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लाइव बाल यौन शोषण तस्वीरों की तादाद में इजाफा
Updated Wed, 03 Jul 2013 01:16 AM IST
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बाल यौन शोषण की वेबकैम के ज़रिए लाइव तस्वीरें एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की अश्लील तस्वीरों की संख्या दोगुनी हो गई है।
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ब्रिटेन के बाल शोषण और ऑनलाइन सुरक्षा केंद्र (सीईओपी) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 में लोगों ने 70 हजार अश्लील तस्वीरों की शिकायत की। यह 2011 के मुकाबले दोगुनी संख्या है।
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सीईओपी के सामने ब्रिटेन के अंदर डाउनलोड या शेयर की जा रही अश्लील सामग्री से संबंधित 8 हज़ार मामले आए।
एक अनुमान के मुताबिक लगभग 50 हज़ार ब्रितानी इंटरनेट यूजर अश्लील तस्वीरें इंटरनेट के जरिए साझा करने में शामिल थे।
सीईओपी ने कहा है कि लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग एक उभरता हुआ खतरा है। अपराधी विदेशों खासकर विकासशील देशों के गरीब परिवारों को निशाना बना रहे हैं।
परिवार या इंटरनेट अपराधियों को किए गए पैसे के भुगतान के बदले बच्चों को लाइव वेब कैम पर अश्लील गतिविधियों में लिप्त होने के लिए मजबूर किया गया।
सीईओपी के मुताबिक स्काइप जैसी ऑनलाइन वीडियो चैट सेवाओं का इस्तेमाल बच्चों के शोषण के अश्लील वीडियो लाइव करने के लिए किया गया।
शातिर अपराधी
रिपोर्ट के मुताबिक शातिर इंटरनेट अपराधी एन्क्रिप्टेड या सुरक्षित नेटवर्क के जरिए इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं जिस कारण उन्हें पकड़ना या उन तक पहुंचना बहुत मुश्किल है।
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गोपनीय इंटरनेट सर्वरों का इस्तेमाल 2013 में और भी बढ़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के अंत तक अकेले ब्रिटेन में ही 20 हजार से अधिक लोग रोजाना छुपकर इंटरनेट पर सक्रिय होंगे।
सीईओपी के मुख्य अधिकारी पीटर डेविस कहते हैं, "हमारे आकलन के मुताबिक ऑनलाइन शोषण का शिकार होने वाले बच्चों और ऐसा करने वाले अपराधियों की तादाद बहुत ज्यादा है। बहुत से बच्चे ऐसे हैं जिन पर खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में हमें बेहद सावधान रहने की जरूरत है। बाल यौन शोषण के मामले में हमें कोताही नहीं बरतनी चाहिए।"
इंग्लैंड और वेल्स की पुलिस के अनुमान के मुताबिक अकेले ब्रिटेन में ही हर साल 20 हजार बच्चे बाल यौन शोषण का शिकार होते हैं।
एसपीसीसी के प्रवक्ता कहते हैं, "हालांकि यह पूरा सच नहीं है, बहुत से मामले कभी सामने ही नहीं आ पाते हैं।"
पुलिस के लिए चुनौती
विक्टिम सपोर्ट नाम की एक स्वतंत्र चैरिटी संस्था सवाल करती है, "पुलिस को खुद से कुछ गंभीर सवाल पूछने चाहिए। उनकी पहली जिम्मेदारी अपराध को रोकना और अपराधियों को पकड़ना है।"
संस्था के मुख्य अधिकारी जावेद खान कहते हैं, "बाल यौन शोषण के मामले में पुलिस की तफ्तीश, जानकारी इकट्ठा करने और मामले को वर्गीकृत करने के तरीके में विसंगतियां हैं। अगर हम अपने समाज के सबसे कमजोर तबके को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो हमें सारी कड़ियाँ जोड़नी होंगी।"
पुलिस और आपराधिक न्याय मंत्री डेमियन ग्रीन कहते हैं, "यह आंकड़े परेशान करने वाले हैं और बताते हैं कि हालिया सालों में बाल यौन शोषण के मामले में हमारी समझ बेहतर हुई है। लेकिन हमें और बेहतर काम करने की जरूरत है। सीईओपी अच्छा काम कर रही है। इसी साल में जब इसे नेशनल क्राइम एजेंसी के साथ जोड़ दिया जाएगा तब इसे और मजबूती मिलेगी। हमारा पूरा ध्यान इस बात पर है कि हम खतरा झेल रहे बच्चों को कैसे बचा सकते हैं।"