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अगर दूसरी शादी-औरत करे तो क्या खराबी?

Tue, 22 Mar 2016 05:13 PM IST
बीबीसी/ब्रिटेन
बीबीसी/ब्रिटेन Updated Tue, 22 Mar 2016 05:13 PM IST
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second marriage of women and importance
कुछ विधवाओं को समाज में बहिष्कार का सामना करना पड़ा है - फोटो : BBC

ब्रिटेन में एशियाई महिलाओं का एक समूह उन महिलाओं की मदद करता है, जिनके पति की मौत हो चुकी है। ‘योर सहेली’ नामक इस संगठन का उद्देश्य दक्षिण एशियाई समुदाय की विधवाओं के प्रति कलंक वाले दृष्टिकोण और परंपरागत उपेक्षा को चुनौती देना है। इस अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ विधवाओं को समाज में बहिष्कार का सामना करना पड़ा है और उन्हें अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए काफी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। कोवेंट्री शहर के स्पोर्ट्स सेंटर में एशियाई महिलाओं का समूह एकत्र हुआ है, ये कमरा गुलाबी रंग की रोशनी से नहाया हुआ है। किसी घर की तरह मुलायम पर्दे भी लगे हुए हैं। यहां एकत्रित महिलाएं विधवाएं हैं। 33 साल की राज माली के पति ने एक साल पहले आत्महत्या कर ली थी। वह बताती हैं, “मैं हमेशा सुस्त रहा करती थी, लगता था कि कुछ बुरा ही होने वाला है। हर बार सदमा ही लगता था। मैं ख़ुद की मदद नहीं कर पा रही थी, लिहाजा ग़ुस्से में रहती थी।”

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हालांकि बाद में राज माली और उनके तीन बच्चों ने हालात से तालमेल बिठाना सीख लिया। लेकिन एशियाई समुदाय में युवावस्था में विधवा के बाद ज़िंदगी आसान नहीं होती। जैस सैखोन इसे बख़ूबी समझती हैं। योर सहेली की संस्थापक सैखोन कहती हैं, "मैंने देखा है कि कई लोगों को मेरे कपड़े पसंद नहीं आते तो कुछ को मेरा मेकअप। वे कहते तो कुछ भी नहीं हैं, लेकिन उनके चेहरे से ज़ाहिर हो जाता है। कई बार शब्दों से ज़्यादा तेज़ आवाज़ आपके हाव-भाव की होती है, यह दिल तोड़ने वाला होता है।"
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जैस जब 40 साल की थीं तब, दो दशक के वैवाहिक जीवन के बाद, उनके पति की मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद जैस अपने आस-पास के लोगों के रवैये से दंग रह गई थीं। वे बताती हैं, "मुझे जो बात सबसे ज़्यादा दुखी करती है वो ये है कि समुदाय के कुछ लोग जिनकी आपने मदद की हो, वे पति की मौत के बाद आपका सम्मान कम करने लगते हैं। मेरी बेटियां क्या सोचती होंगी कि जब मेरे पिता नहीं रहे, तो हमारी मां का सम्मान क्यों कम हो गया?" यही वजह है कि उन्होंने अपनी जैसी महिलाओं की मदद के लिए सहेली समूह का गठन किया है। ये समूह महीने में एक बार इकट्ठा होकर विधवाओं की मदद करता है। अपनी बैठक में योर सहेली कुल माहाय जैसे लाइफ़ कोच को आमंत्रित करती है, जो अपने संबोधन में इन महिलाओं को प्रेरक सलाह देते हैं।


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यह समूह एशियाई समुदाय के विधवाओं के प्रति सामाजिक रवैये में भी बदलाव चाहता है, लिहाजा इन्होंने महिला कार्यकर्ता राज खेरा को भी बोलने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विधवाओं से जुड़े टैबू पर चर्चा की। लेकिन सवाल ये है कि क्या समाज में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है? जिस बैठक में बीबीसी एशियन नेटवर्क की टीम शामिल हुई है, उसका आयोजन सरनजीत कंडोला ने किया है, जो मैच मेकिंग सर्विस चलाती हैं। उनसे ऐसी 20 विधवाएं जुड़ी हुई हैं जो फिर शादी करना चाहती हैं। सरनजीत कंडोला कहती हैं, "दस साल पहले इसकी कोई बात तक नहीं कर सकता था। लेकिन अब विधवाएं आगे आ रही हैं। पुरुषों के लिए आगे बढ़ना अच्छी बात मानी जाती है, लेकिन महिलाओं के लिए ये ख़राब बात मानी जाती है, कि वे अपने पति के बाद दूसरे पुरुष के साथ होने की बात कैसे सोच रही हैं।"

सरनजीत आगे कहती हैं, "लेकिन अब लोग बदल रहे हैं। हमारा आकलन करने वाला और ये तय करने के लिए हम क्या करें और क्या ना करें, ये कोई दूसरा कैसे तय कर सकता है।" इस इलाके की 40 से 50 महिलाएं योर सहेली में शामिल हुई हैं। इसके आयोजकों को भरोसा है कि इससे ब्रिटेन की एशियाई मूल की विधवाओं की स्थिति में बदलाव आएगा।

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