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आखिरकार आ ही गया पोप का ट्वीट!

Wed, 12 Dec 2012 09:59 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Wed, 12 Dec 2012 09:59 PM IST
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pope Benedict sends first personal tweet

लंबे समय से रोमन कैथलिक ईसाईयों के धर्मगुरू पोप बेनेडिक्ट सोलहवें के ट्वीट का इंतजार हो रहा था। दुनिया भर में अपने समर्थकों की भावनाओं को समझते हुए आखिरकार पोप ने ट्विटर पर अपना संदेश लिख दिया है।

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पोप ने ट्विटर एकाउंट @pontifex पर अपने पहले संदेश में कहा है, “प्यारे दोस्तों, मैं आप लोगों के साथ ट्विटर के जरिए जुड़कर काफी प्रसन्न हूं। आप लोगों की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। मैं तहे दिल से आप सबके भले के लिए प्रार्थना कर रहा हूं।”
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पोप के प्रवक्ता ने पहले कहा था कि पोप ट्विटर ख़ाते के जरिए एक साथ आठ भाषाओं में लोगों से सीधे जुड़ेंगे। पोप के अंग्रेजी ट्विटर खाते के छह लाख साठ हजार से ज्यादा फॉलोअर हैं। अब दूसरी भाषाओं के एकाउंट के फॉलोअरों की संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। पोप का ट्विटर एकाउंट अरबी, फ्रेंच, जर्मन, इटालियन, पोलिश, पुर्तगाली और स्पेनिश भाषाओं में भी है।
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कहानी के साथ लगी तस्वीर में भी आप पोप को आई पैड टेबलेट का बटन दबाते देख रहे हैं। बीते साल, पोप ने अपना पहला ट्विट किया था, लेकिन उन्होंने वह ट्विट वेटिकन सिटी के एकाउंट से किया था। जिसमें वेटिकन शहर के सूचना पोर्टल के शुरू होने की जानकारी थी। पोप दुनिया भर के 1।2 अरब रोमन कैथोलिकों के धार्मिक गुरू हैं।

अब उम्मीद की जा रही है कि दुनिया भर के घटनाक्रम पर अपनी राय के अलावा साप्ताहिक संदेश और चर्च में छुट्टियों के दिन दिए जाने वाले संदेशों के बारे में भी पोप ट्विट करेंगे। संचार की नई तकनीकों के इस्तेमाल में वेटिकन सिटी की हमेशा से दिलचस्पी रही है। इसकी शुरुआत 1931 में हुई तब रेडियो के आविष्कारक मार्कोनी ने वेटिकन रेडियो की स्थापना की थी।

कैथलिक चर्च युवा पीढ़ी से संपर्क करने के लिए पहले से ही कई दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें एसएमएस संदेश और यू ट्यूब का उपयोग शामिल है। वैसे पोप के नजदीकी सहयोगियों का कहना है कि पोप 'की बोर्ड' की बजाए हाथ से लिखना पसंद करते हैं। पोप छह साल से ईसाईयों के धार्मिक गुरु हैं और इस दौरान लोगों से संपर्क करने के मामले में उन्हें कमजोर आंका गया है।


कई मुद्दों पर वे अपनी बात स्पष्टता से नहीं रख पाए हैं। मसलन, 2005 के भाषण जिसमें इस्लाम और हिंसा का मुद्दा रहा हो, या फिर कंडोम और एचआईवी पर उनकी राय से जुड़ा मुद्दा हो। माना जाता है कि कभी भी उनका स्पष्टीकरण दमदार नहीं रहा।

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