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ब्रिटेन के वीज़ा बॉन्ड प्रस्ताव का भारी विरोध
Updated Wed, 26 Jun 2013 03:48 PM IST
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भारत समेत छह देशों से ब्रिटेन जाने वाले लोगों से वीज़ा बॉन्ड के नाम पर बड़ी रक़म लेने के ब्रितानी प्रस्ताव पर लगभग सभी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
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भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई ने ब्रिटेन के इस प्रस्ताव को 'अनुचित और पक्षपातपूर्ण' क़रार दिया है। जबकि भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ यानी फ़िक्की ने एक बयान जारी कर कहा, ''इससे भारत और ब्रिटेन के बीच मज़बूत होते संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।''
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बांग्लादेश में भी इसको लेकर लोगों में काफ़ी नाराज़गी है। बांग्लादेश की सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन आम जनता में और ख़ासकर विद्यार्थियों और युवाओं में इसको लेकर काफ़ी रोष है।
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ढाका स्थित बीबीसी संवाददाता दिल अफ़रोज़ा के अनुसार छात्रों का कहना है कि बांग्लादेश को ज़्यादा जोख़िम वाले देश की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव बहुत ग़लत है और उसका कोई आधार नहीं है।
दिल अफ़रोज़ा के अनुसार ढाका में ज़्यादातर लोगों का मानना है कि ब्रितानी सरकार का ये प्रस्ताव अलग-अलग देशों के बीच भेदभाव बरतने जैसा है।
उधर नाइजीरिया ने इस प्रस्ताव की निंदा करते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन इस प्रस्ताव का पालन करता है तो नाइजीरिया भी ब्रितानी नागरिकों को वीज़ा देने के लिए भारी रक़म लेने पर विचार करेगा।
पिछले सप्ताह ब्रितानी मीडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक़ ब्रिटेन भारत समेत छह देशों को ज़्यादा जोख़िम वाले देश की श्रेणी में रखने पर विचार कर रहा है।
इन देशों से ब्रिटेन आने वाले लोगों को वीज़ा आवेदन के साथ बॉन्ड के रूप में बड़ी रक़म जमा करनी होगी।
समाचार पत्र संडे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया और घाना को ज़्यादा जोख़िम वाले देश की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है इन देशों से ब्रिटेन आने वाले लोगों के लिए नवंबर से शुरुआती परीक्षण के तौर पर ये योजना शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
इस प्रस्ताव के तहत 18 साल और उससे अधिक उम्र के सैलानियों को छह महीने के वीज़ा के लिए बॉन्ड के रूप में 3,000 पाउंड यानी कि लगभग ढाई लाख रुपए देने होंगे और अगर वे निर्धारित समय से अधिक ब्रिटेन में रहते हैं तो उनकी राशि ज़ब्त कर ली जाएगी।
'ब्रिटेन ने विचार नहीं किया है'
भारत ने मंगलवार को कहा कि भारतीयों से वीज़ा बॉन्ड के रूप में बड़ी राशि लिए जाने के प्रस्ताव पर अभी ब्रितानी सरकार ने विचार नहीं किया है। भारत के अनुसार ब्रिटेन ने उसे इस बारे में सूचना दी है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा की लंदन में ब्रिटेन के व्यापार, अनुसंधान तथा कौशल मामलों के मंत्री विंस केबल के साथ मुलाक़ात हुई।
मुलाक़ात के दौरान केबल ने यह जानकारी शर्मा को दी।
भारत ने मंगलवार को दिल्ली में एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, ''केबल ने भारतीय मंत्री को सूचित किया है कि उन्होंने ब्रिटेन के गृहमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है। गृहमंत्री ने आश्वस्त किया है कि यह एक प्रस्ताव है जिस पर ब्रितानी सरकार ने अभी कोई विचार नहीं किया है।''
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी मंगलवार को कहा कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग से प्रस्तावित योजना के बारे में और ब्यौरा हासिल करने को कहा गया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने मंगलवार को कहा, ''मंत्रालय ने लंदन में हमारे मिशन से उस संभावित नई योजना के बारे में आई ख़बरों का आधिकारिक ब्यौरा मांगा है जिसे ब्रिटेन लागू करने के लिए प्रयासरत है और जिससे उस देश में जाने वाले भारतीयों को दिक़्क़त हो सकती है।''
उन्होंने यह भी कहा कि ब्यौरा मिलने के बाद मंत्रालय योजना के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगा।
अकबरुद्दीन ने कहा कि यह मुद्दा उठाने के लिए भारत-ब्रितानी वाणिज्य दूतों के बीच बातचीत उचित मंच होगा।
यह बातचीत जुलाई महीने में लंदन में होने वाली है।