फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   indians are more in number in britain from abroad

ब्रिटेन: भारतीय आबादी सबसे ज्यादा क्यों?

Fri, 28 Dec 2012 05:29 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Fri, 28 Dec 2012 05:29 PM IST
विज्ञापन
indians are more in number in britain from abroad

हो सकता है कि लंदन से आप अपरिचित ना हों, टीवी-सिनेमा में ख़ूब देखी हो इसकी झलक, पर फिर भी, जब कोई पहली-पहली बार लंदन आता है तो मन में एक कौतूहल तो होता ही है– कि एक अनजाना देश होगा, अपरिचित विदेशी होंगे। मगर लंदन के व्यस्त हवाई अड्डे हीथ्रो पर पांव रखे ज़्यादा समय नहीं होगा जब आपको एक दूसरी तस्वीर दिखाई देगी– जाने-पहचाने चेहरे, जानी-पहचानी बोली।

विज्ञापन


फिर आप कुछ दिन शहर में बिताएं, बाज़ार-दुकान के चक्कर लगाएं, तो आपको पता चलेगा कि ये कोई ऐसा विदेश नहीं जहां आप किसी विदेशी की तरह दिखाई दें। आप उन विदेशियों की तरह कतई अलग नहीं लगने वाले जो भारत पहुंचने पर कौतूहल का केंद्र बन जाते हैं, जिस कौतूहल को शहरी भद्रजन भले ही तिरछी आंखों से निहारकर दूर कर लेते हों, छोटे शहरों-कस्बों में छोटी-मोटी भीड़ लग ही जाती है।
विज्ञापन


पर लंदन में आपके साथ ऐसा कुछ नहीं होगा, हर दो क़दम पर अपने जैसे चेहरे दिखाई दे जाएंगे। कहीं स्टेशन पर टिकट काटते तो कहीं बस-ट्रेन चलाते, कहीं पुलिस की वर्दी में तो कहीं कॉलेजों के कैम्पस में, कहीं दुकानों पर पेप्सी-पित्ज़ा-माचिस-चॉकलेट बेचते तो कहीं कंप्यूटर-मोबाइल की गुत्थियां सुलझाते – हर तरफ़ अपने जैसे चेहरे। बल्कि कुछ इलाक़ों में चले जाएं तो ऐसा लगेगा मानो आप ही अपने देश में हैं, और बीच-बीच में कहीं किसी जगह दिख जाने वाले गोरे– विदेशी।
विज्ञापन
विज्ञापन


लंदन ऐसा क्यों दिखता है? इस रहस्य से अब पर्दा उठ चुका है – लंदन में आबादी में गोरे अंग्रेज़ों का हिस्सा घटकर आधे से कम हो गया है, पहली बार सब मिलाकर दूसरे देशों के लोग यहां बहुसंख्यक हो गए हैं जिनमें भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश-श्रीलंका जैसे देशों के लोग सबसे ज़्यादा हैं।

ब्रिटेनः जनसंख्या 2011
ब्रिटेनः 6 करोड़ 32 लाख
भारतीयः 2.5%
लंदन में गोरे अंग्रेज़ः 45%
ब्रिटेन में गोरे अंग्रेज़ः 80%
(स्रोतःऑफ़िस फ़ॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स)

जनगणना
ब्रिटेन में जनगणना करने वाले विभाग ऑफ़िस फ़ॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स के अनुसार ब्रिटेन की जनसंख्या अभी 6 करोड़ 32 लाख है। 2011 में हुई जनगणना के अंतिम आंकड़े हाल ही में जारी किए गए हैं जिसके अनुसार लंदन में गोरे अंग्रेज़ों की आबादी घटकर 45% रह गई है, जो दस साल पहले 58% हुआ करती थी।

यानी अभी लंदन में 55% लोग विदेशों के या विदेशी मूल के हैं जो एशियाई, यूरोप के दूसरे देशों, कैरीबियाई देशों और अन्य देशों से आए हैं। सबसे बड़ी संख्या एशियाई लोगों की है जिनमें भारतीय सबसे अधिक हैं। वैसे लंदन के बाहर, पूरे ब्रिटेन में अभी भी गोरे अंग्रेज़ ही बहुसंख्यक हैं। हालांकि आबादी में उनका अनुपात दस साल में घटा है। 2001 में ये 87 फ़ीसदी था, अभी 80 फ़ीसदी रह गया है।

ब्रिटेन के जनसंख्या अनुपात में पिछले 10 सालों में आए बदलाव के लिए मुख्य कारण आप्रवासियों का ब्रिटेन आना बताया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन के मुख्य प्रांतों इंग्लैंड और वेल्स में हर आठवां व्यक्ति विदेश में जन्मा व्यक्ति है।

भारतीय सबसे ज़्यादा
ब्रिटेन में आप्रवासियों में सबसे अधिक हैं भारत से जुड़े लोग – यानी ऐसे लोग जो या तो ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त भारतीय हैं, या यहां रह रहे भारतीय। जनगणना आंकड़ों के अनुसार पिछले दस साल में ब्रिटेन की आबादी में भारतीय और भारतीय मूल के लोगों का हिस्सा दो प्रतिशत से बढ़कर ढाई प्रतिशत हो गया है।

इस हिसाब से ब्रिटेन में भारतीय और भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगभग 16 लाख होती है। इनमें से सात लाख, यानी लगभग आधे ऐसे भारतीय हैं जिनका जन्म ब्रिटेन से बाहर हुआ और जो अब ब्रिटेन में रह रहे हैं। वैसे ब्रिटेन में आप्रवासियों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक होने को ब्रिटेन में 53 साल से रह रहे लॉर्ड भीखू पारेख को नई बात नहीं बताते।

1959 में उच्च शिक्षा के लिए लंदन आए और फिर ब्रिटेन में अध्यापन करनेवाले लॉर्ड पारेख ने कहा, "ये कोई नई बात नहीं है, जब से मैं आया हूं, तबसे हर जनगणना में मैं यही देखता रहा हूं, ये ज़रूर है कि पहले हमारे लोगों की संख्या कम थी, पर आप्रवासियों में हिन्दुस्तानी हमेशा से सबसे अधिक थे।"


लॉर्ड पारेख ने बताया कि ब्रिटेन में हिन्दुस्तानियों की संख्या बढ़ते रहने के तीन कारण हैं – पहला ये कि शुरू-शुरू में भारत से लोगों को काम के लिए यहां बुलाया गया जिसे बाद में बंद कर दिया गया, दूसरा ये कि अफ़्रीकी देशों की आज़ादी के बाद वहां से भारतीय ब्रिटेन आकर बसे और तीसरा ये कि ग्लोबलाइजेशन के दौर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने काम के लिए भारत से पेशेवर लोगों को ब्रिटेन लाना शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed