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नार्वे: गिरफ्तार भारतीय दंपति पर फैसला आज

Mon, 03 Dec 2012 09:53 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Mon, 03 Dec 2012 09:53 AM IST
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norway child row court to pronounce verdict today

नार्वे में अपने बच्चे के साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने वाले भारतीय दंपति की गिरफ्तारी के मामले में अदालत सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी।

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भारतीय दंपति चंद्रशेखर वल्लभनेनी और उनकी पत्नी अनुपमा को अपने बेटे के साथ लगातार दुर्व्यवहार करने, उसे धमकाने और उसके साथ हिंसक बर्ताव करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
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हालांकि चंद्रशेखर वल्लभनेनी के परिवार का कहना है कि चंद्रशेखर और अनुपमा ने अपने सात वर्षीय बेटे को अनुशासित करने के लिए डांटा था। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर वी चंद्रशेखर टीसीएस कंपनी के लिए काम करते हैं।
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अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में बच्चे की मां अनुपमा को 15 और उसके पिता चंद्रशेखर को 18 महीने की कैद होनी चाहिए।

मामला सामने आने के बाद हैदराबाद में चंद्रशेखर के भतीजे वी शैलेंद्र ने बताया था कि बच्चे ने अपनी क्लास टीचर से कहा था कि उसके माता पिता उसे भारत भेजने की धमकी दे रहे हैं। इसके नौ महीने बाद चंद्रशेखर और उनकी पत्नी की गिरफ्तार किया गया है।

क्यों बेटे को डांटा
समाचार एसेंजी पीटीआई के मुताबिक शैलेंद्र ने बताया कि बच्चे को स्कूल बस में पेशाब करते हुए पाया। जब इसकी चंद्रशेखर के पास पहुंची तो उन्होंने अपने बेटे से कहा कि अगर उसने दोबारा ऐसा किया तो उसे भारत भेज दिया जाएगा। शैलेंद्र के अनुसार बच्चा स्कूल से खिलौने घर भी लाता था।

उन्होंने कहा, “शुरू में मेरे चाचाजी को नहीं पता था कि उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जुलाई में हैदराबाद आए थे और अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में वापस ओस्लो लौट गए। फिर उन्हें पत्नी के साथ अधिकारियों के सामने हाजिर होने का नोटिस मिला।”

शैलेंद्र के अनुसार वो भी इस बारे में ज्यादा जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। बच्चे को फरवरी में कुछ दिन के लिए नॉर्वे के बाल संरक्षण अधिकारियों की निगरानी में रखा गया ताकि उसके व्यवहार का अध्ययन किया जा सके।


चंद्रशेखर के भतीजे ने बताया कि बाद में बच्चे को सामान्य पाया गया और उसके माता पिता को सौंप दिया गया।
पिछला मामला इससे पहले भी नॉर्वे के बाल संरक्षण एक भारतीय दंपति के बच्चों को अपने पास रख चुके हैं।

अरुप और सागरिका भट्टाचार्य के दो बच्चों को नॉर्वे के अधिकारियों ने इसलिए अपने संरक्षण में रखा क्योंकि उनके माता पिता उन्हें हाथ से खाना खिलाते थे और अपने ही बिस्तर साथ सुलाते थे।

पिछले साल इन बच्चों को उनके माता पिता से ले लिया गया था। बाद में इस मुद्दे ने भारत और नॉर्वे के बीच राजयनिक तनाव का रूप भी ले लिया था। काफी समय बाद बच्चे अपने माता पिता से मिल पाए।

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