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घोड़े के सात लाख साल पुराने डीएनए मिले

Mon, 01 Jul 2013 12:12 PM IST
Updated Mon, 01 Jul 2013 12:12 PM IST
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oldest horse dna sequence

सात लाख वर्ष पुराने अस्थि जीवाश्म से आधुनिक नस्ल के घोड़ों के एक अति-प्राचीन पूर्वज का जीनोम प्राप्त हुआ है।

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प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार इस जीनोम में अब तक का सबसे पुराना डीएनए अनुक्रम मिला है।

यह डीएनए अनुक्रम पहले ज्ञात सभी डीएनए अनुक्रमों से पाँच लाख वर्ष से भी ज़्यादा पुराना है।

नेचर पत्रिका में प्रकाशित यह शोध इसलिए संभव हो सका क्योंकि घोड़े जैसे इस जीव की मृत्यु के बाद इसकी अस्थियाँ कनाडा के स्थायी-हिम में सुरक्षित हो गई थीं।

इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि घोड़ों की प्रजाति चार लाख वर्ष पहले भी मौजूद थी।

प्राचीन घोड़े की लम्बी हड्डी का यह अवशेष कनाड़ा स्थित पश्चिम-मध्य यूकोन इलाके के थिसल क्रीक में मिला है।

जीवाश्म वैज्ञानिकों का अनुमाह है कि यह घोड़े इस क्षेत्र में करीब पाँच से सात लाख वर्ष पहले पाए जाते थे।

इस अस्थि के विश्लेषण से पता चला है हिमनदों के बाच के गर्म अवधि के दौरान गलन के बावजूद भी इसमें जोड़ेने वाले ऊतक और ख़ून जमाने वाले प्रोटीन जैसे जैविक तत्व बचे रह गए। आमतौर पर इतने पुराने जीवाश्मों में ऐसे जैविक तत्व नहीं बचते।
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डीएनए की पहेली


इस शोध-पत्र के लेखकों में एक कोपेनहेगेन विश्वविद्यालय के डॉ. लुडोविक ऑरलैंडो ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के साइंस इन एक्शन प्रोग्राम में बताया कि “यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है। हम सचमुच ही बहुत खुश थे क्योंकि यह जीवाश्म बहुत ही अच्छे ढंग से संरक्षित था।”
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“हमने सोचा कि हम इसका डीएनए निकाल के देखते हैं कि हम इस जीनोम के चरित्र को कहाँ तक जान पाते हैं।”

कई देशों के वैज्ञानिकों वाली इस शोध-टीम ने इस हड्डी के एक टुकड़े को चूर-चूर करके इस अति-प्राचीन घोड़े का डीएनए का अनुक्रम और मानचित्र प्राप्त किया।

पहले प्रयास में वैज्ञानिक को ख़ास सफलता नहीं मिली थी। फिर उन्होंने डीएनए के एक अणु को चुना और एक विशेष अत्याधुनिक तकनीकी के सहारे से उसका अध्ययन किया।

इस तकनीक के प्रयोग से काफी लाभ मिला और इससे प्रचुर मात्रा में आंकड़े मिले।

इन आंकड़ों की गणना के लिए वैज्ञानिकों ने उच्च क्षमता वाले कम्प्यूटर की सहायता ली। उन्होंने एक जीवित घोड़े के जीनोम अनुक्रम को संदर्भ के रूप में प्रयोग किया।


इस अति-प्राचीन घोड़े के डीएनए के नमूने में जीवाणु इत्यादि जैसे संक्रमणकारी जीवों के डीएनए के आपस में मिल जाने की वजह से वैज्ञानिकों के 12 अरब डीएनए अनुक्रमों का अध्ययन करना पड़ा।

फिर इस श्रमसाध्य प्रक्रिया से मिले डीएनए अंश की सहायता से इसके जीनोम की मानचित्र बनाया गया।

अब तक सम्पूर्ण जीनोम के 70 प्रतिशत भाग का ही मानचित्र बनाया जा सका है जो अर्थपूर्ण विश्लेषण के लिए पर्याप्त था।

थिसल क्रीक में प्राप्त इस अस्थि में वाई क्रोमोजोम की उपस्थिति से यह भी स्पष्ट हुआ कि यह किसी नर घोड़े की अस्थि है।

इस डीएनए अध्ययन से घोड़ों और जेब्राओं की प्रजाति के विकासक्रम का इतिहास जानने में भी वैज्ञानिकों को सहायता मिली है।

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