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तकलीफ़ें बढ़ जाती है रिटायर होने से
BBC
Updated Sat, 18 May 2013 01:20 PM IST
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क्या आप भी सोचते हैं कि बस कुछ साल और काम करके पैसा जमा करना है और फिर रिटायर होकर आराम करना है। अगर हां तो ज़रा फिर से सोचिए।
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एक नए शोध से का दावा है कि रिटायरमेंट के मानसिक और शारीरिक सेहत पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
ब्रिटेन में आर्थिक मामलों के संस्थान (आईईए) में प्रकाशित एक शोध में पाया गया है कि रिटायरमेंट से मध्यम और दीर्घकाल में “सेहत में नाटकीय गिरावट” आती है।
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बदलें श्रम कानून
आईईए का कहना है कि लोगों को स्वास्थ्य और आर्थिक वजहों से ज़्यादा समय तक काम करना चाहिए।
सरकार पहले से ही राज्य द्वारा दी जाने वाली पेंशन की आयु बढ़ाने पर विचार कर रही है।
यह शोध एक धर्मार्थ संगठन एज इंडीवर फ़ेलोशिप के सहयोग से किया गया था.
इसमें रिटायर लोगों की तुलना उन लोगों से की गई जो रिटायरमेंट की आयु बीत जाने के बाद भी काम कर रहे थे। शोध के दौरान उलझाने वाले तथ्यों का ध्यान रखा गया था।
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आईईए के कार्यक्रम निदेशक फ़िलिप बूथ का कहना है कि सरकार को श्रम बाज़ार को नियंत्रण मुक्त करना चाहिए और लोगों को ज़्यादा उम्र तक काम करने की इजाज़त देनी चाहिए।
वह कहते हैं, “लंबे समय तक काम करना न सिर्फ़ आर्थिक ज़रूरत है बल्कि यह लोगों को स्वस्थ भी बनाए रखता है।
होता है सुधार भी
एज एंडीवर फ़ेलोशिप के अध्यक्ष एडवर्ड डैटनाओ कहते हैं, “भविष्य में रिटायरमेंट की कोई 'सामान्य उम्र' नहीं होनी चाहिए।”
वह कहते हैं, “ज़्यादा से ज़्यादा नियोक्ताओं को यह सोचना चाहिए कि वह वृद्धों के रूप में ब्रिटेन की अप्रयुक्त मानव क्षमता का कैसे लाभ उठा सकते हैं और जो रिटायरमेंट लेने की सोच रहे हैं उन्हें यह विचार करना चाहिए कि क्या उनके पास सबसे अच्छा विकल्प यही है।”
शोध के अनुसार रिटायरमेंट के तुरंत बाद सेहत में मामूली सुधार होता है लेकिन दीर्घकाल में सेहत में उल्लेखनीय गिरावट आती है।
रिटायरमेंट से नैदानिक अवसाद की आशंका 40% और शारीरिक दिक्कतों की आशंका 60% तक बढ़ जाती है।
महिला और पुरुषों पर इसका असर एक सा होता है और जितना समय रिटायरमेंट में बिताया जाता है इसके दुष्प्रभाव उतने ही बढ़ जाते हैं।