रूसी क्रांति में लेनिन से कम महत्वपूर्ण नहीं थीं मिसेज लेनिन

बीबीसी,हिंदी Updated Mon, 06 Nov 2017 01:06 PM IST
In Russian Revolution, Mrs. Lenin was not less important than Lenin
नादेज्दा क्रुप्स्काया, इनेसा अरमंद और अलेक्जेंड्रा कोलोनटाई - फोटो : File Photo
उनकी जिंदगी बेहद दिलचस्प रही। उन्होंने निर्वासन भोगा, वो जेल में रहीं, जार की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए गुप्तरूप से गतिविधियों में हिस्सा लिया। वो समाजवादी सरकार की स्थापना के लिए लड़ीं और सोवियत संघ में अहम पदों पर भी रहीं।

लेकिन इतिहास की किताबों में उन्हें वो जगह नहीं मिलीं, जिसकी वे हकदार थीं। इतिहास के पुरुष चरित्रों के साये में उनका वजूद कहीं खोकर रह गया। दुनिया उनमें से कुछ को लेनिन, स्तालिन या ट्रॉटस्की के नाम से जानती है, लेकिन नादेज्दा क्रुप्स्काया, इनेसा अरमंद और अलेक्जेंड्रा कोलोनटाई के बारे में दुनिया बहुत कम जानती है।

लेकिन इसके बावजूद जारशाही के खिलाफ पेट्रोग्रैड (मौजूदा सेंट पीटर्सबर्ग) की सड़कों पर उतरने वाली रूसी महिलाएं ही थीं जिन्होंने निकोलस द्वितीय की हुकूमत के विरुद्ध लोगों का गुस्सा भड़काने का काम किया था। रूस की बोल्शेविक क्रांति में महत्वपूर्ण रोल निभाने वाली महिलाओं पर एक नजर।

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नादेज्दा क्रुप्स्काया
बोल्शेविक क्रांति के इतिहास में अगर कोई महिला अपना नाम दर्ज कराने में कामयाब रही तो वो थीं नादेज्दा क्रुप्स्काया। वो व्लादिमीर लेनिन की पत्नी थीं। रूसी क्रांति में उनकी भूमिका भले ही लेनिन से करीबी तौर पर जुड़ी हुई थी, लेकिन नादेज्दा क्रुप्स्काया की उपलब्धि रूस के पहले नेता की जीवनसाथी होने से कहीं ज्यादा थी।

कहा जाता है कि लेनिन और क्रुप्स्काया की मुलाकात 19वीं सदी के आखिर में हुई थी। 1894 में वो मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़ गई थीं और 1898 में उन्हें तीन साल के लिए साइबेरिया निर्वासित कर दिया गया था। लेनिन भी तब जारशाही के खिलाफ बगावत के कारण निर्वासित हो कर साइबेरिया में थे। इसी साल दोनों ने शादी कर ली। वो यूरोप के कई शहरों में साथ रहे। इस दौरान क्रुप्स्काया ने लेनिन के निजी सचिव के तौर पर काम भी किया।

बारबरा इवांस क्लीमेंट्स ने अपनी किताब 'वीमेन बोल्शेविक्स' में लिखा है कि रूसी क्रांति के शुरुआती सालों में निर्वासन की सजा पाने वाली कोई भी महिला क्रुप्स्काया से कम महत्वपूर्ण नहीं थी।

क्रुप्स्काया के बारे में बारबरा इवांस क्लीमेंट्स ने लिखा है, "वे असाधारण रूप से मेहनती और काबिल महिला थीं। हर हफ्ते तकरीबन 300 चिट्ठियां लिख सकती थीं और उनमें से ज्यादातर कूट भाषा में। वो लोगों के पते और उनके गुप्तनाम याद रखती थीं और इसके अलावा एकाउंट्स देखना भी उनकी जिम्मेदारी थी।"

बोल्शेविकों के हाथ में सत्ता आने के बाद क्रुप्स्काया ने देश के शिक्षा विभाग के लिए काम किया। क्रुप्स्काया लेनिन की मौत के बाद भी सक्रिय रहीं, हालांकि स्तालिन के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे नहीं थे। 1939 में उनकी मौत हो गई और क्रेमिलन में उन्हें लेनिन की कब्र के बगल में दफनाया गया।
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अलेक्जेंड्रा कोलोनटाई यूरोप के इतिहास में सरकारी पद पाने वाली पहली महिलाओं में से एक थीं

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