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बसों में सफर करने वाले पोप

Thu, 14 Mar 2013 07:27 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 14 Mar 2013 07:27 PM IST
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new pope profile

रोमन कैथोलिक चर्च के नए पोप चुने गए फ्रांसिस प्रथम का जन्म अर्जेंटीना में हुआ। वे पहले ऐसे पोप हैं जिनका संबंध लातिन अमेरिका से है।

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सेंट पीटर्स स्क्वायर पर अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मेरे कार्डिनल भाइयों को (पोप चुनने के लिए) दुनिया के अंतिम छोर तक जाना पड़ा।
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वेटिकन में कार्डिनलों के सम्मेलन में पोप चुने जाने के बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि नया पोप, फ्रांसिस प्रथम बनने पर अत्यंत प्रसन्न हूं।

पोप चुने जाने से पहले यानी 13 मार्च 2013 तक उन्हें कार्डिनल खोर्खे मारियो बेरगोगलियो के नाम से जाना जाता था।

पिछले कई दशकों से एक फेफड़े के सहारे जी रहे फ्रांसिस प्रथम फुटबाल के प्रशंसक हैं और ब्यूनस आयर्स की टीम को पसंद करते हैं।

सादा जीवन
उनका जन्म 17 दिसंबर 1936 को ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनके पिता एक इतालवी प्रवासी थे। विनम्र व्यवहार की वजह से फ्रांसिस प्रथम का रुढ़िवादी और उदारवादी, दोनों सम्मान करते हैं।
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वेटिकन की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक युवावस्था में खोर्खे बेरगोगलियो ने पादरी बनने के लिए अर्जेंटीना और जर्मनी में पढ़ाई की और 1962 में बिशप बने। वे 1998 में ब्यूनस आयर्स के कार्डिनल चुने गए।

पोप के लिए 2005 में हुए चुनाव में ख़ोर्खे बेरगोगलियो को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। अर्जेंटीना में उनके धार्मिक उपदेशों को ख़ासा प्रभाव है, वे अक्सर समाजिक भेदभाव और समाज के हाशिए पर रहे लोगों पर सरकार के ध्यान न देने पर चिंता जताते रहते हैं।

फ्रांसिस प्रथम की जीवन की सह लेखक फ्रांसिस्का एंब्रोगेटी ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया कि उनका सादगी भरा जीवन लोगों को आकर्षित करता है।

वह बताती हैं कि फ्रांसिस प्रथम मेट्रो रेल, बसों में सफर करते हैं और जब उन्हें रोम जाना होता है तो विमान की इकॉनोमी क्लास में जाना पसंद करते हैं।

फ्रांसिस प्रथम ब्यूनस आयर्स में गिरजाघर के ठीक बगल में स्थित एक साधारण से फ्लैट में रहते हैं।

सामाजिक न्याय के पैरोकार
हालांकि जानकार उन्हें पोप बेनेडिक्ट सोलहवें का उत्तराधिकार संभालने के लिए पसंदीदा उम्मीदवार नहीं मान रहे थे, क्योंकि उनकी उम्र 76 साल हो चुकी है।

पोप चुने जाते समय बेनेडिक्ट की आयु बेरगोगलिया से सिर्फ दो साल ही ज्यादा थी। ऐसे में वो लोग जरूर हैरान हैं, जो उम्मीद कर रहे थे कि रोमन कैथोलिक चर्च के 266वें पोप पहले के मुकाबले किसी युवा को बनाया जाएगा।


पोप फ्रांसिस प्रथम रुढिवादी और सुधारवादी दोनों ही माने जाते हैं। यौन संबधी विषयों पर जहां उनके विचार पुरातनपंथी कहे जा सकते हैं, वहीं सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे पर उनका नजरिया उदारवादी है।

लातिन अमेरिकी बिशपों के 2007 में हुए सम्मेलन में उनके हवाले से ‘नेशनल कैथोलिक रिपोर्टर’ ने लिखा था, “दुनिया में चीजों का अन्यायपूर्ण बंटवारा कायम है। इससे सामाजिक पाप वाली स्थिति पैदा हो रही है. इससे हमारे बहुत से भाइयों के जीवन की संपूर्ण संभावनाएं सीमित होती हैं।”

गर्भपात, गर्भनिरोधक और समलैंगिक शादियों जैसे विषय पर नए पोप के विचार रुढिवादी ही हैं।

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