पुरुषों में बढ रहा है कैंसर का खतरा?

बीबीसी हिंदी Updated Sun, 23 Dec 2012 08:09 PM IST
mens cancer risk to climb to one in two
पहले की तुलना में अब कहीं ज्यादा पुरुष कैंसर के शिकार बन रहे हैं। ग्रेट ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक़ पुरुषों में कैंसर होने का खतरा अब दोगुना हो चुका है।

ग्रेट ब्रिटेन के कैंसर रिसर्च संस्थान के चिकित्सकों के मुताबिक़ औसत आयु बढ़ने से कैंसर होने का ख़तरा भी बढ़ रहा है। आशंका ये भी है कि आने वाले 15 सालों में पुरुषों में आंत, प्रोस्टेट और त्वचा (मेलानोमा) कैंसर होने के मामले बढ़ेंगे।

हालांकि यह ख़तरा बहुत बड़ा नहीं होगा क्योंकि अधिकांश मामलों में कैंसर का इलाज संभव होगा। पिछले कुछ सालों का अनुभव बता रहा है कि कैंसर अब जानलेवा नहीं रहा। बीते 40 साल के दौरान कैंसर से बचने वाले लोगों की संख्या भी लगभग दोगुनी हुई है।

मामले बढ़ेंगे लेकिन ख़तरा नहीं
कैंसर के इलाज को लेकर तमाम तरह के अनुसंधान अभी भी चल रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में बेहतर इलाज संभव होगा।

लंदन विश्वविद्यालय के वॉल्फ़सन इंस्टीच्यूट ऑफ प्रीवेंटेटिव मेडिसिन और कैंसर रिसर्च ग्रेट ब्रिटेन के शोध वैज्ञानिकों के आकलन है कि ब्रिटेन में कैंसर पीड़ित परुषों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।

इसके मुताबिक़ 2027 में ग्रेट ब्रिटेन में चार लाख सोलह हज़ार से ज़्यादा लोग कैंसर की चपेट में होंगे। 2010 में एक लाख चौंसठ हज़ार लोग कैंसर से पीड़ित थे।

वहीं महिलाओं में कैंसर इतनी तेज़ी से नहीं फैल रहा है। 2010 में एक लाख साठ हज़ार महिलाएं कैंसर से पीड़ित थीं। आकल है कि 2027 में कैंसर की चपेट में आने वाली महिलाओं की संख्या एक लाख चौरानवे हज़ार हो जाएगी।

कैंसर रिसर्च, ग्रेट ब्रिटेन के डॉ। हरपाल कुमार के मुताबिक़ यह अध्ययन बता रहा है कि आने वाले दिनों में कैंसर का ख़तरा बढ़ेगा। हालांकि दुनिया के दूसरे हिस्सों में इस तरह का ख़तरा कितना बढ़ेगा इसका आकलन अभी होना बाक़ी है।

बहरहाल इन आशंकाओं के बीच चिकित्सकों का दल प्रोस्टेट कैंसर का कारगर इलाज तलाशने की कोशिशों में जुटा है। वैसे तो प्रोस्टेट कैंसर अब जानलेवा नहीं रहा। कई मामलों में देखा गया है कि लोग प्रोस्टेट कैंसर के साथ बिना किसी मुश्किल के जीवन भर रह लेते हैं। लेकिन अब तक इसको लेकर चिकित्सकों को पुख़्ता प्रमाण नहीं मिले हैं कि प्रोस्टेट ट्यूमर से कोई ख़तरा नहीं है।

जागरूकता से बचाव संभव
हालांकि चिंता की एक दूसरी वजह भी मौजूद है। ज़्यादातर पुरुष कैंसर की जांच का इलाज कराने के प्रति लापरवाही दिखाते हैं। लीड्स मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के मैन्स हेल्थ फोरम के चेयरमैन एलन व्हाइट के मुताबिक़ पुरुषों में महिलाओं की तुलना में आंत का कैंसर ज़्यादा हो रहा है।

वे कहते हैं कि कुछ पुरुष कैंसर को लेकर भाग्यवादी रवैया अपनाते हैं। लेकिन अगर वे जांच कराएं तो स्थिति बेहतर हो सकती है। कैंसर की पहचान जल्दी होने से इलाज आसानी से संभव है। एलन व्हाइट के मुताबिक थोड़ी सी जागरुकता से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। व्हाइट के मुताबिक़ कम शराब पीकर, ध्रूमपान छोड़कर, पर्याप्त व्यायाम करके और खान-पान पर ध्यान देकर कैंसर के मामले को 40 फ़ीसदी तक कम किया जा सकता है।

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