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ताकतवर सीईओ से कम नहीं होते हैं पोप

Thu, 14 Mar 2013 04:29 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 14 Mar 2013 04:29 PM IST
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pope are not less powerful than ceos

लातिन अमेरिकी देश अर्जेटीना के आर्च बिशप खोर्खे मारियो बैरगोगलियो रोमन कैथोलिक चर्च के नए मुखिया होंगे। वे यूरोप से बाहर के पहले धर्म गुरु हैं जो पोप बने हैं।

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वैसे तो पोप रोमन कैथोलिक ईसाई के धर्म गुरू होते हैं लेकिन अब उनकी भूमिका को नए सिरे से देखा जा रहा है।

कुछ कार्डिनलों की राय है कि पोप धर्म गुरू तो हों ही, साथ ही उनमें प्रबंधकीय कौशल भी हो, यानी उन्हें सीईओ की तरह कामकाज करने आना चाहिए।

कैथोलिक चर्च का इतिहास करीब 2000 साल पुराना है और मौजूदा समय में इसके 1।2 अरब सदस्य हैं और इरादा पूरी दुनिया तक पहुंचने का है।

चर्च मुख्यालय वाकई में एक धार्मिक संस्था ही है, यहां लोग पूजा प्रार्थना करने एकत्रित होते हैं। लेकिन इसकी भूमिका बस इतनी नहीं है।

यह दुनिया भर में सामाजिक सहायता के कार्यक्रमों को संचालित करती है। इसके अलावा शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवा के कार्यक्रमों का संचालन करती है।

चर्च दुनिया भर के तमाम अनुसंधान संस्थाओं और थिंक टैंक संगठनों की मदद भी करती है।

ख़ास है चर्च मुख्यालय
इसके अलावा भी चर्च के मुख्यालय की अपनी खासियतें भी हैं। मसलन चर्च का मुख्यालय अपने आप में एक देश है, इसकी अपनी सीमा है, इसका अपना प्रशासनिक अमला है, न्यायालय है, न्यायाधीश हैं, वित्तीय संस्थाएं हैं और राष्ट्राध्यक्ष भी एकदम अपना।
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यही वजह है कि वेटिकन सिटी की अपनी मुद्रा है, अपना डाक टिकट है, अपनी नागरिकता है। वेटिकन सिटी अपने नागरिकों के लिए पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी करता है।
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वेटिकन सिटी का दुनिया भर के 179 देशों में दूतावास और राजनयिक मिशन हैं।

इन सबकी देखरेख की जिम्मेदारी पोप को ही निभानी होती है।

पोप के चुनाव में इस बात का भी ख़ास ख्याल रखा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मान्यता नैतिक मूल्यों वाले धर्म गुरू की होनी चाहिए।

पोप की जिम्मेदारी
पोप को दुनिया भर में फैली चर्च की तमाम संस्थाओं की कार्यकारी जिम्मेदारियों को निभाना होता है। एक देश के तौर पर वेटिकन सिटी की जिम्मेदारी भी संभालनी होती है।

इन सबके साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत में भी शामिल होना पड़ता है।

उन्हें संयुक्त राष्ट्र के अंदर वेटिकन सिटी के मुखिया के तौर पर संबोधन भी करना होता है।

जलवायु परिवर्तन, हथियारों की तस्करी, मानव तस्करी, बौद्धिक संपदा, सीमा विवाद और शांति वर्ताओं जैसे अहम मसलों पर भी उन्हें अपनी राय रखनी होती है।

हाल के दिनों में ये बात भी साफ हुई है कि धार्मिक संस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने के दौरान आपको समकालीन प्रबंधन के सिद्धांतों को अपनाना पड़ता है।

धर्म गुरुओं ने हाल के दिनों में इस पहलू पर जोर दिया है कि चर्च मुख्यालय का काम तीन स्तरों में विभाजित होना चाहिए। ये तीन स्तर हैं- प्रशासन, शिक्षण और पवित्रता।

वैसे भी चर्च को एक पब्लिक कॉरपोरेशन के तौर पर देखा जा सकता है। धर्म के विधान और नागरिक कानून दोनों के तहत चर्च को कारपोरेशन के तौर पर मान्यता देती है।

ताकतवर सीईओ
ऐसे में इसके मुखिया की जिम्मेदारी एक एक्जीक्यूटिव से कम नहीं होती, जिसके पास न्यायापालिका और विधायिका से जुडे़ अधिकार भी होते हैं।

इस लिहाज से देखें तो पोप वाकई में एक कॉरपोरेशन के मुखिया होते हैं और उनकी हैसियत दुनिया के किसी भी सीईओ से ज्यादा होती है।

हालांकि उन्हें निदेशकों के एक बोर्ड के प्रति जवाबदेह होना होता है। इस बोर्ड के सदस्य होते हैं- ईश्वर, जीसस और खुद पोप।

यही वजह है कि बेनेडिक्ट ने प्रार्थना, जो बोर्ड के निदेशकों के साथ सलाह मशिवरा जैसा ही था, के बाद अपना पद त्यागने का फ़ैसला लिया।

पद त्यागने के बाद उन्होंने कॉरपोरेशन के सदस्यों को भरोसा दिलाया कि आप जीसस के साए में हो, मैं आपको अधर में छोड़कर नहीं जा रहा हूं।

अदृश्य निदेशकों वाले बोर्ड और एकदम स्वतंत्र सीईओ के चलते चर्च एक पुरानी परंपरा के अधीन काम करने वाला कॉरपोरेट भले नजर आता हो लेकिन इसमें शासन के आधुनिकतम पहलुओं का मिश्रण शामिल है।

बदलाव की जरूरत

इस कॉरपोरेट के तहत एक अरब से ज्यादा शेयर होल्डर जुड़े हुए हैं। ये शेयर होल्डर पोप की संस्था, मिशन, वित्तीय स्थिति, ग्रोथ और भविष्य की योजना के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।

बेनेडिक्ट ने अपने त्यागपत्र के बारे में सिर्फ ईश्वर को बताया और उसके बाद इन सभी शेयर होल्डरों को अपने फ़ैसले के बारे में बताया।

बहरहाल, इन सबके बीच ये उम्मीद की जा रही है कि नए पोप वेटिकन सिटी में काम करने वाले धार्मिक अधिकारियों के बीच सूचना और संवाद की प्रक्रिया को बेहतर बनाएंगे।


इसके लिए आंतरिक और बाहरी तौर पर कहीं ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है। कई कार्डिनलों का मानना है कि नए पोप इसके लिए वेटिकल सिटी के प्रशासन में प्रबंधकीय बदलाव कर सकते हैं।

(रेवरेंड रॉबर्ट घल पॉंटिफ़िशयल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हॉली क्रॉस, रोम में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और कैथोलिक चर्च आपस डी ऑर्गेनाइज़ेशन के सदस्य हैं)

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