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बंदरों की भाषा पहचानने में लगे हैं वैज्ञानिक
एजेंसी/ लंदन
Updated Mon, 11 Jul 2016 07:38 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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वैज्ञानिक, सैद्धांतिक भाषा विज्ञान और फॉर्म के तरीकों का प्रयोग कर मंकी कॉल्स का अध्ययन कर रहे हैं। ऐसा वे नरवानर प्रजाति की भाषा को बेहतर तरीके से समझने के लिए कर रहे हैं। यह लंबे समय से ज्ञात है कि बंदर आपस में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए (मंकी कॉल्स) विशेष भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
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अब भाषा वैज्ञानिकों और नरवानर विशेषज्ञों की संयुक्त टीम अच्छी तरह से नरवानर भाषा को पहचानने में लगे हैं। शोधकर्ताओं ने बंदरों की भाषा पहचानने के लिए पहले बंदर आकृति विज्ञान (पुकारने की संरचना से संबंधित), वाक्य रचना (कैसे वाक्य रचनाओं में दृश्यों को साथ रखें) और शब्दों पर पकड़ (कैसे शब्दों और दृश्यों को साथ रखें) को देखा।
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नरवानर अध्ययन के अंतर्गत पिछले कई अध्ययनों द्वारा यह देखा गया। फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के फीलिप सेनकर ने कहा कि अब हम भाषा विज्ञान के सैद्धानिंक तरीकों का प्रयोग कर मंकी काल्स के फॉर्म और अर्थ का अध्ययन करेंगे।
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