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पिघलने वाली जादुई मछली, वैज्ञानिकों ने 7 हजार मीटर नीचे समुद्र से ढूंढ निकाली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 11 Sep 2018 07:10 PM IST
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वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जादुई मछली ढूंढने में सफलता पाई है जो पानी की सतह पर आते ही पिघलने लगती है। मछली की इस रहस्यमयी प्रजाति को प्रशांत महासागर में आठ किमी नीचे पाया गया। वैज्ञानिकों को अब तक अज्ञात रही स्नेलफिश की तीन प्रजातियां मिली हैं।
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इन नई प्रजातियों की खासियत यह है कि यदि इन्हें पानी की सतह पर लाया जाए तो पिघलने लगेंगी। ये मछलियां बहुत कमजोर और जेली सरीखे ढांचे से बनी हैं। इनका रंग भी देखने में विचित्र है। आटाकामा गर्त में एक साहसिक यात्रा के दौरान ये मछलियां मिलीं।
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पेरू और चिली के तट से 160 किमी दूर महासागर की तलहटी में इन्हें पाया गया। मजेदार बात यह रही कि वैज्ञानिक कैमरे की सहायता से साढ़े सात हजार मीटर नीचे तैरने वाली इन मछलियों के फोटो लेने में सफल रहे।
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इसके बाद वैज्ञानिकों ने स्नेलफिश के नाम से जानी जाने वाली इन मछलियों को पकड़ने का सफल प्रयास किया। समुद्र के नीचे ठंडे जल में रहने वाली ये मछलियां सतह पर आते ही आइसक्रीम की तरह पिघलने लगती हैं। हालांकि समुद्र की तलहटी में ये बहुत सक्रिय रहती हैं। इन्हें देखने से यह भी साफ हो जाता है कि इनको भोजन के संकट से नहीं गुजरना पड़ता है।
भारी दबाव को सहने में सक्षम
पहली नजर में बेहद नाजुक दिखने वाली स्नेलफिश भारी पानी के दबाव को भी आसानी से सहने में सक्षम है। इनकी जेलीनुमा संरचना के कारण ही इतना भार सहन कर पाना संभव है। इन मछलियों की सबसे मजबूत हड्डी इनके कानों और दांतों में होती है। कानों की हड्डी के सहारे इन मछलियां में संतुलन स्थापित करने की अद्भुत क्षमता होती है। भारी दबाव और ठंड के अभाव में (जैसे कि - समुद्र की सतह) ये मछलियां अपने आप पिघलने लगती हैं।
फंदे में फंसाया
एचडी कैमरे से युक्त फंदे की मदद से पहले एक मछली को फंसाया गया। इसके बाद कई मछलियां अपने आप फंदे में फंसती गईं। हालांकि इन दुर्लभ मछलियों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। कैमरा सिस्टम को समुद्र में पूरी तरह डूबने और मछली तक पहुंचने में करीब चार घंटे का समय लगा। इसके बाद लैंडर के मछलियों संग बाहर आने में 12-14 घंटे लगे। दरअसल समुद्र में मछलियों को पकड़ने की शुरुआत तब हुई जब वैज्ञानिकों ने पानी के जरिए वहां उपस्थित लैंडर को ऐसा करने का संकेत दिया।
फंदे में फंसाया
एचडी कैमरे से युक्त फंदे की मदद से पहले एक मछली को फंसाया गया। इसके बाद कई मछलियां अपने आप फंदे में फंसती गईं। हालांकि इन दुर्लभ मछलियों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। कैमरा सिस्टम को समुद्र में पूरी तरह डूबने और मछली तक पहुंचने में करीब चार घंटे का समय लगा। इसके बाद लैंडर के मछलियों संग बाहर आने में 12-14 घंटे लगे। दरअसल समुद्र में मछलियों को पकड़ने की शुरुआत तब हुई जब वैज्ञानिकों ने पानी के जरिए वहां उपस्थित लैंडर को ऐसा करने का संकेत दिया।