{"_id":"05be92cb3bcf583dc5b5a00450d13efb","slug":"jack-the-ripper-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"वो नशे में धुत वेश्याओं को बनाता था शिकार","category":{"title":"Europe","title_hn":"यूरोप","slug":"europe"}}
वो नशे में धुत वेश्याओं को बनाता था शिकार
Updated Fri, 06 Sep 2013 07:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'जैक द रिपर' एक बेहद खौफनाक हत्यारा जो केवल नशे में धुत वेश्याओं को ही अपना शिकार बनाता था। कौन था वो? और क्यों करता था वेश्याओं की हत्या।
विज्ञापन
अखबार में छपे इस सनसनीखेज खत के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं थी कि इसे उस सीरियल किलर ने ही लिखा है। मगर इस खत ने उस हत्यारे को एक पहचान, एक नाम दे दिया। 'जैक द रिपर'।
विज्ञापन
जैक द रिपर ने पाँच हत्याएं की। सब की जान वह एक खास तरीके से लेता था। उन पांचों के गर्दन किसी तेज धार वाले हथियार से रेते गए थे।
लंदन का व्हाइट चैपल इलाक़ा वेश्याओं का गढ़ माना जाता था। जैक ने इसी इलाके में ज्यादातर हत्याओं को अंजाम दिया।
31 अगस्त, 1988। जैक ने अपना पहला शिकार किया। वह मेरी एन निकोलस थी। मेरी निकोलस का शव सुबह-सुबह दो कारोबारियों को मिला।
एक कारोबारी ने बताया, "हम वहां गए। देखा एक औरत जमीन पर पड़ी हुई है। पहली नजर में पता नहीं चल रहा था कि वह नशे में धुत्त होकर पड़ी है, या मर गई है। मेरे साथी ने टार्च दिखाई। उसका गला रेता हुआ था।"
विज्ञापन
नशे में धुत्त वेश्याएं
इस हत्या को बस एक ही सप्ताह गुजरा था कि एक और वेश्या, ऐनी चैपमेन, की हत्या हो गई। हत्या लगभग एक ही तरीके से की गई थी।
'द स्टार', 8 सितंबर 1888। अख़बार में खबर आई, "लंदन खूनी साए के गिरफ्त में है। वह अनाम वहशी, आधा दानव, आधा इंसान, अभी तक फरार है। रोज सड़कों पर खतरनाक इरादों के साथ निकलता है, बेबस और कमजोर वर्ग के लोगों को अपना शिकार बनाता है। वह खून के नशे में है। बचो, उसे और शिकार चाहिए।"
लंदन का पूर्वी इलाका व्हाइट चैपल अशांत हो उठा। हत्यारे को ढूंढ़ने में पुलिस ने अपनी सारी ताकत झोंक दी।
पुलिस ने इलाके में रहने वाली लगभग सौ वेश्याओं से पूछताछ की।
वेश्याओं ने एक ऐसे शख्स के बारे में बताया जो जबरन वसूली का गोरखधंधा चलाता था।
कहीं वह यहूदी तो नहीं था
दुर्भाग्य से वे उसका सही सही हुलिया नहीं बता पा रही थीं। उन्होंने बताया कि वह चमड़े का ऐप्रन हमेशा पहने रहता है।
पुलिस को डर था कि चमड़े का ऐप्रन पहनने वाला वह आदमी कहीं कोई यहूदी न हो। उसे गिरफ्तार किए जाने पर दंगों के भड़क उठने का डर था।
मगर राहत की बात है कि यह आशंका गलत साबित हुई। सितंबर के अंत में अपने खतरनाक इरादों के साथ रिपर एक बार फिर सामने आया। इस बार उसने दो औरतों को अपना शिकार बनाया।
एक अक्तूबर, 1888। 'द स्टार' ने फिर खबर छापी। 'सफेद चैपल वापस आ गया है। इस बार उसने दो शिकार किए।"
रानी विक्टोरिया
ये हत्याएं रात के एक बजे हुईं। इस बार भी गला रेत कर हत्या की गई थी। दोहरे हत्या की इस वारदात ने लंदन ही नहीं दुनिया भर में सनसनी फैला दी। ब्रिटेन ही नहीं, दुनिया भर में यह खबर हेडलाइन बनी।
लंदन के पूर्वी इलाक़े, व्हाइट चैपल, में घटना स्थल को देश भर से हजारों लोग वहां आए। यहां तक कि रानी विक्टोरिया भी यहां आने से ख़ुद को न रोक सकीं।
रानी विक्टोरिया चाहती थीं कि यहां बड़ी संख्या में जासूसों को लगाया जाए। उन्होंने कई तरह के सवाल उठाए। पूर्वी इलाके में सावधानी बरतते हुए पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई। चप्पे चप्पे पर जासूस लगाए गए। हत्यारे ने अपने कदम कुछ दिन के लिए रोक दिए।
सवाल अब भी जिंदा हैं
मगर एक ही महीने बाद ही उसे अंदाज़ा हो गया कि अब शिकार पर निकलने में कोई ख़तरा नहीं है।
मेरी केली। मेरी रिपर की सबसे कम उम्र की शिकार साबित हुई। 25 साल उम्र थी उसकी। वह अकेली शिकार थी, जिसे घर के भीतर मारा गया।
उसकी मकान मालकिन ने बताया कि उसकी हालत देखकर लगता था कि यह काम किसी इंसान का नहीं, बल्कि किसी हैवान का है।
भले इसके बाद 'जैक द रिपर' ने हत्याएं करनी बंद कर दी मगर वह विक्टोरिया युग के इंग्लैंड को याद दिलाता रहा।
रिपर की कहानी इसलिए भी लोगों को रोमांचित करती है कि उसके बारे में अभी भी रहस्य बना हुआ है। जितने भी महत्वपूर्ण सुबूत थे उन्हें नष्ट कर दिया गया।
सवाल अब भी जिंदा है कि कौन था, वो हत्यारा? क्या वह कोई पूर्वी प्रवासी था, या एक सामंत था?