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'हलाल घरों' को लेकर मुसलमान निशाने पर

Wed, 12 Dec 2012 02:34 PM IST
एना हॉलिगन नीदरलैंड्स से बीबीसी संवाददाता
एना हॉलिगन नीदरलैंड्स से बीबीसी संवाददाता Updated Wed, 12 Dec 2012 02:34 PM IST
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muslim on target on issue of halal homes

नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम में इन दिनों एक नया विवाद गर्माया हुआ है। राजधानी में कुछ ख़ास अपार्टमेंट्स में नवीनीकरण की मंजूरी दी गई है जिन्हें 'हलाल होम्स' के नाम से पुकारा जाता है। ये मंजूरी एक बड़े राजनीतिक विवाद की वजह बन गई।

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एम्सटर्डम में उन 180 अपार्टमेंट्स को ख़ास तौर पर अलग तरह के मरम्मत की मंजूरी दी गई है, जिनमें मुसलमान नागरिक रहते हैं। इनमें धार्मिक प्रार्थना से पहले साफ सफाई के लिए अलग से नल लगाने की सुविधा दी गई है। इसके अलावा घरों के अंदर स्लाइड करने वाले यानी फिसलने वाले दरवाजे भी लगाए जा रहे हैं ताकि पुरुष और महिलाओं में पर्दा रहे।
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नीदरलैंड्स के कुछ दक्षिणपंथी राजनेताओं ने इसे बहस का मुद्दा बना दिया है। इन नेताओं का कहना है कि इस तरह की सुविधा मांगने वाले लोगों को रहने के लिए मक्का चले जाना चाहिए।
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वैसे एम्सटर्डम के पश्चिम में कम संपन्नता वाले अवासीय इलाके बो और लोम्मर में स्थित ये अपार्टमेंट्स बाहर से दूसरे आम अपार्टमेंट्स की तरह नजर आते हैं।

हालांकि यहां स्थित दूसरे घरों में भी इस तरह के बदलाव नज़र आते हैं। आयनूर यिलड्रिम ने अपने घर में अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर लगा नल दिखाया जो मरम्मत हो रहे घरों जैसा ही है।

यिलड्रिम इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अपनी किचन भी दिखाती हैं जिसमें फिसलने वाले दरवाजे लगे हुए हैं। यिलड्रिम कहती हैं, “मैं किचन बंद रखना चाहती हूं तो यह दरवाजा काम आता है, कभी-कभी प्राइवेसी के लिए भी इसे बंद करते हैं। कभी-कभी पुरुषों से अलग रहने की चाहत होती है तो उस वक्त भी ये दरवाजा काम आता है।”

इगिन हार्ड हाउसिंग एसोसिएशन के विम डि वॉर्ड इस बात पर जोर देते हैं कि ये बदलाव धार्मिक वजहों के बजाए व्यावहारिक जरूरतों के लिए कराए जा रहे हैं।”

भेदभाव
इन बदलावों को मंजूरी दिए जाने से पहले मुस्लिम समूह सहित स्थानीय लोगों से सलाह मशिवरा किया गया था।

डि वॉर्ड के मुताबिक ये अपार्टमेंट्स केवल मुस्लिम लोगों के लिए आरक्षित नहीं हैं बल्कि इसे आवेदन करने वाले जरूरतमंद लोगों को आवंटित किया गया था।

लेकिन कई डच लोगों की राय इससे एकदम उलट है। उनकी दलील है कि नीदरलैंड्स ऐतिहासिक तौर पर एक उदारवादी देश रहा है जहां पुरुषों और महिलाओं को एकसमान नज़र से देखा जाता है।

अब घरों के अंदर ऐसे दरवाजे लगाए जाने से लैंगिक असमानता को बढ़ावा मिल सकता है।

नीदरलैंड्स के विवादास्पद मुस्लिम विरोधी राजनेता गेर्ट वाइर्ल्डस ने डच अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे मध्ययुगीन लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने सार्वजनिक तौर पर भविष्यवाणी की है कि आने वाले दिनों में डच नागरिकों में ध्रुवीकरण बढ़ जाएगा। वैसे वाइर्ल्डस इससे भी तीखी बयानबाज़ी के लिए मशहूर रहे हैं। दो साल पहले धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिशों के चलते उन्हें अदालत में हाज़िर होना पड़ा था।

राजनीति
हाल में हुए संसदीय चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। वाइल्डर्स इस मुद्दे पर भड़काऊ बयान देकर दक्षिणपंथी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

इसमें वे ख़ासे कामयाब भी हुए हैं। हाल में कराए गए ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि अगर नीदरलैंड्स में कल को चुनाव हो गए तो वाइर्ल्डस की फ्रीडम पार्टी (पीवीवी) चुनाव जीत सकती है।

पीवीवी का समर्थन कर रहे एक प्रापर्टी डेवलेपर ने बताया है कि हलाल होम्स के विचार से वह काफी निराश हुए हैं। उन्होंने शिकायती लहजे में कहा, “यह हास्यास्पद है, मैं तो इसे मज़ाक समझ रहा था।”

इनकी शिकायत यहीं नहीं थमती। वे कहते हैं, “कुरान में शामिल बातें भेदभाव को बढ़ाने वाली हैं। ये हमें मध्ययुग की ओर ले जा रही हैं। ये लोग सामाजिक तौर पर पिछड़े हुए हैं। शिक्षित नहीं हैं और अब पिछड़े हुए मूल्यों को हमारी संस्कृति में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि इन्हें हमारी आधुनिक सोच और मुक्त विचार को अपनाना चाहिए।”

हालांकि दूसरी ओर इलाके के कुछ लोगों ने अपने पड़ोसी घरों में होने वाले इन बदलावों को स्वीकार कर लिया है।

हलाल होम्स के उसी ब्लॉक में रहने वाली तेस डूयगहूसेन ने कहा, “नए लोग इलाके में बस रहे हैं, उसमें से कुछ मुझे पसंद भी करते हैं। यहां रह रहे अलग अलग देशों के लोगों के बीच काफी बातचीत होती है। आप मेरा विश्वास रखिए यहां ध्रुवीकरण जैसी कोई समस्या नहीं है।”

वैसे हलाल होम्स का मसला नीदरलैंड्स की सोशल मीडिया पर भी खूब छाया हुआ है। ट्विटर पर एक शख्स ने लिखा है कि हलाल होम्स में मरम्मत आम जनता के टैक्स के पैसों से कराया जा रहा है। सरकारी अनुदान के पैसों से असमानता को बढ़ावा देना ग़लत है।

हाउसिंग एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी पैसा हमें गारंटी के तौर पर मिलता है लेकिन इसे अब तक अनुदान ही कहा जा रहा है। एसोसिएशन के मुताबिक इन घरों की मरम्मत की इजाज़त जरूरत को देखते हुए दी गई है। घरों का ऐसा रूप दिया जा रहा है जिससे इसे किराए पर देने लायक बनाया जा सके।


एसोसिएशन की ओर ये भी कहा जा रहा है कि इस कदम से हर किसी को संतुष्ट करने की कोशिश की गई लेकिन धर्म हो या राजनीति या फिर सार्वजनिक जीवन आप हर किसी को संतुष्ट नहीं कर सकते।

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