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कॉमनवेल्थ देशों के नए मुखिया बने ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स, सभी नेताओं ने दी मंजूरी

Sat, 21 Apr 2018 01:39 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 21 Apr 2018 01:39 PM IST
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prince charles is a new head of commonwealth after queen elizabeth

राष्ट्रमंडल के अगले प्रमुख के रूप में प्रिंस चार्ल्स को सभी नेताओं की मंजूरी मिल गई है। 69 वर्षीय प्रिंस चार्ल्स 53 सदस्यीय राष्ट्रमंडल के अगले प्रमुख होंगे। ऐसा माना जा रहा है कि यह निर्णय राष्ट्रमंडल की प्रमुख महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के घर वाटरलू चैंबर में हुए रिट्रीट में लिया गया। 

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गुरुवार को हुई कॉमनवेल्थ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। इस समिट में 53 देशों में से 46 के हेड ऑफ स्टेट मौजूद थे। 2009 के बाद मोदी भारत के ऐसे पहले पीएम हैं जिन्होंने समिट में हिस्सा लिया। वहां उनका प्रधानमंत्री टेरिजा में और कॉमनवेल्थ की महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने स्वागत किया। 
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बकिंघम पैलेस में आयोजित इस समिट की शुरूआत करते हुए महारानी एलिजाबेथ द्वितीय बोलीं, 'मैं सभी नेताओं का अपने घर में स्वागत करती हूं।' महारानी ने सभी प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स को उनका उत्तराधिकारी चुना जाए। ताकि वह उनके (महारानी) के पिता द्वारा शुरु किए गए इस महत्वपूर्ण काम को संभाल सकें। शनिवार को 92 वर्ष की हुईं महारानी के पिता किंग जियोर्ज छटवें की मृत्यु साल 1952 में हुई थी। तब से वह इस राष्ट्रमंडल की प्रमुख हैं।  
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समिट से पहले बकिंघम पैलेस में 53 तोपों की सलामी दी गई थी यानि एक देश के लिए एक तोप। वहीं पीएम मोदी पहली बार इस समिट में मौजूद हुए थे। यह समिट दुनिया के एक तिहाई आबादी का नेतृत्व करने वाले 53 देशों के नेताओं को एक मंच उपलब्ध कराता है। जहां उनके बीच विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत होती है।   


बता दें कॉमनवेल्थ 53 देशों का एक समूह है। जिसके सदस्य देशों की आबादी लगभग 2 अरब 40 करोड़ है। इस समूह में वह देश शामिल हैं जो आजादी से पहले ब्रिटेन के अधीन रह चुके हैं। हालांकि इतने सालों में अफ्रीका, अमेरिका, एशिया, यूरोप और प्रशांत के अनेक देश भी इसमें सम्मिलित हुए। इससे जुड़ने वाले आखिरी दो देश रवांडा और मोजांबिक हैं। सीएचओजीएम इन्हीं देशों के बीच होने वाली चर्चा का एक मंच है। हर दो साल बाद होने वाली ये मीटिंग हर बार अलग अलग देशों में होती है। इस बार ब्रिटेन ने इसकी आगवानी की थी। 

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