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क्या था नोकिया की सफलता का राज?
बीबीसी
Updated Wed, 04 Sep 2013 07:16 PM IST
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पिछले कुछ सालों से नोकिया को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है और अब आखिरकार इसके बिक जाने की घोषणा की गई है।
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कंप्यूटर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने नोकिया को 7।2 अरब डॉलर में खरीदने का फैसला किया है। ये सौदा 2014 में पूरा होगा जब नोकिया के लगभग 32 हजार कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
पर एक जमाना वो भी था जब नोकिया को भारत में मोबाइल का पर्याय माना जाता था।
भारतीय उपभोक्ताओं को मोबाइल से रूबरू कराने वाली इस कंपनी ने 1995 में भारतीय बाजार में प्रवेश किया था और लगभग डेढ़ दशक तक भारतीय मोबाइल हैंडसेट बाजार में अपना दबदबा बनाए रखा।
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यूरोप के एक छोटे से देश फिनलैंड की कंपनी नोकिया ने भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर मोबाइल में बदलाव किए और यही उसकी सफलता का राज था।
नोकिया को खरीदेगी माइक्रोसॉफ्ट
तकनीकी विशेषज्ञ प्रशांतो कुमार रॉय का कहना है," नोकिया ने भारतीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों के मुताबिक अपनी रणनीति बनाई और लंबे समय तक उन्हें रिझाने में सफल रही। भारतीय मोबाइल बाज़ार में कई क्रांतिकारी चीज़ें शुरू करने का श्रेय नोकिया को ही जाता है।"
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निर्माण इकाई
नोकिया भारत में अपनी निर्माण इकाई शुरू करने वाली पहली कंपनी थी। साथ ही कंपनी ने भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को समझते हुए बेहद सस्ते, टॉर्च वाले और लाइफ टूल वाले फोन बनाए।
नोकिया ने साल 2006 में चेन्नई के पास श्रीपेरुबंदूर में अपनी निर्माण इकाई स्थापित की। कंपनी इसमें अब तक 25 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुकी है।
इस इकाई में बनने वाले 50 प्रतिशत से अधिक फोन 59 देशों को निर्यात किए जाते हैं।
सस्ते फोन
नोकिया ने भारतीय उपभोक्ता की जेब के हिसाब से फोन बनाए। यही वजह थी कि लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। साल 2000 में कंपनी ने नोकिया 3210 मॉडल भारतीय बाज़ार में उतारा जिसका मेन्यू हिन्दी में था।
इसी तरह कंपनी ने 2003 में नोकिया 1100 उतारा जो विशेष तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया पहला फोन था। इस फोन में टॉर्च थी जिसका जादू भारतीय उपभोक्ताओं के सिर चढ़ कर बोला था।
लाइफ टूल
नोकिया ने विशेष तौर पर किसानों को मौसम और बाज़ार की जानकारी देने के लिए लाइफ टूल विकसित किया।
तकनीकी विशेषज्ञ प्रशांतो कुमार रॉय कहते हैं कि लाइफ टूल की तकनीक बेहद आसान है। इसके लिए स्मार्टफोन की जरूरत नहीं है।
यह टूल 1000 रुपए कीमत वाले फोन में भी उपलब्ध है और कोई अनपढ़ आदमी भी इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। यह काफी सफल रहा।
नोकिया के लिए भारतीय बाजार की अहमियत को इस बात से समझा जा सकता है कि कंपनी की कुल वैश्विक बिक्री का 12 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है।
गिरावट
कंपनी की साल 2009 में भारतीय बाजार में भागीदारी क़रीब 54 प्रतिशत थी।
लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आती रही और बीते साल दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने इसके पछाड़ कर नंबर एक का तमगा हासिल कर लिया।
वॉइस एंड डेटा के 18वें सालाना सर्वेक्षण के मुताबिक़ बीते वित्त वर्ष में सैमसंग की भारतीय मोबाइल बाजार में हिस्सेदारी बढ़कर 31।5 प्रतिशत पहुंच गई जबकि नोकिया 27।2 फ़ीसदी के साथ दूसरे स्थान पर फिसल गई।
नोकिया की लूमिया सिरीज के फोन भारतीय उपभोक्ताओं को रिझाने में नाकाम रहे जिसकी वजह से भारतीय बाजार में उसकी हिस्सेदारी कम हो गई।