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जर्मनी: बिस्मार्क के बाद सबसे बड़े नेता रहे हेलमुट की मौत, गिरवाई थी बर्लिन की ऐतिहासिक दीवार

Fri, 16 Jun 2017 10:04 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Fri, 16 Jun 2017 10:04 PM IST
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Helmut Kohl dead: Longest serving German Chancellor since Bismark dies aged 87
बिस्मार्क के बाद सबसे बड़े नेता रहे हेलमुट की मौत, गिरवाई थी बर्लिन की ऐतिहासिक दीवार - फोटो : theguardian
आधुनिक जर्मनी के निर्माता माने जाने वाले हेलमुट कोह्ल की मौत हो गई है। वो जर्मनी में सबसे लंबे समय तक चालंसर रहे थे और जर्मनी के एकीकरण में उन्होंने सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। शीतयुद्ध के आखिरी दौर में वो दुनिया के सबसे चेहेते नेताओं में से एक रहे थे।
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हेलमुट कोह्ल साल 1982 से 1998 तक जर्मनी के चालंसर रहे थे और उनकी मौत अब 87 साल की उम्र में हुई है। उन्हें पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का एकीकरण कराने के लिए 'फादर ऑफ री-यूनिफिकेशन' की संज्ञा दी जाती है। साथ ही शीतयुद्ध के शांतिपूर्ण तरीके से खात्में में भी उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। अमेरिका के राष्ट्रपति रहे जॉर्ज डब्ल्यू बुश सीनियर ने उन्हें एक समय 20वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण नेता कहा था। 
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हेलमुट कोह्ल साल 1982 से 1990 तक पश्चिमी जर्मनी के चालंसर रहे थे। और बाद में एकीकृत जर्मनी में 1990 से 1998 तक चालंसर रहकर देश को विकास की ओर ले जाने में अपनी भूमिका निभाई। 

क्रिश्चियन डेमोक्रेकिट यूनियन पार्टी के नेता रहे हेलमुट कोह्ल 16 सालों तक जर्मनी के चालंसर के पद पर रहे, जो आधुनिक जर्मीन के निर्माता कहे जाने वाले बिस्मार्क के बाद सबसे अधिक है। इसीलिए उन्हें बिस्मार्क के बाद जर्मनी के सबसे सफल नेता के तौर पर भी जाना जाता है।

हेलपुट का जीवन परिचय

Helmut Kohl dead: Longest serving German Chancellor since Bismark dies aged 87
हेलमुट के नाम बर्लिन की दीवार गिराने का ताज - फोटो : Alchetron
हेलमुट कोह्ल अपने शुरुआती जीवन में ही राजनीति में शामिल हो गए थे। वो 1947 में ही सीडीयू के सदस्य बन गए और अपने शहर लुडविषहाफेन में स्टूडेंट यूनियन बनाई। 1966 में वे सीडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बन गए थे। 1966 में ही कोल राइनलैंड पैलैटिनेट राज्य में सीडीयू के अध्यक्ष भी बने। तीन साल बाद 1969 में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाला। और दो साल बाद हुए प्रांतीय चुनावों में उन्होंने पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज की।

जून 1973 में कोल को सीडीयू का अध्यक्ष चुना गया। 25 साल तक उन्होंने यह पद संभाला। 1982 तक देश में एसपीडी और एफडीपी की गठबंधन सरकार थी और हेलमुट श्मिट चांसलर थे। लेकिन एफडीपी ने समर्थन वापस ले लिया और संसद में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके तहत श्मिट को चांसलर का पद छोड़ना पड़ा और कोल चांसलर बने। 1989 में बर्लिन दीवार गिरने के बाद से कोल ने मौके को पहचाना और पूर्व और पश्चिम जर्मनी को एक करने की कोशिश में जुट गए। 3 अक्टूबर 1990 को जीडीआर भी पश्चिम जर्मनी में शामिल हो गया। देश का एकीकरण कोल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

हेलमुट कोल के बिना जर्मनी की मौजूदा चांसलर अंगेला मैर्केल कामयाबी और शिखर की इन ऊंचाइयों को नहीं छू पातीं। मैर्केल जर्मनी की पहली महिला चांसलर हैं और पिछले दस साल से इस पद पर बनी हुई हैं। कोल के शासन में ही मैर्केल पहले परिवार कल्याण मंत्री और फिर पर्यावरण मंत्री बनीं। --इनपुटDB से भी।
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