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पुरुष-महिला पर फ्लू का असर अलग?

Mon, 17 Dec 2012 11:45 PM IST
बीबीसी हिंदी/फिलिपा रॉक्सबी
बीबीसी हिंदी/फिलिपा रॉक्सबी Updated Mon, 17 Dec 2012 11:45 PM IST
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male and female flu effect isolate

सर्दी-ज़ुकाम एक ऐसी बीमारी है जो हर किसी को होती है। लेकिन क्या इसका असर महिलाओं और पुरुषों पर अलग अलग होता है? एक शोध के मुताबिक, बच्चों के साथ ज़्यादा समय गुज़ारने के कारण महिलाओं को फ्लू होने की आशंका पुरुषों से कहीं अधिक होती है।

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ब्रिटेन में लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के एक सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं में फ्लू का इंफेक्शन होने की संभावना 16 प्रतिशत तक होती है। लेकिन क्या इस बीमारी की शिकार सिर्फ महिलाएं हैं?
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सर्वेक्षण
इन सर्दियों में फ्लू के बारे में जानने के लिए लंदन में ऑनलाइन सर्वे शुरु हो चुका है। इस सर्वेक्षण में देशभर में अलग-अलग उम्र के जिन-जिन लोगों को भी फ्लू का इंफेक्शन हुआ है, उन्हें एक प्रश्नावली का जवाब देना होगा।
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सर्वेक्षण के दौरान एकत्र की गई जानकारियों का इस्तेमाल ये पता लगाने में किया जाएगा कि सर्दियों में फ्लू का संक्रमण देश के किन-किन हिस्सों से होते हुए फैला है। शोधकर्ता इन आँकडों का विश्लेषण कर इस वायरस के स्वभाव के बारे में पता लगाने की कोशिश करेंगे।

कितने बीमार हैं आप?
इस शोधकार्य का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर अलमा एडलर के मुताबिक सर्वेक्षण के दौरान उनकी कोशिश ये पता लगाने की है कि क्या इस बीमारी का असर मर्दों और औरतों में अलग-अलग तरीके से होता है। उनका कहना है कि उन्हें अभी तक 'मेन-फ्लू' जैसी चीज़ होने के बारे में कोई प्रमाण नहीं मिला है।

एडलर आगे कहते हैं कि, ''फ्लू होने का ख़तरा सबसे ज़्यादा उन महिलाओं को होता है जो 18 से कम उम्र में मां बन जाती हैं।'' एडलर ने इस साल अपनी प्रश्नावली में कुछ नए सवाल जोड़े हैं। जैसे, 'आप कितना बुरा महसूस कर रहे हैं?'

लोग इस सवाल का जवाब 1-10 तक के अंकों में दे सकते हैं। वे कहते हैं कि इस तरह के सवालों के ज़रिए वे इस बीमारी से जुड़े विज्ञान के साथ-साथ इंसान के मनोविज्ञान को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं।

संवेदनशीलता
शोध करने वालों को उम्मीद है कि ये शोध उन्हें पता करने में मदद करेगा कि पुरुषों की तुलना में क्या महिलाएं इस बीमारी को अलग तरह से महसूस करती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में विषाणु विज्ञान के प्रोफेसर जॉन ऑक्सफोर्ड कहते हैं, ''मेन फ्लू'' होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण आजतक नहीं मिला है, लेकिन इस बीमारी के दौरान स्त्री और पुरुष के बर्ताव में फ़र्क ज़रूर देखा गया है।

वे आगे कहते हैं, ''हम ये जानते हैं कि महिलाओं की प्रतिक्रिया किसी भी इंफेक्शन में पुरुषों से भिन्न होती है। वे अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी संवेदनशील होती हैं। जबकि पुरुष ऐसी स्थिति में ज्य़ादा परेशान हो जाते हैं।'' इससे ये पता चलता है कि बीमारी को लेकर महिलाओं और पुरुषों के न सिर्फ नज़रिये बल्कि उनकी प्रतिक्रिया में भी फर्क होता है।

वे कहते हैं, ''मर्द जब बीमार होते हैं, तब उन्हें लगता है कि वे अब बस मरने वाले हैं और बिस्तर पकड़ लेते हैं और चाहते हैं कि महिलाएं उनका ख्याल रखें।'' रॉयल कॉलेज ऑफ जीपी के रिसर्च यूनिट के सदस्य डॉक्टर डगलस फ्लेमिंग कहते हैं कि फ्लू के असर को लेकर अब तक कोई नियम तय नहीं है क्योंकि हर फ्लू अलग होता है।

वो आगे कहते हैं कि उसका हम पर कितना असर होगा, ये हमारी दिमागी थकान और तनाव पर निर्भर करता है, हम पहले से ये नहीं कह सकते हैं कि उसका हम पर कैसा असर होगा। इसके अलावा विभिन्न वायरस पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर अलग-अलग तरह से असर छोड़ते हैं।

शारीरिक कमज़ोरी
हालांकि इससे पहले कैंब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक शोध के नतीजे कुछ और थे। उस शोध में ये पाया गया था कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं इंफेक्शन से बेहतर तरीके से निपट सकतीं हैं। ऐसा माना जाता था कि प्राकृतिक विकास और हॉर्मोन संबंधी भिन्नताओं के कारण पुरुषों में संक्रमण होने की आशंका महिलाओं से ज़्यादा होती है।

इस शोध टीम के मुताबिक सिर्फ इंसानों में ही नहीं बल्कि जानवरों में भी मादा जानवरों को नर से ज्य़ादा ताकतवर माना जाता है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि ''मेन फ्लू'' अवधारणा पूरी तरह से ग़लत नहीं है।

लेकिन एक तर्क ये भी कहता है कि अगर फ्लू का संक्रमण सबसे ज्य़ादा बच्चों को होता है तो क्या इसका सीधा असर उनकी माँओं पर नहीं पड़ेगा? प्रोफेसर ऑक्सफोर्ड के अनुसार, "इसकी उतनी ही आशंका बच्चे के पिता को होने की होती है, क्योंकि रात में जब माता-पिता एक ही बिस्तर पर सोते हैं तो पत्नी का इंफेक्शन पति को हो जाता है।"


आप चाहे पुरुष हों या महिला, ये मुमकिन है कि आने वाले महीनों में आपको भी फ्लू का इंफेक्शन हो और अगर आप इनमें से किसी भी श्रेणी में आते हों तो बेहतर ये है कि आप इससे बचने के लिए पहले से ही सावधानी बरतें। आप इसकी शुरुआत एंटी-इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगाने से कर सकते हैं और फिर अपने पास हमेशा टिशू पेपर और गर्म पानी की बोतल रखें।

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