फ्रांस चुनावों में भी इस्लामी कट्टरपंथ का विरोध हावी
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नेशनल फ्रंट की उम्मीदवार ली पेन ने अपना घोषणापत्र जारी करते हुए समर्थकों से कहा है कि वैश्वीकरण के कारण कई समुदायों की सांसें घुट रही हैं। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के दमनकारी शासन में फ्रांस की एक स्याह तस्वीर दिखाई जिसमें महिलाओं को कैफे में जाने अथवा स्कर्ट पहनने पर रोक लगाई जाएगी।
ट्रंप के ही समान ली पेन ने भी ग्लोबलाइजेशन का विरोध करते हुए कहा कि - संरक्षणवाद और आर्थिक राष्ट्रभक्ति द्वारा देश में स्थानीय स्तर पर क्रांति लाना जरूरी है। यूरोपीय संघ को विफल करार देते हुए नेशनल फ्रंट की नेता ने कहा कि यह संघ अब तक अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं कर सका है, बल्कि इसके लचर रवैये से देश में मध्य-पूर्व से शरणार्थियों की संख्या जरूर बढ़ गई है।
फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति नहीं लड़ेंगे चुनाव
उल्लेखनीय है कि फ्रांस में इन दिनों 50 लाख से भी अधिक मुस्लिम रह रहे हैं जो पश्चिमी यूरोप के किसी भी देश के अल्पसंख्यकों से कहीं ज्यादा तादाद में हैं। पार्टी घोषणा पत्र में इसी सप्ताह लूव संग्रहालय के बाहर होने वाले हमले का भी जिक्र करते हुए लोगों को कट्टरपंथी इस्लाम के खतरे से आगाह किया गया है। चुनावी सर्वेक्षणों में भी दावा किया गया है कि ली पेन के आक्रामक चुनाव प्रचार के कारण उन्हें चुनाव के पहले दौर में जीत मिलने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है तो इतना तय है कि फ्रांस में भी अमेरिका के समान दक्षिणपंथी विचारधारा का हावी रहना तय है।
फ्रांस का अगला राष्ट्रपति भी गैर राजनीतिक संभव
फ्रांस में मध्य दक्षिणपंथी प्रत्याशी फ्रांस्वा फिलियन इन दिनों घोटालों की जांच में फंसे हुए हैं और वर्तमान राष्ट्रपति व सोशलिस्ट नेता फ्रांस्वा ओलांद ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। इस कारण ली पेन का मुकाबला उदारवादी इमैनुअल मैक्रान से हो सकता है। मैक्रान भी पहली बार चुनाव मैदान में हैं। अत: संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका में ट्रंप के ही समान फ्रांस का अगला राष्ट्रपति भी राजनीति से बाहर के दो में से किसी एक नेता के रूप में हो सकता है। ट्रंप की भी राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।