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प्रोसेस्ड मीट: 'अकाल मौत' का कारण

Sun, 10 Mar 2013 06:38 PM IST
Updated Sun, 10 Mar 2013 06:38 PM IST
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processed meat

यदि आप सॉस, हैम, बेकन और पैकेज्ड मीट के शौकीन हैं, तो ये आपके लिए समय से पूर्व होने वाली मौत का कारण बन सकता है।

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पूरे यूरोप में डेढ़ लाख लोगों पर किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है। यह अध्ययन करीब 10 देशों में 13 साल तक चला है।

इस अध्ययन के नतीजों में आया है कि ज्यादा प्रोसेस्ड या प्रसंस्कृत मांस ह्रदय रोग, कैंसर और जल्दी होने वाली मौत के कारण बनते हैं।

बीएमसी मेडिसीन पत्रिका के एक लेख में, शोधकर्ताओं ने लिखा है, “मांस को संरक्षित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नमक और रसायनों से सेहत को भारी खतरा पैदा हो सकता है।”

जीवन शैली से जुड़े कारक
अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग प्रोसेस्ड मांस खाने के ज्यादा शौकीन हैं उनमें धूम्रपान की ओर रुझान भ ज्यादा होता है।

साथ ही उनमें मोटापे से ग्रस्त होने की ज्यादा संभावना पाई गई, और वे सेहत को हानि पहुंचाने वाले कई और आदतों के भी शिकार पाए गए।

इस अध्ययन में पता चला कि हर दिन 160 ग्राम प्रसंस्कृत मांस या ज्यादा खाने वालों में 20 ग्राम प्रसंस्कृत मांस खाने वालों के मुकाबले सेहत का खतरा 44 फीसदी ज्यादा है।
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उन्होंने बताया कि यदि इस अध्ययन में शामिल प्रत्येक शख्स एक दिन में 20 ग्राम से कम मांस का उपभोग करता तो असमय होने वाली 3 फीसदी मौतों से बचा जा सकता था।
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सेहत लाभ
ज्यूरिख विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सबिना रहमान ने बीबीसी को बताया कि मांस का खासकर प्रसंस्कृत मांस का ज्यादा उपभोग वैसे लोग करते हैं जिनकी जीवनशैली बहुत उतार-चढ़ाव वाली होती है।

वैसे अध्ययन में मांस का, यहां तक कि प्रसंस्कृत मांस का, एक टुकड़ा सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है। ब्रिटिश आहार संस्था की उरसुला आरेन्स ने बीबीसी रेडियो4 के एक कार्यक्रम को बताया कि अच्छी क्वालिटी का हैम या सॉसेज भी प्रसंस्कृत मांस की श्रेणी में आता है, जबकि ताजे मांस से घर का बनाया हुआ बर्गर इस श्रेणी में नहीं आता।

एक कंसलटेंट सर्जन और मीट सलाहकार पैनल की सदस्य मिस रोजर लीसेस्टर ने बताया कि मांस को कैसे प्रसंस्कृत करें, इस पर ध्यान दिया जाना भी जरूरी है, “हमें ध्यान देना चाहिए कि किस तरह के प्रिजर्वेटिव, नमक और मांस का इस्तेमाल किया गया है।”

बढ़ते प्रमाण
विश्व कैंसर अनुसंधान कोष की डॉ राचेल थॉम्पसन कहती है कि हमारा शोध 2007 में शुरु हुआ और 2011 में इसकी पुष्टि की गई। इसमें दिखाया गया है कि बेकन, हैम, हॉट डॉग, सलामी और कुछ सॉस जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ आंतों के कैंसर के होने का खतरा बढा देते हैं।

ट्रैकी पार्कर, एक ह्रदय स्वास्थ्य आहार विशेषज्ञ बताते हैं कि शोध के अनुसार प्रसंस्कृत मांस बढती हुई अकाल मौतों से सीधा जुड़ा हुआ है मगर जो इसका सेवन ज्यादा करते हैं उनमें “दूसरे नुकसानदेह जीवनशैली के विकल्प” विकसित होने लगते हैं।


वो कहते हैं, “यदि आप प्रसंस्कृत क्लिक करें मांस अधिक मात्रा में खाते हैं, तो कोशिश कीजिए कि मुर्गा, मछली, बीन्स या दालों जैसे अन्य प्रोटीन प्रचुर भोजन के विकल्पों को ज्यादा से ज्यादा अपने आहार में शामिल करें।”


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