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इस साल नहीं दिया जाएगा साहित्य का नोबेल पुरस्कार, 75 साल बाद पहली बार होगा ऐसा
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, स्टाकहोम
Updated Fri, 04 May 2018 05:05 PM IST
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Nobel prize
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साहित्य में नोबेल पुरस्कार देने वाले स्वीडिश पैनल ने शुक्रवार को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कहा कि वह इस साल किसी को यह अवार्ड नहीं देने जा रहा है। उसने कहा कि ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि लेखकों की कमी है बल्कि इसलिए क्योंकि यौन उत्पीड़न को लेकर लोगों के गुस्से के चलते संस्था उलझी हुई है। अकादमी के स्थायी सचिव एंडर्स ओल्सन ने कहा, हमने पाया है कि अगले साहित्यकार के नाम की घोषणा से पहले जनता का भरोसा जीतने के लिए समय देने की जरूरत है।
स्वीडिश अकादमी ने कहा कि 2018 का यह अवार्ड अगले साल तक के लिए स्थगित किया जाएगा और 2019 में दो विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका होगा जब पैनल ने दुनिया का यह सबसे सम्मानित सांस्कृतिक पुरस्कार नहीं देने का फैसला लिया है। चूंकि यह अकादमी सिर्फ साहित्य पुरस्कारों में शामिल है इसलिए इस फैसले का असर अन्य नोबेल पुरस्कारों पर नहीं पड़ेगा। अकादमी के कुछ सदस्य पुरस्कार को लेकर चिंतित हैं और वे इसके लिए मौजूदा स्थिति को अनुकूल नहीं बता रहे हैं।
दरअसल, फ्रांसीसी फोटोग्राफर जीन क्लाउड अरनॉल्ट के कथित यौन दुराचार को लेकर स्वीडिश अकादमी आलोचनाओं के घेरे में हैं। पिछले साल नवंबर में 18 महिलाओं ने हैश मी-टू आंदोलन द्वारा अरनॉल्ट पर यौन उत्पीडन के आरोप लगाए थे। अकादमी की परिसंपत्तियों को लेकर भी उन पर कई आरोप हैं। हालांकि अरनॉल्ट ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन इन विवादों के चलते बीते कुछ माह में स्वीडिश अकादमी के 18 में से छह सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं।
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हैश मी-टू आंदोलन के चलते सामने आया सैक्स स्कैंडल
पिछले साल नवंबर में हैश टैग मी-टू आंदोलन के चलते यह पूरा मामला सामने आया। फ्रांसीसी फोटोग्राफर क्लाउड अरनॉल्ट पर 18 महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह बात आग की तरह फैल गई। इसके बाद अवार्ड देने वाली 18 सदस्यों की संस्था ने अरनॉल्ट की पत्नी और संस्था की सदस्य कैटरीना को समिति से निकालने के लिए मतदान किया।
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स्वीडिश अकादमी ने कहा कि 2018 का यह अवार्ड अगले साल तक के लिए स्थगित किया जाएगा और 2019 में दो विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यह पहला मौका होगा जब पैनल ने दुनिया का यह सबसे सम्मानित सांस्कृतिक पुरस्कार नहीं देने का फैसला लिया है। चूंकि यह अकादमी सिर्फ साहित्य पुरस्कारों में शामिल है इसलिए इस फैसले का असर अन्य नोबेल पुरस्कारों पर नहीं पड़ेगा। अकादमी के कुछ सदस्य पुरस्कार को लेकर चिंतित हैं और वे इसके लिए मौजूदा स्थिति को अनुकूल नहीं बता रहे हैं।
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दरअसल, फ्रांसीसी फोटोग्राफर जीन क्लाउड अरनॉल्ट के कथित यौन दुराचार को लेकर स्वीडिश अकादमी आलोचनाओं के घेरे में हैं। पिछले साल नवंबर में 18 महिलाओं ने हैश मी-टू आंदोलन द्वारा अरनॉल्ट पर यौन उत्पीडन के आरोप लगाए थे। अकादमी की परिसंपत्तियों को लेकर भी उन पर कई आरोप हैं। हालांकि अरनॉल्ट ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन इन विवादों के चलते बीते कुछ माह में स्वीडिश अकादमी के 18 में से छह सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं।
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हैश मी-टू आंदोलन के चलते सामने आया सैक्स स्कैंडल
पिछले साल नवंबर में हैश टैग मी-टू आंदोलन के चलते यह पूरा मामला सामने आया। फ्रांसीसी फोटोग्राफर क्लाउड अरनॉल्ट पर 18 महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह बात आग की तरह फैल गई। इसके बाद अवार्ड देने वाली 18 सदस्यों की संस्था ने अरनॉल्ट की पत्नी और संस्था की सदस्य कैटरीना को समिति से निकालने के लिए मतदान किया।