुड़े सात प्रमुख तथ्यों पर।
पिता का प्रभाव
मार्गरेट थैचर के पिता एल्फ्रेड रॉबटर्स किराना की एक दुकान चलाते थे। वे मैथेडिस्ट चर्च के प्रचारक और स्थानीय परिषद के सदस्य थे। मारग्रेट के जीवन पर उनके पिता के विचारों का प्रभाव देखा जा सकता है।
ग़रीबों को मिला घर
प्रधानमंत्री रहते हुए थैचर ने बहुत सी कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। उन्होंने कम आय वर्ग के लोगों के लिए बने-बनाए सरकारी घर देने की योजना की शुरुआत की। उनके कार्यकाल में शुरू हुए निजीकरण के दौर के बाद ग़रीब लोगों ने भी ब्रिटिश गैस और बीटी जैसी कंपनियों के शेयर खरीदे।
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बच्चों का दूध छीनने वाली मंत्री
साल 1970 में हुए आम चुनाव के बाद कंजर्वेटिव पार्टी सत्ता में वापस लौटी। प्रधानमंत्री टैड हीथ की सरकार में मारग्रेट थैचर को शिक्षामंत्री की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षामंत्री बनने के बाद थैचर ने सात से 11 साल तक के बच्चों को स्कूल में दिए जाने वाले दूध पर रोक लगा दी। उनके इस फैसले के बाद लेबर पार्टी ने उन्हें ‘दूध छीनने वाली’ की उपाधि दे दी।
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प्रधानमंत्री को चुनौती
मार्गरेट थैचर 1975 में बनी छद्म सरकार में पर्यावरण मंत्री बनाई गईं। वे प्रधानमंत्री हीथ के पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाने की वजह से उनसे नाराज थी। इसलिए उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद के चुनाव में हीथ के खिलाफ खड़ा होने का फैसला किया। पहले दौर में उन्हें हीथ को हरा दिया और दूसरे दौर में उनका सामना विली ह्वाइटलो से हुआ। उन्हें भी हराने में थैचर को कोई परेशानी नहीं हुई। ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार कोई महिला किसी राजनीतिक पार्टी की नेता चुनी गई थी।
लौह महिला
मार्गरेट थैचर ने 1976 में भाषण देते हुए तत्कालीन सोवियत संघ की दमनकारी नीतियों की जमकर आलोचना की। इसके बाद सोवियत संघ के एक अख़बार ने उन्हें ‘लौह महिला’ के रूप में प्रचारित किया। यह विशेषण उनके साथ जीवन पर्यंत जुड़ा रहा।
घरेलू राजनेता
मार्गरेट थैचर ने गृहणी राजनीतिज्ञ की छवि गढ़ने के बाद, वे यह जानती थीं कि महंगाई का एक आम परिवार पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसे जानते हुए उन्होंने ट्रेड यूनियन के अधिकारों को कम करना शुरू कर दिया। साल 19979 को मजदूरों के असंतोष के साल के रूप में जाना जाता है।
अर्जेंटीना को जवाब
मार्गरेट थैचर 1979 में प्रधानमंत्री बनीं। उनकी लोकप्रियता अप्रैल 1982 में उस समय चरम पर पहुंच गई जब उन्होंने फॉकलैंड द्वीप पर अर्जेंटीना के हमले का करारा जवाब दिया। इस वजह से अर्जेंटीना को पीछे हटना पड़ा।