फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   late night sleeping make children weak in studies

देर से सोएगा बच्चा तो पढ़ाई में होगा कमजोर!

Thu, 11 Jul 2013 01:57 PM IST
Updated Thu, 11 Jul 2013 01:57 PM IST
विज्ञापन
late night sleeping make children weak in studies

एक ताजा शोध कहता है कि अगर बच्चे रात को देर से सोते हैं तो इससे उनके दिमाग पर असर पड़ सकता है।

विज्ञापन


ब्रिटेन में सोने की आदतों और दिमाग की क्षमता के बीच संबंध पर इस शोध में सात साल की उम्र के 11 हजार से ज्यादा बच्चों पर अध्ययन किया गया है।

जिन बच्चों का रात को सोने का कोई नियमति समय नहीं था या जो रात के नौ बजे के बाद सोते थे, वो पढ़ने में और गणित में कमजोर पाए गए।

शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद की कमी से एक तरफ तो शरीर की लय बिगड़ सकती है तो दूसरी तरफ नई बातें सीखने की दिमाग की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने पहले तीन साल, फिर पांच साल और उसके बाद सात साल की उम्र में नई चीजें सीखने की इन बच्चों की क्षमता पर जानकारी जुटाई और ये जानने की कोशिश भी की कि क्या इस क्षमता का नींद से कोई संबंध है।

लड़कियों पर ज्यादा असर
तीन साल की उम्र में ज्यादातर बच्चों के सोने के समय में बहुत अनियमितता पाई गई। पांच में से लगभग एक बच्चे के सोने का बहुत ही अलग-अलग पाया गया।

जब बच्चे सात साल के हुए तो उनमें से आधे-आधे बच्चे एक निश्चित समय पर सोने लगे जो शाम साढ़े साथ से साढ़े आठ के बीच था।

मिलाजुला कर देखा गया कि जिन बच्चों के सोने का समय निश्चित नहीं था उनके अंक रीडिंग, गणित और सामान्य ज्ञान की परीक्षा में अपने बाकी साथियों से कम आए।

देर से सोने की आदत का बुरा असर लड़कों से ज्यादा लड़कियों में देखा गया। यह भी पाया गया कि लडकियों में इस तरह की परेशानियां आगे भी रहीं।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर अमांडा सैकर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि यह भी संभव है कि सोने की अनियमित दिनचर्या परिवार में अशांत माहौल के कारण हो।
विज्ञापन


पारिवारिक माहौल
इन परिस्थितियों में यह कहा जा सकता है कि देर से सोने की आदत की बजाय पारिवारिक कलह या अशांति बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल रही है।

प्रोफेसर सैकर ने कहा, “हम इन कारणों पर भी सोच विचार कर रहे हैं।”

देर से और अनियमित समय से सोने वाले बच्चे ज्यादातर गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे बच्चे रात को पढ़ने की बजाय टीवी ज्यादा देखते रहते हैं। यह टीवा अकसर उनके बेडरुम में ही लगा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रोफेसर सैकर आगे कहती हैं, “महत्वपूर्ण बात यह है कि एक अच्छी दिनचर्या बच्चों के लिए खास महत्व रखती है। बचपन में ही सोने का एक सही समय तय करना सबसे अच्छा होता है। मगर अब भी देर नहीं हुई है।”

वे यह भी मानती हैं कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि जिन बच्चों को समय से पहले सुला दिया गया हो उनका दिमाग ज्यादा तेज़ चलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed