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ब्रेग्जिटः ब्रिटेन में 10 लाख ने दोबारा की जनमत संग्रह कराने की मांग, संसद में होगी चर्चा

Sun, 26 Jun 2016 05:33 AM IST
एजेंसी/ लंदन
एजेंसी/ लंदन Updated Sun, 26 Jun 2016 05:33 AM IST
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Over 1 mln sign petition demanding 2nd Brexit referendum in UK
EU referendum, - फोटो : Reuters

यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने को लेकर दोबारा से जनमत संग्रह कराने की मांग उठी है। ब्रिटेन में 10 लाख से ज्यादा लोगों ने एक याचिका में हस्ताक्षर कर ईयू की सदस्यता को लेकर दोबारा से जनमत संग्रह कराने की मांग की। ब्रेग्जिट के बाद सदमे में आए लोगों ने यह मांग उठाई है। अब इस याचिका पर ब्रिटिश संसद में चर्चा होगी। इस संसदीय याचिका में एक लाख से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए, जिसके चलते इस पर हाउस ऑफ कॉमंस में बहस कराना जरूरी हो गया है।

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दरअसल, बृहस्पतिवार को ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के पक्ष में 52 फीसदी जनता ने मतदान किया था, जबकि 48 फीसदी लोगों ने ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। इसमें ज्यादातर मतदाता लंदन, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड से थे, जहां 72 फीसदी लोगों ने ब्रिटेन के ईयू में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था। शनिवार सुबह तक 10 लाख से ज्यादा लोग ईयू में ब्रिटेन के बने रहने की मांग वाली याचिका का समर्थन कर चुके  थे, जिसमें ज्यादातर लोग लंदन, ब्राइटन, ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज और मैनचेस्टर से हैं।
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इस याचिका की शुरुआत विलियम ओलिवर हीले ने की। इसमें मांग की गई कि ब्रिटिश सरकार ऐसा कानून लागू करे कि ब्रिटेन के ईयू छोड़ने या उसमें बने रहने के पक्ष में 60 फीसदी से कम मतदान होता है, तो दोबारा से जनमत संग्रह कराया जाए। साथ ही इसमें कम से कम 75 फीसदी मतदाता हिस्सा लें। वहीं, लोगों की भीड़ के चलते दोबारा से जनमत संग्रह कराने की मांग वाली इस संसदीय याचिका की वेबसाइट एक दफा क्रैश तक हो गई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अगर याचिका के मुताबिक कानूनों में बदलाव कर दिया जाता है और इसे लागू कर दिया जाता है, तो इसका पिछली तारीखों से कोई फर्क पड़ेगा या नहीं।
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स्कॉटलैंड की आजादी को भी दोबारा से जनमत संग्रह
स्कॉटलैंड की आजादी को लेकर दोबारा से जनमत संग्रह होने की संभावना काफी बढ़ गई है। स्कॉटलैंड की आजादी की मांग को लेकर 2014 में हुए जनमत संग्रह के बाद भी ऐसी ही मांग उठी थी। इस जनमत संग्रह में स्कॉटलैंड की आजादी के पक्ष में सिर्फ 45 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टुर्जन ने कहा कि ब्रिटेन के ईयू छोड़ने को लेकर दोबारा जनमत संग्रह होने की दशा में स्कॉटलैंड की आजादी को लेकर भी दोबारा से जनमत संग्रह होने की संभावना काफी बढ़ गई है। 

लंदन की आजादी को लेकर याचिका
लंदन की आजादी को लेकर इसी तरह की याचिका शुरू की गई, जिसमें भी हजारों लोगों ने हस्ताक्षर किए। इसमें लंदन के मेयर सादिक खान से ब्रिटेन की राजधानी को स्वतंत्र राज्य घोषित करने की मांग की गई है। याचिका को शुरू करने वाले जेम्स ओमाले ने कहा कि लंदन एक वैश्विक शहर है, जिसको यूरोप के दिल में होना चाहिए।

ईयू के सदस्य देशों ने कहा, जल्द अलग हो ब्रिटेन

Over 1 mln sign petition demanding 2nd Brexit referendum in UK

ईयू के नेताओं ने शनिवार को ब्रिटेन पर यूरोपीय संघ से जल्द से जल्द बाहर होने का दबाव बनाया। ब्रेग्जिट नतीजे आने के बाद यूरोपीय संघ के संस्थापक सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने बर्लिन में मौजूदा संकट पर बैठक की। इन नेताओं ने आगाह किया कि ब्रिटेन को लेकर वे ज्यादा समय तक अधर में नहीं रह सकते और यह अलगाव मैत्रीपूर्ण नहीं होगा।

लंदन को जितना जल्दी हो सके ईयू से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-मार्क अरॉल्ट ने कैमरन से नए ब्रिटिश पीएम के लिए ईयू से अलग होने की राह आसान बनाने को कहा है। छह दशक के इतिहास में पहली बार ईयू से कोई देश अलग होगा। ईयू के प्रमुख जीन-क्लॉड जंकर ने लंदन को आगाह किया कि उसने दुर्भाग्यपूर्ण विकल्प को चुना है।

यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन शुल्ज ने कैमरन के अक्तूबर तक इस्तीफा देने के फैसले की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि कैमरन पूरे यूरोपीय महाद्वीप को बंधक जैसी स्थिति में रखना चाहते हैं। उधर, ईयू में ब्रिटेन के सबसे वरिष्ठ राजनयिक एवं ईयू कमिश्नर जोनाथन हिल ने पद से हटने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ उसे पूर्ववत नहीं किया जा सकता।

ब्रेग्जिट ब्रिटेन के उच्च वर्ग के खिलाफ चेतावनी

Over 1 mln sign petition demanding 2nd Brexit referendum in UK

ग्जिट को ब्रिटेन के उच्च वर्ग के खिलाफ कड़ी चेतावनी माना जा रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने के पक्ष में वहां की गरीब और कम शिक्षित जनता ने मतदान किया। अमेरिका, जर्मनी और विएना के विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन की गरीब और कम शिक्षित जनता का ईयू से अलग होने के पक्ष में मतदान उच्च वर्ग के खिलाफ साफ चेतावनी है।

ब्रिटेन के गरीब एवं कम शिक्षित वर्ग में नई वैश्विक व्यवस्था में आर्थिक लाभ की हिस्सेदारी नहीं होने से भारी आक्रोश है। ऐसी स्थित अमेरिका में भी है, जिसका फायदा रिपब्लिकन पार्टी के संभावित उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईयू से ब्रिटेन के अलग होने का फैसला वास्तव में वहां की गरीब और कम शिक्षित जनता का ही है। आर्थिक संकट के दौर में सबसे ज्यादा बुरा असर ब्रिटेन की गरीब एवं कम शिक्षित वर्ग पर ही पड़ता है। इसके अलावा अप्रवासियों की संख्या में तेजी से इजाफा से भी यह वर्ग बेहद भयभीत है। इसे वे अपने अनिश्चित आर्थिक अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे हैं।

अमेरिका के ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के वरिष्ठ शोधकर्ता विलियम गाल्सटन का कहना है कि दुनिया भर में गरीब एवं कम शिक्षित वर्ग में उच्च वर्ग के खिलाफ आक्रोश दिख रहा है।

उनका कहना है कि अमेरिका में गरीब एवं कम शिक्षित जनता की वजह से डोनाल्ड ट्रंप का वर्चस्व बढ़ रहा है, जो उच्च वर्ग के खिलाफ असंतोष को दर्शाता है। ब्रिटेन के बाद अब यूरोपीय संघ के अन्य देशों की गरीब एवं कम शिक्षित जनता भी सिर उठाने लगी है। 

Published By Rahul Sankrityayan

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