फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   Jeremy Corbyn labour party leader

लेबर पार्टी पर फिर से चढ़ा लाल रंग

Sun, 13 Sep 2015 08:04 PM IST
Updated Sun, 13 Sep 2015 08:04 PM IST
विज्ञापन
Jeremy Corbyn labour party leader

ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेतृत्व की लड़ाई में वामपंथी नेता जेरेमी कोर्बिन की जबरदस्त जीत से दो दिन पहले जर्मनी के कामगारों ने 24 बरस पहले जमीन में दफना डाली गई लेनिन की मूर्ति को खोद निकाला और अब उसे एक म्यूजियम में स्थापित किया जा रहा है।

विज्ञापन


इन दोनों घटनाओं में परस्पर कोई संबंध नहीं है और न ही इन्हें समाजवाद की वापसी का संकेत मानने की भूल करनी चाहिए। मगर दोनों घटनाएं ये जरूर बताती हैं कि राजनीतिक मर्सिए (किसी की मौत पर लिखी जाने वाली कविता) पढ़ने में जल्दबाजी से काम नहीं लिया जाना चाहिए।
विज्ञापन


टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में बारह बरस पहले जिस लेबर पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ मिलिट्री गठजोड़ करके इराक और अफगानिस्तान पर हमला किया, आज उसी लेबर पार्टी के सदस्यों ने इराक युद्ध के कट्टर और मुखर विरोधी रहे धुर वामपंथी नेता जेरेमी कोर्बिन को लगभग 60 प्रतिशत वोट देकर पार्टी की कमान सौंपी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राजनीतिक पंडित चकित हैं कि आखिर ये चमत्कार हुआ कैसे। क्योंकि अस्सी के दशक में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने ट्रेड यूनियनों को हाशिए पर डालते हुए वामपंथी-समाजवादी राजनीति को हास्यास्पद और पुरातनपंथी साबित कर डाला था।

'अधपगले वामपंथी'

Jeremy Corbyn labour party leader

उसके बाद से अगर कोई भी राजनेता किसी भी तरह से ब्रिटेन में समतावादी उसूलों की बात करता था तो उसे ‘लूनी लेफ़्टिस्ट’ या अधपगला वामपंथी करार दिया जाता था। लंदन के मेयर रहे केन लिविंग्स्टन को उनकी वामपंथी राजनीति के कारण ही टेबलॉयड अखबार 'रेड केन’ कहते रहे हैं।

सोवियत संघ के विघटन और यूरोप में नब्बे के दशक में आए कम्युनिज़्म-विरोधी तूफान में समतावादी विचार और समतामूलक समाज की बात करने को 'ओल्ड फैशन्ड’ कहा जाने लगा।

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेतृत्व की लड़ाई से पहले भी उसकी विरोधी कंजर्वेटिव पार्टी के नेताओं की ओर से कम, खुद लेबर पार्टी के खुले बाजार के हामी दक्षिणपंथी नेताओं की ओर से जेरेमी कोर्बिन की ज्यादा खिल्ली उड़ाई जाती रही।

टोनी ब्लेयर ने आख‌िरी दम तक जेरेमी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि जेरेमी को चुना जाना लेबर पार्टी को खाई में धकेलने जैसा होगा। ब्लेयर ने उनके समर्थकों की हंसी उड़ाते हुए कहा कि वो लोग एक समानांतर यथार्थ में रह रहे हैं।

ब्लेयर के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने लेबर पार्टी के ही गॉर्डन ब्राउन ने परोक्ष तौर पर जेरेमी कोर्बिन पर हमला करते हुए कहा कि लेबर पार्टी को सरकार बनाने में सक्षम पार्टी बननी चाहिए, न कि लगातार विरोध-प्रदर्शन करने वाली पार्टी।

कोर्बिन की राजनीति

Jeremy Corbyn labour party leader

सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के नेता और लंदन के मेयर बोरिस जॉनसन ने तो बाकायदा एक लेख लिखकर उत्सव सा मना डाला कि नेतृत्व की दौड़ में जेरेमी कोर्बिन का होना ही कंजर्वेटिव पार्टी के लिए कितने आह्लाद की बात है। लेख का निहितार्थ था कि कोर्बिन जीत गए तो लेबर पार्टी का गर्त में जाना तय है।

पर कौन हैं जेरेमी कोर्बिन जिन्हें उन्हीं की पार्टी के टोनी ब्लेयर जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नेता और विरोधी कंजरवेटिव पार्टी लगभग एक सुर में देश के लिए और हर परिवार के लिए खतरा बताते है लेकिन लेबर पार्टी के आम सदस्य उन्हें कंधों पर उठा लेते हैं?

आख‌िर जेरेमी कोर्बिन के ऐसे कौन से सिद्धांत हैं जिन्हें लेबर या कंजरवेटिव पार्टी का दक्षिणपंथी धड़ा स्वीकार नहीं करता लेकिन लेबर पार्टी के 59।5 प्रतिशत सदस्य उन्हीं सिद्धांतों का समर्थन करते हैं?

जेरेमी कोर्बिन 1983 से ही लंदन की इस्लिंग्टन नॉर्थ संसदीय सीट से जीतते आ रहे हैं और जब टोनी ब्लेयर, जैक स्ट्रॉ और गॉर्डन ब्राउन ब्रिटेन ही नहीं पूरी दुनिया को बता रहे थे कि सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के हथियार हैं और वो सिर्फ 45 मिनट के भीतर ब्रिटेन पर हमला करने में सक्षम है और इसी कारण इराक से युद्ध अनिवार्य है, उस वक्त टोनी बेन जैसे लेबर पार्टी के नेताओं के साथ जेरेमी कोर्बिन लंदन की सड़कों पर लाखों लोगों के युद्ध-विरोधी प्रदर्शन में शिरकत कर रहे थे।

परमाणु हथियारों का विरोध

Jeremy Corbyn labour party leader

वो इराक पर ब्रिटेन और अमरीका के संयुक्त हमले से पहले बने युद्ध-विरोधी मोर्चे - स्टॉप द वॉर - के शुरुआत से ही अगुवा रहे हैं। उन्होंने लेबर पार्टी के सांसद रहते हुए अपनी पार्टी का विरोध किया और संसद में युद्ध के ख‌िलाफ वोट दिया।

कोर्बिन लगातार परमाणु हथियारों का विरोध करते रहे हैं और उन्होंने ब्रिटेन के मिसाइल सुरक्षा कवच ट्राइडेंट को खत्म करने की अपील की है। यही नहीं, कोर्बिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के हिमायती रहे हैं, ब्रिटेन में रेलवे के निजीकरण के ख‌िलाफ उन्होंने अभियान चलाया है। वो अमरीकी नीतियों के आलोचक भी रहे हैं।


सन 2013 में एक युद्ध-विरोधी सम्मेलन में कोर्बिन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय भूमिका निभाने की सनक में ब्रिटेन की सरकारें वही करती रही हैं जो अमरीका उनसे करवाना चाहता है।

इसी सम्मेलन में उन्होंने कहा, “अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ के साथ शुरू हुई अदावत का नतीजा थी।

पर 1990 के बाद ये सब बदल गया, इसलिए हथियार और हवाई जहाज बनाने वालों और फौजी जरनैलों की भूख शांत करने के लिए कोई और कारण ढूंढना जरूरी था। 11 सितंबर 2011 को न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुई घटना से उन्हें ये मौका मिल गया।”

एनएचएस के पक्के हिमायती

Jeremy Corbyn labour party leader

ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त हैं। मगर खुले बाजार का समर्थन करने वाले लगातार नेशनल हेल्थ सर्विस को नाकारा बताकर इसे खत्म करना चाहते हैं। जेरेमी कोर्बिन एनएचएस के पक्के हिमायती हैं। वो मुफ्त शिक्षा का भी समर्थन करते रहे हैं। ब्रिटेन की राजनीति के दक्षिणपंथी हिस्से को इन सब नीतियों से 'समाजवाद की गंध' आती है।

इन नीतियों का समर्थन करने वाले जेरेमी कोर्बिन को पहले प्रभावहीन कहकर खारिज किया गया, फिर उनका बढ़ता समर्थन देख उनकी और उनके समर्थकों की खिल्ली उड़ाई गई और अंत में उन्हें खतरनाक बताया गया।

अंत में एक महत्वपूर्ण सवाल: अब जबकि लेबर पार्टी की कमान जेरेमी कोर्बिन के हाथों में है, क्या वो उतने रैडिकल, उतने युद्ध-विरोधी और उतने कामगार-समर्थक रह पाएंगे जितने एक बैक बेंचर सांसद के तौर पर थे?

यही सवाल तय करेगा कि आने वाले बरसों में ब्रिटेन की राजनीतिक आबोहवा बदलेगी या फिर बाज़ार का बोलबाला बना रहेगा और समतामूलक समाज के विचार को एपिंग फॉरेस्ट के बियाबान में जमीदोज कर दिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed