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वो 'ब्रितानी फ़ौजी के हमलावर' के सामने जा डटी

Fri, 24 May 2013 11:55 AM IST
bbc
bbc Updated Fri, 24 May 2013 11:55 AM IST
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Ingrid Loyau-Kennett symbolises everything radical Islamism is against

“एक स्काउटिंग क्लब के प्रमुख के नाते मैं प्राथमिक उपचार के लिए तैयार रहती हूँ, इसलिए शुरुआत में मैंने सोचा कि यह एक दुर्घटना है”

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दो बच्चों की माँ 48 वर्षीय इंग्रिड लोयाउ-केनेट की कहानी कुछ इसी तरह शुरू होती है। लोयाउ-केनेट बुधवार को दक्षिणी लंदन के वुलिच इलाको में उस वक्त मौजूद थीं, जब दो लोगों ने कथित तौर पर एक ब्रितानी फ़ौजी की हत्या कर दी।
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उन्होंने ब्रितानी मीडिया को बताया, “मैं गई और मैंने देखा कि उसकी धड़कन नहीं चल रही थी। उस व्यक्ति का चेहरा नहीं देख सकती थी, लेकिन ऐसा भी कोई संकेत नहीं था कि जिससे पता चलता कि किसी ने उसका सिर काटने की कोशिश की है। वहाँ ऐसा भी कुछ नहीं था, जिससे पता चलता कि वह एक सैनिक है।”
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बातचीत
लोयाउ-केनेट एक बस में थीं। उन्होंने एक व्यक्ति को देखा, जिसके हाथ खून से रंगे थे। वह बस से उतरीं और उन्होंने उस व्यक्ति से पाँच मिनट से अधिक समय तक बात की।

उन्होंने गार्डियन और डेली टेलीग्राफ सहित ब्रिटिश मीडिया से जो कुछ कहा, उसके आधार पर बीबीसी ने उनकी कहानी प्रसारित की-


काली टोपी लगाए हुए एक काला व्यक्ति जिनके एक हाथ में रिवॉल्वर थी और दूसरे हाथ में कसाइयों वाला चाकू, वो मेरी ओर बढ़ा। मैं काफी नर्वस थी। मगर इससे पहले कि वह किसी और पर हमला करते मैंने उनसे बात की।

हत्या का कारण
ऐसे लोगों के पास आमतौर पर कोई संदेश रहता है और मैंने उसे जानने की कोशिश की।

मैंने उनसे पूछा कि क्या उनके पास कोई संदेश है... और उन्होंने कहा हाँ। मैंने पूछा ये हत्या क्यों? तब उन्होंने कहा कि उन्होंने इसलिए हत्या की है क्योंकि जहाँ ब्रितानी सैनिक हैं, उन देशों में उन्होंने मुसलमानों की हत्या की है। मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने एक ब्रितानी सैनिक की हत्या की है। तो उन्होंने कहा कि हाँ, उसे मारा क्योंकि वहाँ उन्होंने मुसलमानों को मारा है।


उस व्यक्ति ने शराब या ड्रग्स का नशा नहीं किया था। वह काफी गुस्से में था मगर अपने आपे में था और वह जो चाहता था उसे करने के लिए तैयार था।

जंग की चाहत
उसने कहा कि, “हम आज रात से ही लंदन में एक युद्घ की शुरुआत करना चाहते हैं।”

तभी मैंने ध्यान दिया कि उसके पीछे एक हमलावर और था, जिनके हाथ में बंदूक थी। इतने में चारों तरफ लोग जमा होने लगे थे।

मैंने उनसे कहा कि, “इस समय तुम कई लोगों के बीच अकेले हो, हारने वाले हो, ऐसे में तुम क्या करोगे।” उसने कहा कि वह डटकर मुकाबला करना चाहता है।

फिर मैंने कहा कि पुलिस किसी भी समय पहुँच सकती है, ऐसे में वह क्या करेगा, तो उसने कहा कि यह एक युद्घ है और अगर पुलिस आएगी तो वह एजेंट को भी मारेगा।

पुलिस से सामना
मैंने देखा कि मेरी बस चलने लगी थी और मैंने अनुमान लगाया कि पुलिस पहुँचने वाली है। बस के चलने के 10 सेकेण्ड बाद मैंने एक पुलिस कार और दो अधिकारियों को आते हुए देखा।

दोनों काले व्यक्ति कार की ओर दौड़े और पुलिस अधिकारियों ने गोलियाँ दाग दीं, मेरे ख्याल से पैरों में।

मैंने देखा कि काली टोपी वाला व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो चुका था, लेकिन दोनों अभी भी चलने की हालत में थे। मुझे खुशी थी कि मैं कुछ ऐसा करने में कामयाब रही, जिससे मामला और आगे नहीं बढ़ा। मैं अच्छा महसूस कर रही हूँ, लेकिन मेरा अनुमान है कि बाद में इस घटना का सदमा मुझ पर असर दिखा सकता है।

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